वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
राज्ञां च प्रतिलोमानां भस्मान्तकरणं महत् ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञां च विविधाश्चर्याः पुराणि विविधानि च ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
राज्ञां चाप्यजितं कञ्चित्कृष्णेनेह न शुश्रुम ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
राज्ञां तानि शरीराणि दाहय़ामास शास्त्रतः ||
१९३ ख
सभा पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञां तु प्रतिपूजार्थं सञ्जय़ं संन्ययोजय़त् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
६७
दुःषन्त उवाच
राज्ञां तु राक्षसोऽप्युक्तो विट्शूद्रेष्वासुरः स्मृतः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
राज्ञां तु विषय़े येषां साधवः परिरक्षिताः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
राज्ञां पूज्यतमो नान्यो यथाधर्मप्रदर्शनः ||
४७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
राज्ञां मध्ये महेष्वासः शान्तभीरभ्यवर्तत ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०९
पाण्डुरु उवाच
राज्ञां मृग न मां मोहात्त्वं गर्हय़ितुमर्हसि ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
राज्ञां राजीवताम्राक्ष साधनं चात्र वै शृणु ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८२
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञां राजीवनेत्रोसौ कुमारः पृथिवीपते |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
राज्ञां विजय़मानानां सेनाग्रेषु ध्वजेषु च |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०८
युधिष्ठिर उवाच
राज्ञां वृत्तं च कोशश्च कोशसञ्जननं महत् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञां शतसहस्राणि योत्स्यमानानि संय़ुगे ||
१०५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञां सकाशे द्युतिमानुवाचेदं वचस्तदा ||
३३ ख
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञां समभ्युद्धरणं यदिदं कृतमद्य ते ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञां सवलमुख्यानां प्राधान्येनापि भारत ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
राज्ञां सुचरितैर्या च गतिर्भवति शाश्वती |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञां स्त्रीणामृषीणां च मार्कण्डेय़ विचक्ष्व नः ||
४३ ख
सभा पर्व
अध्याय
५७
विदुर उवाच
राज्ञां हि चित्तानि परिप्लुतानि; सान्त्वं दत्त्वा मुसलैर्घातय़न्ति ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
राज्ञां हि वलमैश्वर्यं व्रह्म व्रह्मविदां वलम् |
७३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
राज्ञां हि विषय़े येषामवसीदन्ति साधवः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
राज्ञापि धृतराष्ट्रेण त्वय़ा चास्मासु यत्कृतम् |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
१६८
गन्धर्व उवाच
राज्ञाभिवादितस्तेन जगाम पुनराश्रमम् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञामुपाय़ाश्चत्वारो वुद्धिमन्त्रः पराक्रमः |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय
९७
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञि धर्मानवेक्षस्व मा नः सर्वान्व्यनीनशः |
२४ क
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
राज्ञे ददावप्रतिमं पुत्रसम्प्राप्तिकारकम् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
राज्ञे दद्युर्यथाकामं तापसाः संशितव्रताः ||
३२ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञे भोजकटस्थाय़ महामात्राय़ धीमते ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
राज्ञो धर्मप्रधानस्य राष्ट्रे वसति निर्भय़ः ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
राज्ञो निय़ोगाद्योद्धव्यं व्राह्मणेन विशेषतः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
राज्ञो भार्याश्च पुत्राश्च वान्धवाः सुहृदस्तथा |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
राज्ञो महानसे पूर्वं रन्तिदेवस्य वै द्विज |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
राज्ञो मुखमुदीक्षन्ते पाञ्चालाः पाण्डवैः सह |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
राज्ञो यदा जनपदे वहवो राजपूरुषाः |
२३ क
विराट पर्व
अध्याय
३८
वृहन्नडो उवाच
राज्ञो युधिष्ठिरस्यैतद्वैराटे धनुरुत्तमम् ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
राज्ञो रजतपुङ्खेन भल्लेनापहरच्छिरः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
राज्ञो रथमभिप्रेक्ष्य विद्रुताः शतशोऽभवन् ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
राज्ञो रहस्यं यद्वाक्यं जय़ार्थं लोकसङ्ग्रहः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
राज्ञो वधं चिकीर्षेद्यस्तस्य चित्रो वधो भवेत् |
२१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
राज्ञो वधेन सन्तप्ता मुहूर्तं समवस्थिताः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
राज्ञो वलं वर्धय़ेय़ुर्महेन्द्रस्येव देवताः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञो विचित्रवीर्यस्य सत्यवत्या मते स्थितः |
५९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञो वैचित्रवीर्यस्य तत्सर्वं प्रत्यवेदय़त् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
राज्ञो हि क्षीय़माणस्य व्रह्मैवाहुः पराय़णम् |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
कर्ण उवाच
राज्ञो हि धृतराष्ट्रस्य सर्वं कार्यं प्रिय़ं मय़ा |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
राज्ञोऽदर्शनसंविग्ना वर्तमाने जनक्षय़े ||
५६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
राज्ञोऽस्य वृद्धस्य परंशताख्याः; स्नुषा विवीरा हतपुत्रनाथाः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१४७
हनूमानु उवाच
राज्यं कारितवान्रामस्ततस्तु त्रिदिवं गतः ||
३८ ख