chevron_left  अमर्षवशमापन्नस्तवarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवशमापन्नस्तव पुत्रमपीडय़त् ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवशमापन्नस्त्यक्त्वा जीवितमात्मनः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षवशमापन्ना नाशय़ेय़ुरिमाः प्रजाः ||
३२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षवशमापन्ना वैरं प्रतिजिहीर्षवः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवशमापन्नाः कालोपहतचेतसः ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
कृप उवाच
अमर्षवशमापन्नाः पाञ्चाला विमुखाभवन् ||
१०४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षवशमापन्नान्दुर्योधनवशे स्थितान् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवशमापन्नो जनय़न्हर्षतेजसी ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय ४३
दुर्योधन उवाच
अमर्षवशमापन्नो दह्येऽहमतथोचितः ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवशमापन्नो धर्मराजो युधिष्ठिरः |
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षवशमापन्नो न किञ्चिद्वुध्यते नरः |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षवशमापन्नो मा कुरूंस्तात जीघनः |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२७
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवशमापन्नो युद्धाय़ैव मनो दधे ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षवशमापन्नो योत्स्यते नात्र संशय़ः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवशमापन्नो योधय़ामास सृञ्जय़ान् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवशमापन्नो वाक्यज्ञो वाक्यमव्रवीत् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
अमर्षवेगप्रभवां क्रव्यादगणसङ्कुलाम् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षांश्च निराकृत्य वैराणि च परन्तप ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
अमर्षाच्छास्त्रसंमोहादविज्ञानाच्च भारत ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
धृतराष्ट्र उवाच
अमर्षाज्जीवितं त्यक्त्वा गाहमानं वरूथिनीम् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
अमर्षात्तव पुत्रस्य शरैर्वाहानवाकिरत् ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षादभितप्तानां ज्ञात्यर्थं मुख्यवाससाम् |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
अमर्षाद्भरतश्रेष्ठ पुत्रस्ते समकुप्यत ||
५५ ख
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षिणोस्तदान्योन्यं देवदानवय़ोरिव ||
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
अमर्षितः स्वय़ं जेतुमशक्तः पाण्डवान्रणे |
१०० क
द्रोण पर्व
अध्याय ११
द्रोण उवाच
अमर्षितश्च ते राजंस्तेन नामर्षय़ाम्यहम् ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
अमर्षितस्ततो द्रोणः पाञ्चालान्व्यधमच्छरैः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
अमर्षितस्ततो राजन्पराक्रम्य चमूमुखे |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
अमर्षितस्तु हार्दिख्यः प्रविष्टे श्वेतवाहने |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
अमर्षिता महाशङ्खान्दध्मुर्वीरा महारथाः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
अमर्षिताः सत्त्ववन्तः कृत्वा मरणमग्रतः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
धृतराष्ट्र उवाच
अमर्षिताः सुसङ्क्रुद्धा रणं चक्रुः कथं निशि ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
अमर्षिताय़ाः कृष्णाय़ाः काङ्क्षितस्य च मे पितुः ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १९
सूत उवाच
अमर्षिते सुसंरव्धे दास्ये कृतपणे तदा |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६२
सञ्जय़ उवाच
अमर्षितेन क्रुद्धस्य क्रुद्धेनामर्षितस्य च ||
४७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षितैर्ये निहताः शय़ाना; निःसंशय़ं ते त्रिदिवं प्रपन्नाः ||
२३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
धृतराष्ट्र उवाच
अमर्षितो महेष्वासः सर्वशस्त्रभृतां वरः |
२ क
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
अमर्षितो हि कृष्णोऽपि दृष्ट्वा पार्थांस्तथागतान् |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
अमर्षी कृतवर्मा तु सात्यकिं पर्यवारय़त् ||
३९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षी चपलश्चापि क्रोधनो दुष्प्रसाधनः |
२८ क
स्त्री पर्व
अध्याय २१
गान्धार्यु उवाच
अमर्षी दीर्घरोषश्च महेष्वासो महारथः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
अमर्षी द्रुपदो राजा कर्मसिद्धान्द्विजर्षभान् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
अमर्षी नित्यसंरम्भी क्षेप्तास्माकं रणे रणे ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७२
भीमसेन उवाच
अमर्षी नित्यसंरव्धः श्रेय़ोद्वेषी महामनाः |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
शल्य उवाच
अमर्षी नित्यसंरव्धश्चिरं वैरमनुस्मरन् |
६३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
अमर्षी नित्यसंरव्धो रौद्रः क्रूरपराक्रमः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षी नित्यसंहृष्टस्तत्र कर्णो महारथः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
अमर्षी पाण्डवः क्रुद्धः शरवर्षाणि मारिष ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षी पाण्डवो नित्यं प्रिय़ो भ्रातुः प्रिय़ङ्करः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
अमर्षी वलवान्क्रुद्धः प्रेषय़ामास भारत ||
१० ख