उद्योग पर्व
अध्याय
१३०
कुन्त्यु उवाच
इति ते संशय़ो मा भूद्राजा कालस्य कारणम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
इति ते संशय़ो मा भूद्राजा कालस्य कारणम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
इति ते सर्वभूतानां सम्भवः कथितो मय़ा |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
भीष्म उवाच
इति ते सर्वमाख्यातं यो दण्डो मनुजर्षभ |
५५ क
आदि पर्व
अध्याय
११३
वैशम्पाय़न उवाच
इति तेन पुरा भीरु मर्यादा स्थापिता वलात् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२२
भीष्म उवाच
इति तेनानुय़ुक्तः स तमुवाच महातपाः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
इति तेनेन्द्रकल्पेन भगवान्सदसत्पतिः |
१६३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
वसिष्ठ उवाच
इति तेषां कथय़तां भगवान्गोवृषध्वजः |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
इति तेषां प्रतिश्रुत्य मध्ये सर्वधनुष्मताम् |
३८ क
सभा पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
इति तेषां वचः श्रुत्वा ततः कुरुपितामहः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
इति तेषां वचः श्रुत्वा प्रत्युवाच समाहितः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
इति तेषां वचः श्रुत्वा भीमसेनवचश्च तत् |
९३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
इति तेषां वचः श्रुत्वा व्रह्मर्षिस्तानुवाच ह |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
पितर ऊचुः
इति तेषां वचः श्रुत्वा स्वय़म्भूरिदमव्रवीत् |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३०
पितर ऊचुः
इति त्वमपि जानीहि राम मा क्षत्रिय़ाञ्जहि |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
८५
यय़ातिरु उवाच
इति दद्यादिति यजेदित्यधीय़ीत मे व्रतम् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
भीष्म उवाच
इति दध्यौ चिरं रामः कृपय़ाभिपरिप्लुतः ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
१०
व्यास उवाच
इति दीनेषु पार्थेषु मनो मे परितप्यते ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
धृतराष्ट्र उवाच
इति दुर्योधनः सूत प्राव्रवीन्मां मुहुर्मुहुः ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११०
धृतराष्ट्र उवाच
इति दुर्योधनस्याहमश्रौषं जल्पतो मुहुः ||
२ ग
वन पर्व
अध्याय
२३१
वैशम्पाय़न उवाच
इति दुर्योधनामात्याः क्रोशन्तो राजगृद्धिनः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
इति दुर्योधनो वाच्यः सुहृदश्चास्य केशव ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०४
वृहस्पतिरु उवाच
इति दुष्टस्य विज्ञानमुक्तं ते सुरसत्तम |
५१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
इति देवगणानां च श्रुत्वा वाक्यं महामनाः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
इति देवा व्यवसिता वेदवादाश्च शाश्वताः ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
इति देवासुराणां ते गन्धर्वाप्सरसां तथा |
९९ क
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
इति द्रुपदराजेन पित्रा दत्ताय़तेक्षणा ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
इति द्वैतवने तात मामुवाच धनञ्जय़ः |
६१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
इति द्वैपाय़नो व्यासो नारदश्च महातपाः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५६
भीष्म उवाच
इति धर्मः समाख्यातः सद्भिर्धर्मार्थदर्शिभिः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
इति धीरोऽन्ववेक्ष्यैव नात्मानं तत्र गर्हय़ेत् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
५२
सूत उवाच
इति नागा मय़ा व्रह्मन्कीर्तिताः कीर्तिवर्धनाः |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
इति नाराय़णः शम्भुर्भगवाञ्जगतः प्रभुः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
इति निर्वचनं लोके चिरं चरति भारत |
७९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९१
भीष्म उवाच
इति निश्चित्य तत्त्वेन समित्रः सवलानुगः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
इति निश्चित्य मनसा जरत्कारुर्भुजङ्गमा |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४९
सिद्धा ऊचुः
इति निश्चित्य मनसा देवलो राजसत्तम |
६० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
इति निश्चित्य मनसा रक्षां प्रति स भार्गवः |
५४ क
वन पर्व
अध्याय
६९
वृहदश्व उवाच
इति निश्चित्य मनसा वाहुको दीनमानसः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
इति निश्चित्य विप्रेन्द्राः क्रिय़तां यदनन्तरम् ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
इति नृप सततं गवां प्रदाने; यवशकलान्सह गोमय़ैः पिवानः |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
भीष्म उवाच
इति परममतिर्गुणाननेका; ञ्शिलरतय़े त्रिपथानुय़ोगरूपान् |
१०१ क
विराट पर्व
अध्याय
१९
द्रौपद्यु उवाच
इति पर्याय़मिच्छन्ती प्रतीक्षाम्युदय़ं पुनः ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३०
पितर ऊचुः
इति पश्चान्मय़ा ज्ञातं योगान्नास्ति परं सुखम् ||
२९ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
इति पाञ्चनदं धर्ममवमेने पितामहः |
६६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
इति पार्थं प्रशस्याथ प्रगृह्यान्यन्महद्धनुः |
५७ क
सभा पर्व
अध्याय
६९
विदुर उवाच
इति पार्था विजानीध्वमगदं वोऽस्तु सर्वशः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
इति पार्थो महावाहुर्दुरापं तप आस्थितः |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
इति पूर्वं प्रतिज्ञातं भीमेन हि सभातले ||
१४ ग
आदि पर्व
अध्याय
१४९
व्राह्मण उवाच
इति पूर्वे महात्मान आपद्धर्मविदो विदुः ||
११ ख