chevron_left  ऋषय़श्चापिarrow_drop_down
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
ऋषय़श्चापि देवाश्च गन्धर्वाप्सरसस्तथा |
१७ क
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़श्चापि धर्मज्ञाः सिद्धाः साध्याश्च देवताः ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वासुदेव उवाच
ऋषय़श्चार्तिमापन्ना जितक्रोधा जितेन्द्रिय़ाः |
३१ क
वन पर्व
अध्याय १२९
लोमश उवाच
ऋषय़श्चैव कौन्तेय़ तथा राजर्षय़ोऽपि च ||
२१ ग
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
ऋषय़श्चैव देवाश्च गन्धर्वा भुजगास्तथा |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
ऋषय़श्चैव देवाश्च गन्धर्वाप्सरसस्तथा |
८४ क
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
ऋषय़श्चैव देवाश्च गन्धर्वासुरराक्षसाः |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
ऋषय़श्चैव देवाश्च चक्रुः स्वस्त्ययनं महत् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
ऋषय़श्चैव देवाश्च स्तुवन्त्येतेन तत्परम् ||
१५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१९
भीष्म उवाच
ऋषय़श्चैव संसिद्धाः परं विस्मय़मागताः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
ऋषय़स्तं प्रशंसन्ति साधु चैतदसंशय़म् |
५१ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
ऋषय़स्तत्र देवाश्च वरुणोऽग्निः प्रजापतिः |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९
युधिष्ठिर उवाच
ऋषय़स्तपसा युक्ता येषां लोकाः सनातनाः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
ऋषय़स्तपसा वेदानध्यैषन्त दिवानिशम् |
५५ क
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
ऋषय़स्तु महाघोरान्दृष्ट्वोत्पातान्पृथग्विधान् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
ऋषय़स्तुष्टुवुश्चैव गन्धर्वाश्च जगुस्तथा ||
१७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
ऋषय़स्ते महाभागाः प्रजास्वेव हि जाजले |
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
ऋषय़स्त्वथ देवाश्च दृष्ट्वा व्रह्माणमुत्थितम् |
४० क
आदि पर्व
अध्याय १११
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़स्त्वपरे चैनं पुत्रवत्पर्यपालय़न् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़स्त्वां क्षमामाहुः सत्यं च पुरुषोत्तम |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय ३४
एलापत्र उवाच
ऋषय़े सुव्रताय़ त्वमेष मोक्षः श्रुतो मय़ा ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९४
भीष्म उवाच
ऋषय़ो जग्मुरन्यत्र सर्व एव धृतव्रताः ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
ऋषय़ो दीर्घसन्ध्यत्वाद्दीर्घमाय़ुरवाप्नुवन् |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
ऋषय़ो देवगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगाः |
५९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९२
भीष्म उवाच
ऋषय़ो धर्मनित्यास्तु कृत्वा निवपनान्युत |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
ऋषय़ो निय़मांस्त्यक्त्वा परित्यक्ताग्निदैवताः |
२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
ऋषय़ो मुनय़ो देवा मुह्यन्त्यत्र सुखेप्सवः ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
ऋषय़ो यत्र देवाश्च महाभागा महौजसः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
ऋषय़ो यतय़ः शान्तास्तरसा प्रत्यवेदय़न् ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
ऋषय़ो यतय़ो ह्येतन्नहुषे प्रत्यवेदय़न् |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
ऋषय़ो राजशार्दूलमपृच्छन्स्वं प्रय़ोजनम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
ऋषय़ो लोकपालेभ्यो लोकपालाः क्षुपाय़ च ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
वसिष्ठ उवाच
ऋषय़ो लोमकूपेभ्यः स्वेदाच्छन्दो मलात्मकम् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ो वक्तुमर्हन्ति निश्चितार्थं तपोधनाः ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ऋषय़ो वसवश्चैव विय़त्स्था भीष्ममव्रुवन् ||
३४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ो वहवो राजंस्तत्र सम्प्रतिपेदिरे ||
३९ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
ऋषय़ो वा महाभागाः पुराणा भुवि सञ्जय़ ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ो वालखिल्याश्च प्रभासाः सिकतास्तथा |
२४ क
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
ऋषय़ो वालखिल्याश्च योनिजाय़ोनिजास्तथा ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ो विस्मय़ं जग्मुस्तां दृष्ट्वा चाप्यरुन्धतीम् |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
होत्रवाहन उवाच
ऋषय़ो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११५
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ो व्राह्मणा देवाः प्रशंसन्ति महामते |
२ क
वन पर्व
अध्याय २६८
मार्कण्डेय़ उवाच
ऋषय़ो हिंसिताः पूर्वं देवाश्चाप्यवमानिताः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
ऋषय़ो ह्यपि निर्मुक्ताः पश्यन्तो लोकसङ्ग्रहान् |
५४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०
शल्य उवाच
ऋषय़ोऽथ ततोऽभ्येत्य वृत्रमूचुः प्रिय़ं वचः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११
शल्य उवाच
ऋषय़ोऽथाव्रुवन्सर्वे देवाश्च त्रिदशेश्वराः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ोऽन्तर्हिता जग्मुस्ततस्ते नारदादय़ः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
ऋषय़ोऽभ्यागतास्तत्र देव्या भक्त्या तपोधनाः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
ऋषय़ोऽभ्यागमंस्तूर्णं हव्यवाहपुरोगमाः ||
८६ ख