सौप्तिक पर्व
अध्याय
१५
व्यास उवाच
उत्सृष्टवान्न रोषेण न वधाय़ तवाहवे ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
उत्सृष्टवृषवत्सा हि प्रदेय़ा सूर्यदर्शने |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
समङ्ग उवाच
उत्सेको नरकाय़ैव तस्मात्तं सन्त्यजाम्यहम् ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
उत्सेधे यस्य पद्मानि शतं सौगन्धिकानि च |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
उत्सेधो वृक्षराजस्य दिवस्पृङ्मनुजेश्वर ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
उत्स्मय़न्तं च सततं दृष्ट्वासौ मन्युमानभूत् ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय
२३३
वैशम्पाय़न उवाच
उत्स्मय़न्तस्तदा पार्थमिदं वचनमव्रुवन् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
६६
शकुन्तलो उवाच
उत्स्मय़न्तीव सव्रीडं मारुतं वरवर्णिनी ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
उत्स्मय़न्नभ्युपैत्येष परान्रथपथे स्थितान् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
उत्स्मय़न्निव कौन्तेय़मर्जुनं भरतर्षभ ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
उत्स्मय़न्निव दाशार्हः कैतव्यं प्रत्यभाषत ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
उत्स्मय़न्निव भीमस्य क्रुद्धः कालानलप्रभः |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
उत्स्मय़न्निव राधेय़स्त्वरमाणोऽभ्यवारय़त् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
उत्स्मय़न्निव राधेय़ो भीमसेनमुवाच ह ||
६८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
उत्स्मय़न्प्राहसच्चापि दृष्ट्वा राजा पुरोहितम् |
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
उत्स्मय़न्वृष्णिशार्दूलस्तथा वाणैः समाहतः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
देवा ऊचुः
उत्स्रक्ष्येऽहमिमं दुःखान्न तु कामात्कथञ्चन ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
उत्स्रष्टुकामं तं नागः पुनः कर्कोटकोऽव्रवीत् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
उत्स्रष्टुकामः शस्त्राणि विप्रवाक्याभिचोदितः |
१२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
उदकं चक्रिरे चैव गाङ्गेय़स्य महात्मनः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
उदकं चक्रिरे तस्य सर्वाश्च कुरुय़ोषितः ||
२७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
उदकं चक्रिरे सर्वा रुदन्त्यो भृशदुःखिताः |
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३७
वैशम्पाय़न उवाच
उदकं पाण्डुपुत्राणां धृतराष्ट्रोऽम्विकासुतः ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
सुधन्वो उवाच
उदकं मधुपर्कं च पथ एवार्पितं मम |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
प्रह्राद उवाच
उदकं मधुपर्कं चाप्यानय़न्तु सुधन्वने |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
उदकं मे न दर्शय़ितव्यमिति ||
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१८५
मार्कण्डेय़ उवाच
उदकान्तमुपानीय़ मत्स्यं वैवस्वतो मनुः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
भीष्म उवाच
उदकानय़ने चैव स्तोतव्यो वरुणो विभुः |
२६ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
उदके क्रिय़माणे तु वीराणां वीरपत्निभिः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३४
पुत्र उवाच
उदके धूरिय़ं धार्या सर्तव्यं प्रवणे मय़ा |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
उदके वहवः प्राणाः पृथिव्यां च फलेषु च |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
उदके वहवश्चापि तत्र किं प्रतिभाति ते ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
उदकेनैव तां रात्रिमूषुस्ते दुःखकर्शिताः ||
४० ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
उदक्यया च सम्भाषां न कुर्वीत कदाचन ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
उदक्या ह्यासते ये च ये च केचिदनग्नय़ः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
उदक्रोशच्च संहृष्टस्त्रासय़ानो वरूथिनीम् ||
२७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
उदक्रोशन्नरव्याघ्राः शव्देन महता तदा ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२७१
मार्कण्डेय़ उवाच
उदक्रोशन्परित्रस्तास्तारप्रभृतय़स्तदा ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
उदक्रोशन्महानादं सह तैरनुय़ाय़िभिः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
उदक्रोशन्महाराज विष्ठिते मय़ि भारत ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
उदक्रोशन्महावाहुस्तव सैन्यानि भीषय़न् ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
उदक्रोशन्महाशव्दं तिष्ठ तिष्ठेति चाव्रवीत् ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
उदक्रोशन्महेष्वासा नरेन्द्र विजितारय़ः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
उदक्रोशन्विप्रमुख्या विधुन्वन्तोऽजिनानि च |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
उदक्षिरा न स्वपेत तथा प्रत्यक्षिरा न च |
७२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
उदगावृत्त आदित्ये हंसाः सत्यं व्रवीमि वः ||
९७ ख
वन पर्व
अध्याय
२०९
मार्कण्डेय़ उवाच
उदग्द्वारं हविर्यस्य गृहे नित्यं प्रदीय़ते |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
उदग्रमनसः केऽत्र के वा दीना विचेतसः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
उदग्रश्च विधाता च मान्धाता भूतभावनः ||
१०२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
उदग्राः पाण्डुपाञ्चाला द्रोणस्य निधनेन च ||
१० ख