उद्योग पर्व
अध्याय
१३४
पुत्र उवाच
उद्यच्छाम्येष शत्रूणां निय़माय़ जय़ाय़ च ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३१
भीष्म उवाच
उद्यच्छेदेव न ग्लाय़ेदुद्यमो ह्येव पौरुषम् |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३२
विदुरो उवाच
उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम् |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
उद्यतप्रतिपिष्टानां खड्गानां वीरवाहुभिः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
९९
लोमश उवाच
उद्यतप्रतिपिष्टानां खड्गानां वीरवाहुभिः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
उद्यता यज्ञभागा हि साक्षात्प्राप्ताः सुरैरिह |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
उद्यतां तां महाशक्तिं तस्मिंश्चिक्षेप वारणे ||
८ ग
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
उद्यतां पृथिवीं सर्वां ससुरासुरमानवाम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११०
धृतराष्ट्र उवाच
उद्यताशनिवज्रस्य महेन्द्रस्येव दानवः ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
उद्यतासिमुपाय़ान्तं गदय़ाहन्वृकोदरः ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
उद्यतेवोदय़ं शैलं सूर्येणाप्तकिरीटिनम् |
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
विदुर उवाच
उद्यतेषु च शस्त्रेषु नास्ति शेषवतां भय़म् ||
५३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७८
भीष्म उवाच
उद्यतेषुमथो दृष्ट्वा व्राह्मणं क्षत्रवन्धुवत् |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७०
दुर्योधन उवाच
उद्यतेषुमथो दृष्ट्वा समरेष्वातताय़िनम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६९
भीष्म उवाच
उद्यतेषुमभिप्रेक्ष्य प्रतिय़ुध्यन्तमाहवे ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
उद्यतैराय़ुधैश्चित्रास्तलवद्धाः कलापिनः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
उद्यतैराय़ुधैश्चित्रैस्तलवद्धाः पताकिनः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
उद्यतैर्युय़ुधानस्य स्थिता मरणकाङ्क्षिणः ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
उद्यतैर्वहुभिर्घोरैराय़ुधैः शोणितोक्षितैः |
१०३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०९
सुपर्ण उवाच
उद्यतोऽहं द्विजश्रेष्ठ तव दर्शय़ितुं दिशः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
उद्यन्तं सूर्यमाहत्य व्यशीर्यत महास्वना ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
उद्यन्तुं वा गदां गुर्वीं शरान्वापि प्रकर्षितुम् ||
२३ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
उद्यन्निव सदा भानुस्तमांस्युग्रैर्गभस्तिभिः ||
४० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
उद्यन्नय़ं नकुलः प्रेषितो वै; गावल्गणे सञ्जय़ पश्यतस्ते |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९७
मनुरु उवाच
उद्यन्हि सविता यद्वत्सृजते रश्मिमण्डलम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
युधिष्ठिर उवाच
उद्यमं नाधिगच्छामि कुतश्चित्परिचिन्तय़न् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
उद्यमो जीवनं क्षत्रे वाहुवीर्यादिति श्रुतिः ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
उद्यमो रक्षणे स्वेषामेतद्वैभवलक्षणम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
उद्यम्य कुञ्जरं पार्थस्तस्थौ परपुरञ्जय़ः ||
६४ ख
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
उद्यम्य च गदां दोर्भ्यां नदीतीरे व्यवस्थितम् |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
उद्यम्य च भुजावन्यो निक्षिप्य च महीतले |
६३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३१
कुन्त्यु उवाच
उद्यम्य धुरमुत्कर्षेदाजानेय़कृतं स्मरन् ||
१८ ग
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
उद्यम्य निशितं खड्गं रुधिरेण समुक्षितम् ||
७९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
उद्यम्य निशितं खड्गं हन्तुं मामुद्यतस्तदा ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
उद्यम्य न्यवधीद्भूमौ मय़ं विष्णुरिवाहवे ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
उद्यम्य न्यहनद्राजन्मत्तो मत्तमिव द्विपम् ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
उद्यम्य मन्दरं दोर्भ्यां हरेत्सवनकाननम् ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
उद्यम्य लोहदण्डाभ्यामतिमानुषकर्मणोः ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
कृप उवाच
उद्यम्य वाहू त्वरितो व्रुवाणश्च पुनः पुनः |
१२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४१
च्यवन उवाच
उद्यम्य विपुलं शैलं च्यवनं समुपाद्रवत् |
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
उद्यम्य शस्त्रमाय़ान्तमपि वेदान्तगं रणे |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
उद्यम्यात्मानमुग्राय़ कर्मणे धैर्यमास्थिताः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
द्रोण उवाच
उद्यम्यात्मानमुग्राय़ कर्मणे सपदानुगः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
उद्यम्योद्यम्य मे दम्यौ विषमेणेव गच्छति |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१११
वैशम्पाय़न उवाच
उद्यानानि कुवेरस्य समानि विषमाणि च |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
उद्यानानि च रम्याणि तथैवाय़तनानि च |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
उद्यानानि च रम्याणि नगरस्य समन्ततः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०६
मुनिरु उवाच
उद्यानानि महार्हाणि शय़नान्यासनानि च |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११६
नारद उवाच
उद्यानेषु विचित्रेषु वनेषूपवनेषु च ||
१८ ख