chevron_left  रौक्मिणेय़श्चarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
रौक्मिणेय़श्च साम्वश्च क्षीवौ समरदुर्मदौ |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
रौक्मिणेय़श्च साम्वश्च युय़ुधानश्च सात्यकिः ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय १७
वासुदेव उवाच
रौक्मिणेय़स्ततो वाणमग्न्यर्कोपमवर्चसम् |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
रौक्मिणेय़ाहुकसुतैश्चारुदेष्णपुरोगमैः ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
रौक्मिणेय़ेन सहितो युय़ुधानेन चैव ह |
३ क
वन पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
रौक्मिणेय़ोऽपरं वाणं सन्दधे शत्रुनाशनम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
रौच्यः पुत्राय़ शुद्धाय़ सुव्रताय़ सुमेधसे ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
रौद्रं कर्म क्षत्रिय़स्य सततं तात वर्तते |
४ क
विराट पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
रौद्रं रुद्रादहं ह्यस्त्रं वारुणं वरुणादपि |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
रौद्रं रूपं विहाय़ाशु चक्रे रूपं शिवं शिवः ||
६२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
वसिष्ठ उवाच
रौद्रं लोहितमित्याहुर्लोहितात्कनकं स्मृतम् |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
रौद्रं वदति संरव्धः शोणितं छर्दय़न्मुहुः ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
रौद्रं शरं संय़ति सुप्रधौतं; पार्थार्थमत्यर्थचिराय़ गुप्तम् ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
रौद्रः क्षत्रिय़धर्मोऽय़ं गुरुणा यदय़ुध्यत |
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५०
नारद उवाच
रौद्रकर्माभिजाय़ेत सर्वप्राणिभय़ङ्करी ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय १६३
अर्जुन उवाच
रौद्रमस्त्रं मदीय़ं त्वामुपस्थास्यति पाण्डव |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
कृष्ण उवाच
रौद्रमस्त्रं समादाय़ क्षेप्तुकामः किरीटवान् |
५९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३६
वैशम्पाय़न उवाच
रौद्रमस्त्रं समाधाय़ दग्धवानस्त्रवह्निना ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
रौद्रमासीत्तदा युद्धं सात्वतस्य च धन्विनः ||
८१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
रौद्ररूपोंऽशुरादित्यो वसुरश्मिः सुवर्चसी ||
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
रौद्रा हस्तवता मुक्ताः प्रमथ्नन्ति स्म साय़काः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
रौद्रा हस्तवता मुक्ताः प्रमथ्नन्ति स्म साय़काः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
रौद्राश्वस्य महेष्वासा दशाप्सरसि सूनवः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय १४२
अर्जुन उवाच
रौद्रे मुहूर्ते रक्षांसि प्रवलानि भवन्ति च ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
रौद्रे मुहूर्ते सम्प्राप्ते सव्यसाची व्यदृश्यत ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
रौद्रेण चित्रपक्षेण विवृताक्षेण कूजता |
३६ क
वन पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
रौरवाजिनसंवीतं ददर्शाथ युधिष्ठिरम् ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
रौहिणेय़श्च वार्ष्णेय़ो रुक्मी च वसुधाधिपः ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
रौहिणेय़े गते शूरे पुष्येण मधुसूदनः |
१४ क