chevron_left  उपसंहरतस्तस्यarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २४९
नारद उवाच
उपसंहरतस्तस्य तमग्निं रोषजं तदा |
१५ क
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
उपसङ्गम्य चैवैनं कीचकः काममोहितः |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११४
नारद उवाच
उपसङ्गम्य चोवाच हर्यश्वं प्रीतिमानसम् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०४
भीष्म उवाच
उपसङ्गम्य पप्रच्छ वासवः परवीरहा ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
उपसङ्गृह्य विश्वेशमधीष्वेति च सोऽव्रवीत् ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
उपसङ्ग्रहणं कृत्वा द्रोणाय़ स विशां पते |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
उपसम्प्रष्टुमर्हामि तमहं केन हेतुना ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
उपसम्प्रष्टुमर्हामि त्वामृते पुरुषोत्तम ||
७७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
उपसर्गाद्वहुधा सूदतेश्च; प्राय़ेण सर्वं त्वय़ि तच्च मह्यम् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय ९५
लोमश उवाच
उपसर्तुं यथाकामं दिव्याभरणभूषिता ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४५
भीष्म उवाच
उपसर्पत संहृष्टः श्वापदाध्युषितं वनम् ||
५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ४
विदुर उवाच
उपसर्पन्ति जीवन्तं वध्यमानं स्वकर्मभिः ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
उपसर्पस्व धर्मज्ञे यथापूर्वमिमानृषीन् |
३९ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
उपसर्प्य वरारोहा जनमध्यं विवेश ह ||
१०९ ख
आदि पर्व
अध्याय २०४
नारद उवाच
उपसुन्दोऽपि जग्राह वामे पाणौ तिलोत्तमाम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
कृप उवाच
उपसृत्य तदा द्रोणमुच्चैरिदमभाषत |
११६ क
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
उपसृत्य तु राजानं गदामोक्षविशारदः |
५२ क
द्रोण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
उपसृत्य तु राजानं भगदत्तं युधिष्ठिरः |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय ४१
सूत उवाच
उपसृत्य स तान्दीनान्दीनरूपोऽभ्यभाषत ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६२
विदुर उवाच
उपसृत्यापरिज्ञातो जग्राह मृगय़ुस्तदा ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
उपसृत्याव्रुवं चार्यामभिगम्य रहोगताम् ||
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
उपसृष्टं तु तं कृष्णौ भ्राजमानं द्विजोत्तमम् |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७६
नारद उवाच
उपसृष्टेष्वदान्तेषु दुराचारेष्वसाधुषु |
५४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
उपसेवन्तु कल्याणं विरजोम्वरवाससः ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्तीर्णा सभा राजन्नक्षानुप्त्वा युधिष्ठिर |
२ क
सभा पर्व
अध्याय ५३
शकुनिरु उवाच
उपस्तीर्णा सभा राजन्रन्तुं चैते कृतक्षणाः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
कपिल उवाच
उपस्थमुदरं वाहू वाक्चतुर्थी स वै द्विजः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
हंस उवाच
उपस्थमुदरं हस्तौ वाक्चतुर्थी स धर्मवित् ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्थास्यति सा त्वां वै पूजय़ानवमन्य च |
११ क
वन पर्व
अध्याय १५९
वैश्रवण उवाच
उपस्थास्यन्ति च सदा रक्षिष्यन्ति च सर्वशः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
उपस्थास्यन्ति योधाश्च शस्त्राणि कवचानि च ||
९० ग
वन पर्व
अध्याय १५९
वैश्रवण उवाच
उपस्थास्यन्ति वो गृह्य मत्प्रेष्याः पुरुषर्षभ ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
उपस्थास्यन्ति हनुमन्निति स्म हरिलोचन ||
४४ ख
विराट पर्व
अध्याय २
भीम उवाच
उपस्थास्यामि राजानं विराटमिति मे मतिः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
उपस्थाय़ महानागं करेणुः सूकरं स्पृशेत् ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११६
नारद उवाच
उपस्थाय़ स तं विप्रो गालवः प्रतिगृह्य च |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८७
पराशर उवाच
उपस्थितं कर्मफलं विदित्वा; वुद्धिं तथा चोदय़तेऽन्तरात्मा ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्थितं तु द्रुपदः सखिवच्चाभिसङ्गतम् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय ८०
नारद उवाच
उपस्थितं महाराज पूजय़ामास भारत |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्थितं रथं दृष्ट्वा तार्क्ष्यप्रवरकेतनम् |
५५ क
सभा पर्व
अध्याय ६५
धृतराष्ट्र उवाच
उपस्थितं वृद्धमन्धं पितरं पश्य भारत ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्थितः पशुपतेर्नगरे वारणावते ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्थितः सहामात्यो वासुदेवश्च वीर्यवान् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
उपस्थितकृतौ तत्र नासिकाग्रमधो भ्रुवौ |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्थितरथं शौरिं प्रय़ास्यन्तमरिन्दमम् |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
कृष्ण उवाच
उपस्थितविनाशेय़ं नूनमद्य वसुन्धरा |
४३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८६
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्थितश्च कालोऽय़मभितो वर्तते हय़ः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
उपस्थितस्त्वय़ा चापि प्रत्याख्यातोऽमृतं ददत् |
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९३
भीष्म उवाच
उपस्थिता ह्यप्सरोभिर्गन्धर्वैश्च जनाधिप ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय ४६
दुर्योधन उवाच
उपस्थितानां रत्नानां श्रेष्ठानामर्घहारिणाम् |
२४ क