आदि पर्व
अध्याय
१७१
और्व उवाच
उपेक्षमाणस्य पुनर्लोकानां किल्विषाद्भय़म् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०४
भीष्म उवाच
उपेक्षमाणोऽवज्ञाते हृदय़ेनापराजितः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
उपेक्षा पञ्चमी चात्र कार्त्स्न्येन समुदाहृता ||
३५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३८
व्रह्मो उवाच
उपेक्षा व्रह्मचर्यं च परित्यागश्च सर्वशः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३७
व्यास उवाच
उपेक्षा सर्वभूतानामेतावद्भिक्षुलक्षणम् ||
७ ख
मौसल पर्व
अध्याय
९
व्यास उवाच
उपेक्षितं च कृष्णेन शक्तेनापि व्यपोहितुम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११५
भीष्म उवाच
उपेक्षितव्यो दान्तेन तादृशः पुरुषाधमः ||
६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
उपेक्षिता विनश्यन्तस्त्वय़ा कस्माज्जनार्दन ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
उपेक्षिता सपुत्रेण दासभावं निय़च्छती ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
उपेक्षिता हि नश्येय़ुर्गोमिनोऽरण्यवासिनः |
३४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
उपेक्षितास्ते गोविन्द तस्माज्ज्ञातीन्वधिष्यसि ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
उपेक्षितौ वलं क्रुद्धौ नाशय़ेतां निशामिमाम् |
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
उपेक्ष्यमाणा कौरव्य पृथिवीं घातय़िष्यति ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
९
व्यास उवाच
उपेक्ष्यमाणा सा राजन्महान्तमनय़ं स्पृशेत् ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
उपेक्षय़ा च भावानां देवा देवत्वमाप्नुवन् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
उपेतं नलिनीजालैः सिन्धुवारैश्च वेतसैः |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
उपेतं पश्य कौन्तेय़ शैलराजमरिन्दम ||
८७ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
उपेतं पादपैर्दिव्यैः सदापुष्पफलोपगैः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
उपेतं राजतैरश्वैर्गान्धर्वैर्हेममालिभिः |
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
उपेतकूलां ददृशुः समन्ता; त्क्रूरां महावैतरणीप्रकाशाम् |
१२५ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
उपेतमथ माल्यैश्च फलवद्भिश्च पादपैः |
८९ क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
उपेतमन्यैश्च तदा मृगैर्मृदुनिनादिभिः |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
उपेता सर्ववीजैश्च श्रेष्ठा भूमिरिहोच्यते ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
उपेताः पुरुषव्याघ्र व्यादिदेश स धर्मराट् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१७५
वैशम्पाय़न उवाच
उपेतान्वहुलच्छाय़ैर्मनोनय़ननन्दनैः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
उपेतार्थमभिन्नार्थं नापवृत्तं न चाधिकम् |
८७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
उपेतो वैष्णवास्त्रेण तन्मे त्वं दातुमर्हसि ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
उपेत्य चैनमुत्थाय़ परिष्वज्येदमव्रवीत् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
उपेत्य तस्माद्देवेभ्यः सर्वेभ्यो दापय़ेन्नरः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
उपेत्य तस्यावभृथं पूताः सर्वे भवन्ति ते ||
३५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
उपेत्य तु तदा राजन्न्यग्रोधं ते महारथाः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
२०७
मार्कण्डेय़ उवाच
उपेत्य देवाः पप्रच्छुः कारणं तत्र भारत ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२४८
वैशम्पाय़न उवाच
उपेत्य पप्रच्छ तदा क्रोष्टा व्याघ्रवधूमिव ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
उपेत्य वलभिद्देवो वारय़ामास वै पुनः ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४२
व्रह्मो उवाच
उपेत्य शकटैर्यान्ति न सेवन्ति रजस्वलाम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
उपेत्य शतमाचार्यान्मोहय़ामास हेतुभिः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
उपेन्द्रसदृशं व्रूत कथमाय़ोधने हतः ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
उपेन्द्रसदृशः श्यामो महाशाल इवोद्गतः |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
उपेन्द्रां वहुलां चैव कुचरामम्वुवाहिनीम् |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
उपेन्द्रो वामनः प्रांशुरमोघः शुचिरूर्जितः |
३० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१८
व्राह्मण उवाच
उपैति तद्वज्जानीहि गर्भे जीवप्रवेशनम् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
११०
पाण्डुरु उवाच
उपैति वृत्तिं कामात्मा स शुनां वर्तते पथि ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२८
श्रीभगवानु उवाच
उपैति शान्तरजसं व्रह्मभूतमकल्मषम् ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५६
भीष्म उवाच
उपैति सत्याद्दानं हि तथा यज्ञाः सदक्षिणाः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
उपैति सविताप्यस्तं रसमापीय़ पार्थिवम् ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
उपोपविविशुः प्रीता विष्टरेषु महर्षय़ः ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
उपोपविविशुः सर्वे कौरव्याः सपुरोहिताः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
उपोपविविशुः सर्वे पौरजानपदा अपि ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
उपोपविविशुर्यक्षा राक्षसाश्च सहस्रशः ||
३६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
उपोपविविशुर्हृष्टा ह्रदस्थं पञ्च पाण्डवाः ||
२८ ख