विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णपृष्ठं सूर्याभं सूर्यदत्तोऽभ्यहारय़त् ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
सुवर्णमक्षय़ं दत्त्वा लोकानाप्नोति पुष्कलान् ||
६५ ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
उत्तर उवाच
सुवर्णमणिचित्रं च कस्यैतद्धनुरुत्तमम् ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
सुवर्णमणिमुक्ताढ्ये कुले महति जाय़ते ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णमणिरत्नानि दासीदासपरिच्छदान् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
सुवर्णमपि चामेध्यादाददीतेति धारणा ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
६७
दुःषन्त उवाच
सुवर्णमाला वासांसि कुण्डले परिहाटके |
२ क
विराट पर्व
अध्याय
१५
कीचक उवाच
सुवर्णमालाः कम्वूश्च कुण्डले परिहाटके |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णमालिनः क्षान्ताः श्रेणिमन्तमुदावहन् ||
३० ख
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णमालिनो यूपाश्चित्याश्चाप्यतिभास्वराः |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
सुवर्णमाहरिष्यन्तस्तत्र गच्छन्तु ते नराः ||
३१ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णमुक्तामणिवज्रविद्रुमै; रलङ्कृतेनाप्रतिमानरंहसा ||
५३ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
सुवर्णरेताः सर्वज्ञः सुवीजो वृषवाहनः ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
११२
ऋश्यशृङ्ग उवाच
सुवर्णवर्णः कमलाय़ताक्षः; सुतः सुराणामिव शोभमानः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णवर्णा धर्मज्ञमनीकस्थं युधिष्ठिरम् |
६१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
सुवर्णवर्णाः कपिलाः प्रजानां वृत्तिधेनवः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णवर्णाश्च नराः स्त्रिय़श्चाप्सरसोपमाः ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३८
वाय़ुरु उवाच
सुवर्णवर्णो निर्धूमः संहतोर्ध्वशिखः कविः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
सुवर्णवर्णो हेमाङ्गो वराङ्गश्चन्दनाङ्गदी |
९२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णवर्मसंनाहैर्योधैः कनकभूषणैः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
४०
सूत उवाच
सुवर्णवर्माणमुपेत्य काशिपं; वपुष्टमार्थं वरय़ां प्रचक्रमुः ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णविकृतं दिव्यं श्लक्ष्णमाय़तमव्रणम् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णविकृतप्रासान्पट्टिशान्हेमभूषितान् |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णविकृतांश्चित्रान्मुमोचाधिरथिः शरान् ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय
३९
उत्तर उवाच
सुवर्णविकृतानीमान्याय़ुधानि महात्मनाम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णविकृतान्क्रुद्धः प्राहिणोद्वधकाङ्क्षय़ा ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णविकृतान्प्रासाञ्शक्तीः कनकभूषिताः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णविकृतान्वाणान्प्रमुञ्चन्तावरिन्दमौ |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णविकृतैश्चापि गदामुसलपट्टिशैः |
२० क
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णविन्दुभिश्चित्रा गुर्वी भारसहा दृढा ||
५ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
सुवर्णविन्दुरक्षोभ्यः सर्ववागीश्वरेश्वरः |
९९ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णशतकण्ठीनामरोगाणां सुवाससाम् |
४५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०८
सुपर्ण उवाच
सुवर्णशिरसोऽप्यत्र हरिरोम्णः प्रगाय़तः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
सुवर्णशृङ्गैस्तु विभूषितानां; गवां सहस्रस्य नरः प्रदाता |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
पर्वत उवाच
सुवर्णष्ठीवनाच्चैव स्वर्णष्ठीवी भविष्यति |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
८८
धौम्य उवाच
सुवर्णसिकता राजन्विशालां वदरीमनु ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
सुवर्णस्त्वव्रवीद्वाक्यं मनुं स्वाय़म्भुवं प्रभुम् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
सुवर्णस्य च दातारो गवां च भरतर्षभ |
९५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३९
विदुर उवाच
सुवर्णस्य मलं रूप्यं रूप्यस्यापि मलं त्रपु |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
सुवर्णहरणं स्तैन्यं विप्रासङ्गश्च पातकम् |
३३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२७
व्राह्मण उवाच
सुवर्णानि द्विवर्णानि पुष्पाणि च फलानि च |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
सुवर्णालङ्कृतैरेतैर्वर्मवद्भिः सुकल्पितैः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
सुवर्णाय़ मनुः प्राह सुवर्णो नारदाय़ च ||
६४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८४
गङ्गो उवाच
सुवर्णो विमलो दीप्तः पर्वतं चावभासय़त् ||
६८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
सुवर्माणं सात्यकिं च विद्धि कर्णवशं गतान् ||
९३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
सुवलस्य हते पुत्रे सवाजिरथकुञ्जरे |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
सुवलस्यात्मजा चैव तथा मद्रेश्वरस्य च ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
यम उवाच
सुवस्त्रश्च सुवेषश्च भवतीत्यनुशुश्रुम ||
३१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
सुवहूनि च राजेन्द्र दिवसानि विराटजा |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
सुवहूनि नृशंसानि पुत्रैस्तव जनेश्वर |
१८ क