वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
वहुमानाच्च गात्राणि पस्पर्श मम वासवः ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०२
नारद उवाच
वहुमानाच्च भवतस्तथैवैरावतस्य च |
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
वहुमानात्प्रिय़त्वाच्च तावेनं वक्तुमर्हतः ||
८२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
वहुमालो महामालः सुमालो वहुलोचनः ||
१२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
वहुमाय़ः स विप्रर्षे वलहा पाकशासनः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
वहुमाय़ासमाकीर्णो नानादोषसमाकुलः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
मुनिरु उवाच
वहुमित्राश्च राजानो वह्वमित्रास्तथैव च ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
वहुमूलफला चापि कौशिकी भरतर्षभ |
९ ख
वन पर्व
अध्याय
८७
धौम्य उवाच
वहुमूलफलो वीर असितो नाम पर्वतः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
वहुमूलफलोपेतं नानापक्षिगणैर्वृतम् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६९
अर्जुन उवाच
वहुरत्नविचित्राणि शातकुम्भमय़ानि च ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
वहुरत्नसमाकीर्णं दासीदाससमाकुलम् ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
वहुरत्ना वहुधना सुकृता विश्वकर्मणा ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
वहुरथमनुजाश्वपत्तिनागं; प्रतिभय़निस्वनमद्भुताभरूपम् |
३३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
वहुरूपं गणाध्यक्षं त्र्यक्षं पारिषदप्रिय़म् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
वहुरूपधरा हृष्टा नानाप्रहरणोद्यताः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
वहुरूपस्य राज्ञो हि सूक्ष्मोऽप्यर्थो न सीदति ||
६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
वहुरूपाः प्रजा दृष्ट्वा विवृद्धाः स्वेन तेजसा |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
वहुरूपाय़ विश्वस्य पतय़े चीरवाससे ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
वहुरूपाय़ शर्वाय़ प्रिय़ाय़ प्रिय़वाससे ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
वहुरूपो मुहूर्तश्च जीवेतापि कदाचन ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
वहुरूपो विशालाक्षः शिवः स्थाणुरुमापतिः ||
८६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
वहुरूपो हि भगवाञ्छ्रूय़ते हरिवाहनः ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
वहुरूप्यकृतं वित्तं विन्दते रेवतीं श्रितः |
१४ क
विराट पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
वहुलं कृपणं चैव विराटस्य सुतस्तदा ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९६
द्रोण उवाच
वहुलं रत्नमादाय़ तेषामर्थाय़ भारत ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११४
नारद उवाच
वहुलक्षणसम्पन्ना वहुप्रसवधारिणी ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
वहुलत्वं च सेनानां विक्रमं च किरीटिनः |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
वहुलत्वाच्च नोक्ता ये विविधा देवतागणाः |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
वहुलत्वान्न सङ्ख्यातुं शक्यान्यव्दशतैरपि ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७२
भीमसेन उवाच
वहुलस्तालजङ्घानां कृमीणामुद्धतो वसुः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
वहुलानि सहस्राणि प्राक्रीडंस्तत्र भारत ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
वहुवत्सरजीवी च मार्कण्डेय़ो महातपाः |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
वहुवर्णं च चित्रं च दिव्यं वानरलक्षणम् |
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
वहुवर्षसहस्राख्ये काले वहुगुणे गते |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२१
यय़ातिरु उवाच
वहुवर्षसहस्रान्तं प्रजापालनवर्धितम् |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२१
पितामह उवाच
वहुवर्षसहस्रान्तं प्रजापालनवर्धितम् |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
वहुवर्षसहस्राय़ुरय़ुजत्कालधर्मणा ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
वहुवाद्याश्च कौरव्य सुदामानः सुमल्लिकाः ||
५३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
वृहस्पतिरु उवाच
वहुविघ्नकरः कालः कालः कालं नय़िष्यति |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
वहुविघ्नश्च नृपते क्रतुरेष स्मृतो महान् |
६८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
वहुविधमनुदृश्य चार्थहेतोः; कृपणमिहार्यमनार्यमाश्रय़न्तम् |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
भीष्म उवाच
वहुविधमनुशास्य तथ्यरूपा; न्गगनतलं द्युतिमान्विवेश सिद्धः ||
१०१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
वहुविधमपि चरतः प्रदिशति; सुखमनुपगतं निरवद्यम् ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
वहुवृक्षलतागुल्ममेतद्वनमुपाश्रिताः |
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
२४३
वैशम्पाय़न उवाच
वहुव्यालमृगाकीर्णं त्यक्तुं द्वैतवनं वनम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
वहुव्यालमृगाकीर्णा विविधाश्चाटवीस्तथा ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
सञ्जय़ उवाच
वहुशः कत्थसे कर्ण कौरव्यस्य समीपतः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
वहुशः कथ्यमानानि नरैर्भूय़ः श्रुतानि मे ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३५
व्यास उवाच
वहुशः कामकारेण न चेद्यः सम्प्रवर्तते ||
२३ ख