शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
उभय़ोः सेनय़ोर्वीरास्तदा हाहाकृतोऽभवन् |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
उभय़ोः सेनय़ोर्वीरैर्व्याकुलं समपद्यत ||
७१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
उभय़ोः सेनय़ोर्हर्षस्तुमुलः समपद्यत ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
उभय़ोः सेनय़ोस्तत्र योधा जहृषिरे मुदा |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
उभय़ोः सेनय़ोस्तीव्रः सैन्यानां स समागमः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
यम उवाच
उभय़ोः स्यात्तदक्षय़्यं दातुरादातुरेव च ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३७
व्यास उवाच
उभय़ोः स्यादनर्थाय़ दातुरादातुरेव च ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
यम उवाच
उभय़ोरक्षय़ं धर्मं तं मनुः प्राह धर्मवित् ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
उभय़ोरन्तराले च वर्तसे मोक्षवातिकः ||
१७५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
उभय़ोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनय़ोस्तत्त्वदर्शिभिः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
उभय़ोरपि संशान्ता हय़सङ्घाः समन्ततः ||
२० ख
सभा पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
उभय़ोरात्मकुलय़ोः कौशल्यं पर्यपृच्छताम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
उभय़ोरुत्तमे युद्धे द्वैरथे द्यूत आहृते |
७० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१११
भीष्म उवाच
उभय़ोरेव यः स्नातः स सिद्धिं शीघ्रमाप्नुय़ात् ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
अम्वो उवाच
उभय़ोरेव वा व्रह्मन्यद्युक्तं तत्समाचर ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
मुनिरु उवाच
उभय़ोरेव वामर्थे यतिष्ये तव तस्य च |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
उभय़ोरेव वामर्थे यास्यामि कुरुसंसदम् ||
७९ ख
वन पर्व
अध्याय
२७८
मार्कण्डेय़ उवाच
उभय़ोरेव शिरसा चक्रे पादाभिवन्दनम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
८७
अष्टक उवाच
उभय़ोर्धावतो राजन्सूर्याचन्द्रमसोरिव ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१२
धृतराष्ट्र उवाच
उभय़ोर्लोकय़ोस्तात प्राप्तय़े नित्यमेव च ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
उभय़ोर्हि नरः स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत् |
१३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
उभय़ोश्चाददः साह्यमुभय़ोश्च हिते रतः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
उभय़ोस्तौ रथौ राजंस्ते चाश्वास्तौ च सारथी |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
उमा चैव महाभागा देवाश्च समहर्षय़ः ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
उमा जिज्ञासमाना वै कोऽय़मित्यव्रवीत्तदा ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
उमा जिज्ञासमाना वै कोऽय़मित्यव्रवीत्सुरान् ||
५९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
उमा ददौ चारजसी वाससी सूर्यसप्रभे ||
४४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
उमा शची सिनीवाली तथा चानुमतिः कुहूः |
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
उमां देवीं विजानीत नारीणामुत्तमां शुभाम् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
उमां शर्वस्तदा दृष्ट्वा स्त्रीभावागतमार्दवाम् |
३७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
उमापतिं पशुपतिं विश्वरूपं महेश्वरम् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
उमापतिं विरूपाक्षं दक्षय़ज्ञनिवर्हणम् |
२९ ख
सभा पर्व
अध्याय
१०
नारद उवाच
उमापतिः पशुपतिः शूलधृग्भगनेत्रहा ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
उमापतिरुमाकान्तो जाह्नवीधृगुमाधवः |
१३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
उमापतिर्भूतपतिः श्रीकण्ठो व्रह्मणः सुतः |
६२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
उमापतिर्विरूपाक्षः स्कन्दः सेनापतिस्तथा |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
उमासहाय़ो भगवान्यत्र नित्यं महेश्वरः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
उमासहाय़ो भगवान्रमते भूतभावनः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
उमासहाय़ो हरिदृग्वहुरूपः पिनाकधृक् ||
४२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
उमाय़ाः कृत्तिकानां च गङ्गाय़ाश्च वदन्त्युत ||
८६ ख
वन पर्व
अध्याय
२२०
मार्कण्डेय़ उवाच
उमाय़ोन्यां च रुद्रेण शुक्रं सिक्तं महात्मना |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
उम्लोचेत्यभिविख्याता प्रम्लोचेति च ता दश |
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
उरःस्थेन वभौ तेन भीमसेनः प्रतापवान् |
४४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
उरःस्थैरथ तैर्वाणैर्माद्रीपुत्रो व्यरोचत |
६४ क
सभा पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
उरशावासिनं चैव रोचमानं रणेऽजय़त् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
उरश्छदैर्विचित्रैश्च व्यशोभन्त तुरङ्गमाः |
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
उरश्छदैर्विमुक्ताश्च वालवन्धैश्च वाजिनः |
१०६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
उरसा धारय़न्निष्कं कण्ठसूत्रं च भास्वरम् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
उरसा धारय़न्निष्कमग्निमालां यथाचलः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
उरसा प्रतिजग्राह पार्थं सञ्छाद्य केशवः ||
१७ ख