वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
रामश्च कृष्णश्च धनञ्जय़श्च; प्रद्युम्नसाम्वौ युय़ुधानभीमौ |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
रामश्च मम तेजस्वी दिव्यास्त्रविदरिन्दमः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
रामश्च वलिनां श्रेष्ठः प्रद्युम्नश्च महारथः ||
८७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
रामश्चाप्यनुमानेन मेने दृष्टां तु मैथिलीम् ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
रामश्चाभ्युत्स्मय़न्प्रेम्णा मामुवाच महातपाः ||
३४ ख
सभा पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
रामश्चैवानिरुद्धश्च वभ्रुश्च सहसारणः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२६८
मार्कण्डेय़ उवाच
रामसन्देशमामन्त्र्य वाग्मी वक्तुं प्रचक्रमे ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
रामसांनिध्यमासाद्य पुत्रो दुर्योधनस्तव |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२७२
मार्कण्डेय़ उवाच
रामस्तं देशमागम्य तत्सैन्यं पर्यरक्षत ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
रामस्तं प्रतिजग्राह पृष्ट्वा गोत्रादि सर्वशः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
रामस्तपस्वी व्रह्मण्यो व्राह्मणश्च गुरुश्च ते |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७४
भीष्म उवाच
रामस्तव महद्दुःखं शोकं चापनय़िष्यति |
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२६२
मार्कण्डेय़ उवाच
रामस्तस्याः प्रिय़ं कुर्वन्धनुरादाय़ सत्वरः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
रामस्तु चतुरो मासान्पृष्ठे माल्यवतः शुभे |
४० क
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
रामस्तु पुनराशङ्क्य पौरजानपदागमम् |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
२६८
मार्कण्डेय़ उवाच
रामस्तु शरजालानि ववर्ष जलदो यथा |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
रामस्तेषां जघन्योऽभूदजघन्यैर्गुणैर्युतः |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
युधिष्ठिर उवाच
रामस्य च नरव्याघ्र विश्वामित्रस्य चैव ह ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
८३
पुलस्त्य उवाच
रामस्य च प्रसादेन तीर्थं राजन्कृतं पुरा |
२ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
रामस्य च प्रसादेन व्यवसाय़ाच्च भारत ||
६४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
रामस्य दय़ितं शिष्यं जामदग्न्यस्य पाण्डव |
१७ क
मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
रामस्य पदमन्विच्छ तत्र गच्छाम यत्र सः ||
४६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
रामस्य मम चैवाशु व्योमावृत्य समन्ततः ||
३० ग
वन पर्व
अध्याय
२५८
मार्कण्डेय़ उवाच
रामस्य माता कौसल्या कैकेय़ी भरतस्य तु |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२६७
मार्कण्डेय़ उवाच
रामस्याज्ञां पुरस्कृत्य धार्यते गिरिसंनिभः ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
११५
वैशम्पाय़न उवाच
रामस्यानुचरं वीरमपृच्छदकृतव्रणम् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
रामस्यानुचरा हृष्टाः सर्वे दृष्ट्वा प्रचुक्रुशुः |
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
धृतराष्ट्र उवाच
रामस्यानुमतः शास्त्रे पुरन्दरसमो युधि |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
रामस्यास्त्रेण पृथिवी परिक्षिप्ता ससागरा |
६८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
रामह्रद उपस्पृश्य विशालाय़ां कृतोदकः |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
रामह्रदे च कौरव्य पैलगार्ग्यस्य चाश्रमे ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
रामादस्त्राणि शक्राच्च प्राप्तवान्भरतर्षभ ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
रामादीन्समरे सर्वाञ्जहि शत्रूनरिन्दम ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
रामादुपात्तेन महामहिम्ना; आथर्वणेनारिविनाशनेन |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
रामादेशितमार्गेण मत्प्रसादान्महात्मना |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
१९७
विदुर उवाच
रामाद्दाशरथेश्चैव गय़ाच्चैव न संशय़ः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
रामाय़णमुपाख्यानमत्रैव वहुविस्तरम् ||
१२६ ख
वन पर्व
अध्याय
१४७
भीम उवाच
रामाय़णेऽतिविख्यातः शूरो वानरपुङ्गवः ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
रामे द्वारवतीं याते नातिप्रमनसोऽभवन् ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
रामेण चैव शप्तस्य कर्णस्य भरतर्षभ ||
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
श्रीवासुदेव उवाच
रामेण निहतो राजन्सानुवन्धः सहानुगः |
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
रामेण सममस्त्रेषु यशसा विक्रमेण च ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
रामेण सह कौरव्य भीमार्जुनय़मैस्तथा |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
रामेण सह मा योत्सीर्गुरुणेति पुनः पुनः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८५
भीष्म उवाच
रामेण सुमहावाहो क्षतस्य क्षतजेक्षण ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
रामेणाजौ विषहितान्वज्रनिष्पेषदारुणान् ||
२६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
रामेणातिवलेनैतन्नोक्तपूर्वं कदाचन |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
युधिष्ठिर उवाच
रामेणेति यदात्थ त्वमत्र मे संशय़ो महान् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
भीष्म उवाच
रामेय़ं मम दौहित्री काशिराजसुता प्रभो |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
रामो दत्त्वा धनं तत्र द्विजेभ्यो जनमेजय़ |
९ क