भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
उत्तमं जवमास्थाय़ प्रय़युर्यत्र सोऽभवत् ||
६३ ग
वन पर्व
अध्याय
३२
युधिष्ठिर उवाच
उत्तमं दैवतं कृष्णे मातिवोचः कथञ्चन ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
उत्तमं यत्नमास्थाय़ ध्रुवमेष्यति संय़ुगे ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
उत्तमं यत्नमास्थाय़ प्रत्येहि भरतर्षभ ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
उत्तमं योगमास्थाय़ यदीच्छति विमुच्यते ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
उत्तमं लभते स्थानमप्सरोगणसेवितम् |
८२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
उत्तमं व्यसनं प्राप्तो भूमावेव व्यतिष्ठत ||
४२ ख
सभा पर्व
अध्याय
४५
दुर्योधन उवाच
उत्तमं शव्दमश्रौषं ततो रोमाणि मेऽहृषन् ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
६९
शकुन्तलो उवाच
उत्तमं सर्वधर्माणां तस्मात्पुत्रं न सन्त्यजेत् ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
उत्तमं ह्यादधानस्य धनुरस्याशुकारिणः |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३७
श्रीभगवानु उवाच
उत्तमः पुरुषस्त्वन्यः परमात्मेत्युदाहृतः |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
उत्तमद्रव्यसम्पन्ना मणिप्राकारमालिनी |
२३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
उत्तमव्यसनार्तेन प्राणत्राणमभीप्सुना |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
उत्तमां गतिमास्थाय़ पृष्ठतोऽनुससार ह ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५९
गन्धर्व उवाच
उत्तमां तु मनोवुद्धिं भवतां भावितात्मनाम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
उत्तमां वुद्धिमास्थाय़ व्रह्मभूय़ं गमिष्यसि |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
उत्तमांश्च परिक्लेशान्भोगांश्चातीव मानुषान् ||
९५ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
उत्तमाङ्गानि कर्षन्तो यैस्त्वं कृष्टा सभातले ||
३३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
उत्तमाङ्गैर्नृसिंहानां नृसिंहास्तस्तरुर्महीम् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
उत्तमाङ्गैश्च वीराणां भ्राजमानैः सकुण्डलैः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
उत्तमाङ्गोपलतलां निस्त्रिंशझषसेविताम् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१११
वैशम्पाय़न उवाच
उत्तमादवराः पुंसः काङ्क्षन्ते पुत्रमापदि ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
उत्तमाधममध्यानि कर्माणि कुरुतेऽवशः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
उत्तमाधममध्यानि मण्डलानि विदर्शय़न् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
उत्तमानां तु मर्त्यानामवमानात्परं भय़म् ||
५० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
हंस उवाच
उत्तमानेव सेवेत प्राप्ते काले तु मध्यमान् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
उत्तमापद्गतः सर्वः पितुः स्मरति शासनम् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८
युधिष्ठिर उवाच
उत्तमापद्गतस्यापि यत्र ते वर्तते मनः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
उत्तमाभिजनौ वीरौ कुरुवृष्णिय़शस्करौ ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
उत्तमामापदं प्राप्य गदां वीरः परामृशत् ||
१३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
उत्तमास्त्रविदः शूरा यथोक्तक्रतुय़ाजिनः |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
२१५
वैशम्पाय़न उवाच
उत्तमास्त्रविदो सम्यक्सर्वतो वारय़िष्यथः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
उत्तमास्त्राणि चादत्स्व गृहीत्वान्यन्महद्धनुः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
उत्तमास्त्राणि दिव्यानि दर्शय़न्तो महारथाः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
उत्तमास्त्राणि दिव्यानि दर्शय़न्तो महावलाः |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
२१५
वैशम्पाय़न उवाच
उत्तमास्त्राणि मे सन्ति दिव्यानि च वहूनि च |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
उत्तमे च कुले जन्म लभेज्जातिं च संस्मरेत् ||
६६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
५
अश्वत्थामो उवाच
उत्तमे व्यसने सन्नो हतो गाण्डीवधन्वना ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
उत्तमे सर्वतीर्थानां यस्त्यजेदात्मनस्तनुम् |
१२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
उत्तमौजा दशार्णाश्च मेकलाश्चोत्कलैः सह ||
३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
उत्तमौजा युधामन्युः सत्यधर्मा च सोमकिः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
उत्तमौजा युधामन्युः सात्यकिः केशवार्जुनौ ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
उत्तमौजा युधामन्युः सात्यकिश्चापराजितः |
५२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
उत्तमौजा युधामन्युस्तथा राजन्प्रभद्रकाः ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
उत्तमौजा युय़ुत्सुश्च यमौ पार्षत एव च |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
द्रोण उवाच
उत्तमौजा हताश्वस्तु हतसूतश्च संय़ुगे |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
उत्तमौजाश्च दुर्धर्षो विराटश्च महारथः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
उत्तमौजाश्च पाञ्चाल्यो युधामन्युश्च दुर्जय़ः ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
धृतराष्ट्र उवाच
उत्तमौजाश्च पाञ्चाल्यो युधामन्युश्च दुर्जय़ः |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
उत्तमौजास्तथा राजन्रथो मम महान्मतः |
५ क