शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
यो ह्येतद्व्राह्मणो नित्यं शृणुय़ाद्धारय़ेत वा |
७० क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
यो ह्येनं पुरुषं वेत्ति देवा अपि न तं विदुः ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४६
व्रह्मो उवाच
यो ह्येवं वृत्तसम्पन्नः स मुनिः श्रेष्ठ उच्यते ||
५१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३३
मातो उवाच
यो ह्येवमविनीतेन रमते पुत्रनप्तृणा |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३७
शुक उवाच
योक्तव्योऽऽत्मा यथा शक्त्या परं वै काङ्क्षता पदम् ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
योक्त्राणि चक्रुर्वाहानां रोहकांश्चापि कण्ठकम् ||
७४ ग
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
योक्त्रय़ामास वाहुभ्यां पशुं रशनय़ा यथा ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
योक्ष्यमाणास्तदात्मानं यशसा विजय़ेन च ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
योग इत्यथ सैन्यानां त्वरतां सम्प्रधावताम् |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
युधिष्ठिर उवाच
योगं मे परमं तात मोक्षस्य वद भारत |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथय़तः स्वय़म् ||
७५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
योगः कुर्याद्वलं प्राप्य तैश्च सर्वैर्महीं चरेत् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३२
व्यास उवाच
योगकृत्यं तु ते कृत्स्नं वर्तय़िष्यामि तच्छृणु |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
योगकृत्यं तु योगानां ध्यानमेव परं वलम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
योगकृत्यं महाराज पृथगेव शृणुष्व मे ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
योगक्षेमं च वृत्तिं च नित्यमेव प्रकल्पय़ेत् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
योगक्षेमं च सम्प्रेक्ष्य गोमिनः कारय़ेत्करान् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८८
भीष्म उवाच
योगक्षेमं च सम्प्रेक्ष्य वणिजः कारय़ेत्करान् ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
७५
शुक्र उवाच
योगक्षेमकरस्तेऽहमिन्द्रस्येव वृहस्पतिः ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
योगक्षेमश्च ते नित्यं व्राह्मणेष्वस्तु भारत ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
योगक्षेमश्च राज्ञोऽपि समाय़त्तः पुरोहिते ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
योगक्षेमस्तदा राजन्कुशलाय़ैव कल्पते ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
योगक्षेमस्य नाशश्च वर्तते वर्णसङ्करः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
योगक्षेमा हि वहवो राष्ट्रं नास्याविशन्ति तत् ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
योगक्षेमाः प्रवर्तन्ते प्रजानां नात्र संशय़ः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
योगक्षेमार्थमेतत्ते नेष्यामि परशुं त्वहम् ||
१०२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
योगक्षेमेण वृष्ट्या च विवर्धन्ते स्वकर्मभिः ||
४१ ख
सभा पर्व
अध्याय
६३
विदुर उवाच
योगक्षेमो दृश्यते वो महाभय़ः; पापान्मन्त्रान्कुरवो मन्त्रय़न्ति ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
योगक्षेमो हि राष्ट्रस्य राजन्याय़त्त उच्यते |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७
युधिष्ठिर उवाच
योगक्षेमौ च राष्ट्रस्य धर्माधर्मौ त्वय़ि स्थितौ |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३०
महेश्वर उवाच
योगचर्याकृतैः सिद्धैः कामक्रोधविवर्जनम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
योगजापकय़ोर्दृष्टं फलं सुमहदद्य वै |
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
योगदर्शनमेतावदुक्तं ते तत्त्वतो मय़ा |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३२
व्यास उवाच
योगदोषान्समुच्छिद्य पञ्च यान्कवय़ो विदुः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६६
भीष्म उवाच
योगदोषान्समुच्छिद्य पञ्च यान्कवय़ो विदुः ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
योगधर्मं महातेजा व्यासेन कथितं यथा ||
२९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
योगनित्यो महाराज सिद्धिं प्राप्तो महातपाः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
योगप्रिय़त्वं तव संनिकर्षं; वृणे सुतानां च शतं शतानि ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
योगभूतं परिचरन्केशवं महदाप्नुय़ात् ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
योगमस्त्राणि गच्छन्ति क्रूरे मे वर्तते मतिः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
७
धृतराष्ट्र उवाच
योगमाज्ञाप्य सेनाय़ा आदित्येऽभ्युदिते तदा |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
योगमाज्ञापय़ामास नान्दीतूर्यपुरःसरम् ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
योगमाज्ञापय़ामास भीमार्जुनय़मैः सह ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
योगमाज्ञापय़ामास सूर्यस्योदय़नं प्रति ||
४५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
योगमाज्ञापय़ामासुर्युद्धाय़ च विनिर्ययुः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
योगमार्गं तथासाद्य यः कश्चिद्भजते द्विजः |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
युधिष्ठिर उवाच
योगमार्गो यथान्याय़ं शिष्याय़ेह हितैषिणा ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
योगमास्थाय़ धर्मात्मा वाय़ुभक्षो जितेन्द्रिय़ः |
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
भीष्म उवाच
योगमास्थाय़ भगवांस्तदा भरतसत्तम ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५५
च्यवन उवाच
योगमास्थाय़ संविष्टो दिवसानेकविंशतिम् ||
१८ ख