chevron_left  ऋक्षंarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
ऋक्षं धूमिन्यथो नीली दुःषन्तपरमेष्ठिनौ |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋक्षः खलु तक्षकदुहितरमुपय़ेमे ज्वालां नाम |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
ऋक्षचर्मावनद्धाङ्गं नल्वमात्रं महारथम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५१
सञ्जय़ उवाच
ऋक्षचर्मावनद्धाङ्गो नल्वमात्रो महारथः ||
१४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
ऋक्षमार्जारवदना व्याघ्रद्वीपिमुखास्तथा ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
ऋक्षशार्दूलवक्त्राश्च द्वीपिसिंहाननास्तथा |
७८ क
द्रोण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
ऋक्षाः सालावृका गृध्राः कपय़ोऽथ सरीसृपाः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
ऋक्षाणां महिषाणां च पन्नगानां तथा गवाम् ||
४२ ग
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
ऋक्षात्संवरणो जज्ञे राजन्वंशकरस्तव ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋक्षाश्च मृगमन्दाय़ाः सृमराश्चमरा अपि ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
ऋक्षाश्च वानराश्चैव सप्तारण्याः स्मृता नृप ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
ऋक्षैः संवर्धितो विप्र ऋक्षवत्येव पर्वते ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
ऋक्सामवर्णाक्षरतो यजुषोऽथर्वणस्तथा ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९४
भीष्म उवाच
ऋक्सामसङ्घांश्च यजूंषि चाहं; छन्दांसि नक्षत्रगतिं निरुक्तम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८१
पराशर उवाच
ऋग्भिः स्तुत्वा महाभागो देवान्वै यज्ञभागिनः ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
ऋग्भिर्यमनुशंसन्ति तन्त्रे कर्मणि वह्वृचः |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९७
भीष्म उवाच
ऋग्यजुःसामगो विद्वान्षट्कर्मा पात्रमुच्यते ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
ऋग्यजुःसामधामानं दशार्धहविराकृतिम् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
ऋग्यजुःसामभिर्जुष्टमथर्वाङ्गिरसैस्तथा ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
ऋग्यजुःसामवित्पूज्यो नित्यं स्याद्देववद्द्विजः |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
ऋग्यजुःसामसंय़ुक्तैर्वचोभिः कृष्णमर्चय़न् ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
ऋग्वेदः सामवेदश्च पुराणं च पुरःसराः ||
८० ख
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
ऋग्वेदः सामवेदश्च यजुर्वेदश्च पाण्डव |
२३ क
वन पर्व
अध्याय १८७
देव उवाच
ऋग्वेदः सामवेदश्च यजुर्वेदोऽप्यथर्वणः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋग्वेदपाठपठितं व्रतमेतद्धि दुश्चरम् |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
वसिष्ठ उवाच
ऋग्वेदश्चागमत्तत्र पदक्रमविभूषितः ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
ऋग्वेदे वर्तते चाग्र्या श्रुतिरत्र विशां पते |
५६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
ऋग्वेदे सय़जुर्वेदे तथैवाथर्वसामसु |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋचः खल्वाङ्गेय़ीमुपय़ेमे सुदेवां नाम |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
व्राह्मण उवाच
ऋचमप्यत्र शंसन्ति विद्यारण्यविदो जनाः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५१
सूर्य उवाच
ऋचश्चानेन विप्रेण संहितान्तरभिष्टुताः |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २५
व्राह्मण उवाच
ऋचश्चाप्यत्र शंसन्ति नाराय़णविदो जनाः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९९
मनुरु उवाच
ऋचामादिस्तथा साम्नां यजुषामादिरुच्यते |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
ऋचीक इति विख्यातो विपुले तपसि स्थितः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
ऋचीकः प्रददौ प्रीतः शुल्कार्थं जपतां वरः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११५
नारद उवाच
ऋचीकः सत्यवत्यां च सरस्वत्यां यथा मनुः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
ऋचीकपुत्रस्य तपस्विसङ्घैः; समावृतां पुण्यकृदर्चनीय़ाम् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
ऋचीकपौत्रो रामश्च ऋषिरौद्दालकिस्तथा ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋचीकस्तस्य पुत्रस्तु जमदग्निस्ततोऽभवत् |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११७
नारद उवाच
ऋचीकस्तु तथेत्युक्त्वा वरुणस्यालय़ं गतः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
ऋचीकस्यात्मजश्चैव शुनःशेपो महातपाः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
ऋचीकेनाहितं व्रह्म परमेतद्युधिष्ठिर ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय ११५
अकृतव्रण उवाच
ऋचीको भार्गवस्तां च वरय़ामास भारत ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
ऋचेपुरथ कक्षेपुः कृकणेपुश्च वीर्यवान् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २४३
व्यास उवाच
ऋचो यजूंषि सामानि न तेन न स व्राह्मणः ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
ऋचो यजूंषि सामानि मनसा चिन्तय़न्मुनिः |
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
ऋचो यजूंषि सामानि यजमानश्च षोडशः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९९
मनुरु उवाच
ऋचो यजूंषि सामानि शरीराणि व्यपाश्रिताः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
ऋचो यजूंषि सामानि स्तोभाश्च विधिचोदिताः |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
धृतराष्ट्र उवाच
ऋचो यजूंष्यधीते यः सामवेदं च यो द्विजः |
१ क