chevron_left  ऋषेस्तद्वचनंarrow_drop_down
सभा पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषेस्तद्वचनं श्रुत्वा निशश्वास युधिष्ठिरः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषेस्तस्य तपस्तीव्रं न शशाक निरीक्षितुम् |
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय ४६
मन्त्रिण ऊचुः
ऋषेस्तस्य तु पुत्रोऽभूद्गवि जातो महाय़शाः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषेस्तस्य वरारोहे यस्येदं वनमुत्तमम् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
ऋषेस्तस्योटजस्थस्य कालोऽगच्छन्निशानिशम् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय १४१
युधिष्ठिर उवाच
ऋषेस्त्वय़ा श्रुतं वाक्यं कैलासं पर्वतं प्रति |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९९
इन्द्र उवाच
ऋष्टिखड्गध्वजानूका गृध्रकङ्कवडप्लवा ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
ऋष्टितोमरनाराचैर्निर्विद्धा वरवारणाः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७२
सञ्जय़ उवाच
ऋष्टिभिः शक्तिभिः प्रासैः शूलतोमरपट्टिशैः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
ऋष्टिभिर्विमलाग्राभिः प्रासैरपि च संय़ुगे ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
ऋष्टिभिर्विमलाभिश्च तत्र तत्र विशां पते |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
ऋष्टिभिश्च धनुर्भिश्च विमलैश्च परश्वधैः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
ऋष्टिशक्तिगदावाणमुसलप्रासपट्टिशाः |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
ऋष्ट्यश्च पीता विमला विकोशाः; प्रासाः सखड्गाः कनकावभासाः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०१
भीष्म उवाच
ऋष्टय़स्तोमराः खड्गा निशिताश्च परश्वधाः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६३
सञ्जय़ उवाच
ऋष्यवर्णाञ्जघानाशु तथोभौ पार्ष्णिसारथी ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
ऋषय़ः किल राजेन्द्र नैमिषेय़ास्तपोधनाः |
९२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
ऋषय़ः पर्यधावन्त सहिताः सिद्धचारणैः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ः पर्युपासन्ते देवाश्च विवुधेश्वरम् ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ऋषय़ः पितरश्चैव प्रशशंसुर्महाव्रतम् |
१११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५५
भीष्म उवाच
ऋषय़ः पितरो देवा मनुष्या मृगसत्तमाः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १००
पृथिव्यु उवाच
ऋषय़ः पितरो देवा मनुष्याश्चैव माधव |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
ऋषय़ः पितरो देवा महाभूतानि धातवः |
१३८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
आस्तीक उवाच
ऋषय़ः पूजिताः सर्वे गतिं दृष्ट्वा महात्मनः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
ऋषय़ः प्राहुरेवं मां त्रितकूपाभिपातितम् |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
वसिष्ठ उवाच
ऋषय़ः श्रुतसम्पन्ना वेदप्रामाण्यदर्शनात् ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
ऋषय़ः समेताः पश्चिमे वै प्रभासे; समागता मन्त्रममन्त्रय़न्त |
३ क
आदि पर्व
अध्याय २०३
नारद उवाच
ऋषय़ः सर्व एवैते पितामहमुपासते ||
५ ग
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ः सर्वधर्मज्ञाः सद्म तात मनीषिणः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
ऋषय़ः सर्वभूतानामात्मनश्च सुखैषिणः ||
४७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
ऋषय़ः सर्वभूतानामात्मनश्च हितैषिणः ||
१६ ख
मौसल पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़ः साधु जानीत किमिय़ं जनय़िष्यति ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६३
सञ्जय़ उवाच
ऋषय़ः सिद्धसङ्घाश्च व्यतिष्ठन्त दिदृक्षय़ा ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
भीष्म उवाच
ऋषय़ः सुव्रता दान्ताः शृण्वन्तु गदतस्तव ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
ऋषय़श्च परां सिद्धिमुपवासैरवाप्नुवन् ||
६४ ख
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़श्च महात्मानः स्वय़ंवरदिदृक्षय़ा |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४४
सनत्सुजात उवाच
ऋषय़श्च महाभागा व्रह्मलोकं मनीषिणः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
ऋषय़श्च महाभागाः पुरस्कृत्य शतक्रतुम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
ऋषय़श्च महाभागाः समासेदुर्महोदधिम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७२
भीष्म उवाच
ऋषय़श्च महाभागास्तद्युद्धं द्रष्टुमागमन् ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०
शल्य उवाच
ऋषय़श्च महेन्द्रं तमस्तुवन्विविधैः स्तवैः ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय ७
सूत उवाच
ऋषय़श्च यथापूर्वं क्रिय़ाः सर्वाः प्रचक्रिरे ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८५
भीष्म उवाच
ऋषय़श्च सगन्धर्वा देवताश्चैव भारत |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
जनमेजय़ उवाच
ऋषय़श्च सगन्धर्वा यच्च किञ्चिच्चराचरम् |
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
ऋषय़श्च हि देवाश्च गन्धर्वाश्च महौजसः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
वासुदेव उवाच
ऋषय़श्च हि देवाश्च त्वय़ा नित्यमुपासिताः ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०९
भीष्म उवाच
ऋषय़श्च हि देवाश्च प्रीय़न्ते पितृभिः सह ||
२३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३१०
भीष्म उवाच
ऋषय़श्चक्रिरे धर्मं योऽनूचानः स नो महान् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १३३
अष्टावक्र उवाच
ऋषय़श्चक्रिरे धर्मं योऽनूचानः स नो महान् ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषय़श्चक्रिरे धर्मं योऽनूचानः स नो महान् ||
४७ ख