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अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
ऋषभस्त्वं पवित्राणां योगिनां निष्कलः शिवः |
१५५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १११
नारद उवाच
ऋषभस्य ततः शृङ्गे निपत्य द्विजपक्षिणौ |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
ऋषभस्य तथैलस्य नृगस्य नृपतेस्तथा ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषभाः शास्त्रपठितास्तथा जलचराश्च ये |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
ऋषभाक्षा मनुष्येन्द्राश्चमूमुखगता वभुः ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
ऋषभाक्षा महेष्वासाश्चमूमुखगता वभुः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
ऋषभाणां वराहाणां मार्जाराणां तथैव च |
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषभानिव संमत्तान्गजेन्द्रानूर्जितानिव ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
भीष्म उवाच
ऋषभान्मधु मांसं च कृतान्नं च युधिष्ठिर ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
ऋषभैकसहस्रं गा दत्त्वा शुभमवाप्नुय़ात् ||
५१ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
भीष्म उवाच
ऋषभो नाम विप्रर्षिः स्मय़न्निव ततोऽव्रवीत् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ५२
सूत उवाच
ऋषभो वेगवान्नाम पिण्डारकमहाहनू |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
ऋषिं भरतशार्दूल नृत्तगीतविशारदाः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
ऋषिं शरणमापेदे वेपमानो भय़ातुरः ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६९
धृतराष्ट्र उवाच
ऋषिं सनातनतमं विपश्चितं; वाचः समुद्रं कलशं यतीनाम् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय ६५
शकुन्तलो उवाच
ऋषिः कश्चिदिहागम्य मम जन्माभ्यचोदय़त् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
ऋषिः कोपसमाविष्टस्त्यक्तुकामो भुजङ्गमाम् ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
ऋषिः परमतेजस्वी धर्मात्मा संय़तेन्द्रिय़ः ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय ३८
सूत उवाच
ऋषिः परमधर्मात्मा दान्तः शान्तो महातपाः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
ऋषिः परमधर्मात्मा नारदो भगवान्प्रभुः |
४० क
आदि पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
ऋषिः परमधर्मात्मा वेदवेदाङ्गपारगः ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय ९४
गङ्गो उवाच
ऋषिः परैरनाधृष्यो जामदग्न्यः प्रतापवान् |
३५ क
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिः पुराणो वेदात्मा दृश्यश्चापि विजानताम् ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिः प्रसन्नस्तस्याभूत्संरम्भं च विहाय़ सः |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिः प्राक्षृङ्गवान्नाम समय़ं चेदमव्रवीत् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
भीष्म उवाच
ऋषिः शक्तिर्महाभागस्तथा वेदशिराश्च यः |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिः सत्यवतीपुत्रः प्रागेव समवुध्यत ||
३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिः सत्यवतीपुत्रो व्यासोऽभ्येत्य वचोऽव्रवीत् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
भीष्म उवाच
ऋषिः समन्ततोऽपश्यत्तत्र तत्र मनोरमम् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
ऋषिकुल्यां नरः स्नात्वा ऋषिलोकं प्रपद्यते |
४४ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
ऋषिकुल्यां समासाद्य वासिष्ठं चैव भारत |
४३ क
सभा पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिकुल्याश्च ताः सर्वा ददर्श कुरुनन्दनः ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
ऋषिकुल्यास्तथा मेध्या नदी चित्रपथा तथा ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिकेषु तु सङ्ग्रामो वभूवातिभय़ङ्करः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिको नाम राजर्षिर्वभूव नृपसत्तमः ||
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिकोटिसहस्राणि तपोभिर्ये दिवं गताः ||
९२ ख
वन पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिजुष्टं सुपुण्यं तत्तीर्थं व्रह्मसरोत्तमम् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
ऋषिणा तण्डिना भक्त्या कृतैर्देवकृतात्मना ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
युधिष्ठिर उवाच
ऋषिणा नाचिकेतेन पूर्वमेव निदर्शितम् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
ऋषिणा पितृकार्ये च स च धर्मपथे स्थितः |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २२
स्त्र्यु उवाच
ऋषिणा प्रसादिता चास्मि तव हेतोर्द्विजर्षभ |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
ऋषिणा शरभः शप्तः स्वं रूपं पुनराप्तवान् ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय १२४
लोमश उवाच
ऋषिणा सत्कृतस्तेन सभार्यः पृथिवीपतिः |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११८
भीष्म उवाच
ऋषिणा हुङ्कृतः पापस्तपोवनवहिष्कृतः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५७
भीष्म उवाच
ऋषिणोद्दालकेनापि श्वेतकेतुर्महातपाः |
१० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
ऋषिदत्तं प्रनष्टं तद्दिव्यदर्शित्वमद्य वै ||
५८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिदृष्टेन विधिना समा वह्व्यः समाहितः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १११
पाण्डुरु उवाच
ऋषिदेवमनुष्याणां परिमुक्तोऽस्मि धर्मतः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
उमो उवाच
ऋषिधर्मं तु धर्मज्ञ श्रोतुमिच्छाम्यनुत्तमम् |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
महेश्वर उवाच
ऋषिधर्मः सदा चीर्णो योऽन्यस्तमपि मे शृणु ||
४७ ख