chevron_left  ऋषिपुत्रमिमंarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय ९
तक्षो उवाच
ऋषिपुत्रमिमं हत्वा व्रह्महत्याभय़ं न ते ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिपुत्रस्ततः कोपं चकारामर्षितस्तदा |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
ऋषिपुत्रेण नर्मार्थं कृशेन द्विजसत्तम ||
२३ ग
आदि पर्व
अध्याय ७२
कच उवाच
ऋषिपुत्रो न ते कश्चिज्जातु पाणिं ग्रहीष्यति ||
१९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
नारद उवाच
ऋषिपुत्रो मनीषी स राजा चक्रेऽस्य तद्वचः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
ऋषिपुत्रो ममाचार्यो द्रोणस्य दय़ितः सखा |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिपुत्रो महाभागस्तपसा दग्धकिल्विषः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिपुत्रोऽथ तं धर्मं श्वेतकेतुर्न चक्षमे |
१५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिप्रसादात्तेऽन्ये च क्षत्रिय़ा नष्टमन्यवः |
६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिप्रसादात्पुत्राणां स्वरूपाणां कुरूद्वह ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
ऋषिभिः कथितानीह यानि सङ्कीर्तितानि ते ||
६७ ग
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
ऋषिभिः क्रतवः प्रोक्ता वेदेष्विह यथाक्रमम् |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
ऋषिभिः परिगीतानि तानि वक्ष्यामि भूतय़े ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय २१४
मार्कण्डेय़ उवाच
ऋषिभिः पूजितं स्कन्नमनय़त्स्कन्दतां ततः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
ऋषिभिः संशय़ं पृष्टो वसुश्चेदिपतिः पुरा |
५४ क
वन पर्व
अध्याय ११४
लोमश उवाच
ऋषिभिः समुपाय़ुक्तं यज्ञिय़ं गिरिशोभितम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय २१९
मार्कण्डेय़ उवाच
ऋषिभिः सम्परित्यक्ता धर्मय़ुक्ता महाव्रताः |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
ऋषिभिः सह धर्मज्ञा भवं सर्वात्मना गताः ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
भीष्म उवाच
ऋषिभिः सह यास्यामि सौरं तेजोऽतिदुःसहम् ||
५७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७२
भीष्म उवाच
ऋषिभिः स्तूय़मानस्य रूपमासीत्सुदुर्दृशम् ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८१
भृगुरु उवाच
ऋषिभिः स्वेन तपसा सृज्यन्ते चापरे परैः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
ऋषिभिर्देवकल्पैश्च श्रितानि सुकृतैषिभिः ||
८९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
ऋषिभिर्भावितं तत्र यत्र कारुणिको ह्यसौ ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिभिर्यज्ञपटुभिर्यथावत्कर्मकर्तृभिः |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३५
श्रीभगवानु उवाच
ऋषिभिर्वहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधैः पृथक् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११८
नारद उवाच
ऋषिभिर्व्रह्मकल्पैश्च समन्तादावृतं वनम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
ऋषिभिर्व्रह्मकल्पैश्च सेवितानि महात्मभिः ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
ऋषिभिर्व्रह्मणा चैव विवुधैश्च सुपूजितः |
६३ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
ऋषिभिश्च तदानीता धार्तराष्ट्रान्प्रति स्वय़म् |
७१ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
ऋषिभिश्च तपःसिद्धैः सार्धं देवैश्च सुव्रतः ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
ऋषिभिश्च प्रजापाल्ये व्रह्मणा चाभिषेचितः ||
१२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ११
वासुदेव उवाच
ऋषिभिश्च मम प्रोक्तं तन्निवोध नराधिप ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
युधिष्ठिर उवाच
ऋषिभिश्च महाभागैर्यतिभिश्च महात्मभिः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय ९९
लोमश उवाच
ऋषिभिश्च महाभागैर्वलवान्समपद्यत ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३०
वासुदेव उवाच
ऋषिभिश्च मय़ा चैव न चासौ तद्गृहीतवान् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय १९५
मार्कण्डेय़ उवाच
ऋषिभिश्च सगन्धर्वैरुत्तङ्केन च धीमता ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिभिश्चैव सिद्धैश्च सहितो वै महावलः |
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिभिस्तैरनुज्ञातो निर्ययौ मधुसूदनः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
ऋषिभ्यो भगवान्सोमः सोमाद्देवाः सनातनाः ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय २१३
मार्कण्डेय़ उवाच
ऋषिभ्यो भरतश्रेष्ठ प्राय़च्छत दिवौकसाम् ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७३
भीष्म उवाच
ऋषिभ्यो लक्ष्मणेनोक्तमरण्ये वसता विभो ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिमध्ये महाभागः शृण्वतोः कृष्णभीष्मय़ोः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
भीष्म उवाच
ऋषिमध्ये महाराज तत्र धर्मभृतां वरः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिमध्ये स्थितस्तात तपन्निव विभावसुः ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३५
वासुदेव उवाच
ऋषिमाङ्गिरसं वृद्धं पुरस्कृत्य तु ते द्विजाः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १००
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिमावाहय़त्सत्या यथापूर्वमनिन्दिता ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
नारद उवाच
ऋषिमुख्याः सदा यत्र वाल्मीकिस्त्वथ काश्यपः |
१०२ क
शल्य पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिरप्यभवद्दीनस्तस्या रूपं विचिन्तय़न् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३११
भीष्म उवाच
ऋषिरप्सरसं दृष्ट्वा सहसा काममोहितः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ७८
शर्मिष्ठो उवाच
ऋषिरभ्यागतः कश्चिद्धर्मात्मा वेदपारगः |
३ क