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सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
एक एकं समागम्य मामुवाच हसन्निव ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९०
भीष्म उवाच
एक एकान्तमुत्सार्य रहो वचनमव्रवीत् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९६
भीष्म उवाच
एक एकेन वाच्यश्च विसृजस्व क्षिपामि च ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
एक एकेन सङ्गम्य यत्ते संमतमाय़ुधम् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
एक एकेन सङ्गम्य रहो व्रूय़ां हितं तव |
३७ क
शल्य पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
एक एकेन सङ्गम्य संय़ुगे गदय़ा वली ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
एक एव च वीभत्सुः प्रविष्टस्तात भारतीम् |
८२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
भीष्म उवाच
एक एव चरेद्धर्मं न धर्मध्वजिको भवेत् |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
एक एव चरेद्धर्मं नास्ति धर्मे सहाय़ता |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३७
व्यास उवाच
एक एव चरेन्नित्यं सिद्ध्यर्थमसहाय़वान् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
एक एव ज्वलंस्तस्थौ वृषसेनः प्रतापवान् ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय ११
युधिष्ठिर उवाच
एक एव तु राजर्षिर्हरिश्चन्द्रो महामुने |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
सञ्जय़ उवाच
एक एव तु वीभत्सुः सोमकावय़वैः सह |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५४
भीष्म उवाच
एक एव दमे दोषो द्वितीय़ो नोपपद्यते |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
एक एव दितेः पुत्रो हिरण्यकशिपुः स्मृतः |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २३
व्राह्मण उवाच
एक एव ममैवात्मा वहुधाप्युपचीय़ते ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २१
भीष्म उवाच
एक एव यदा पार्थः षड्रथाञ्जितवान्युधि ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
एक एव रणे भीष्म एकवीरत्वमागतः ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
एक एव रणे शक्तो हन्तुमस्मान्ससैनिकान् ||
८२ ख
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
एक एव विमृद्नाति नातिकृच्छ्राद्वृकोदरः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
एक एव सदा कृष्णो मित्राणामभय़ङ्करः |
५१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९४
सञ्जय़ उवाच
एक एव समुद्यातः पर्याप्तं तन्निदर्शनम् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
नारद उवाच
एक एव स्मृतो राशिर्यतो भूतानि जज्ञिरे ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय १३४
वन्द्यु उवाच
एक एवाग्निर्वहुधा समिध्यते; एकः सूर्यः सर्वमिदं प्रभासते |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५
कर्ण उवाच
एक एवात्र कर्तव्यो यस्मिन्वैशेषिका गुणाः ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
एक एवाभिय़ाति त्वां पश्य साफल्यमात्मनः ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
एक एवेति जानीहि त्रिधा तस्य प्रदर्शनम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
एक एवैष भगवान्विज्ञेय़ः प्रथमोऽङ्गिराः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
एक एवोत्तमवलः क्षुत्पिपासासमन्वितः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
एकं गोव्राह्मणं तस्मात्प्रवदन्ति मनीषिणः ||
४० ख
शल्य पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
एकं च नो निहत्याजौ भव राजेति भारत ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
एकं च भगवन्तं ते नानारूपमकल्पय़न् |
४१ क
सभा पर्व
अध्याय ६०
दुर्योधन उवाच
एकं च वासो मम मन्दवुद्धे; सभां नेतुं नार्हसि मामनार्य ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
एकं चक्रं वर्तते द्वादशारं प्रधि; षण्णाभिमेकाक्षममृतस्य धारणम् |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२४
भीष्म उवाच
एकं त्वनुग्रहं तुभ्यं दद्मो वै नृपसत्तम ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४८
नागभार्यो उवाच
एकं त्वस्य विजानामि भक्तिमानतिरोषणः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
एकं त्वां वय़माश्रित्य सहस्राक्षमिवामराः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८
युधिष्ठिर उवाच
एकं त्विच्छामि भद्रं ते क्रिय़माणं महीपते ||
२५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
एकं त्विदानीमिच्छामो गुरुणानुग्रहं कृतम् ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
एकं दुर्योधनं राजन्नपश्यं भृशविक्षतम् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
एकं द्वादशधा जज्ञे तस्मै सूर्यात्मने नमः ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय १८९
व्यास उवाच
एकं पतिं गुणोपेतं त्वत्तोऽर्हामीति वै तदा |
४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४५
सनत्सुजात उवाच
एकं पादं नोत्क्षिपति सलिलाद्धंस उच्चरन् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
एकं प्रहारं यं दद्यां भीमाय़ रुषितो नृप |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
एकं मणिमय़ं तत्र तथैकं रौक्ममद्भुतम् ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय २१
द्रौपद्यु उवाच
एकं मे समय़ं त्वद्य प्रतिपद्यस्व कीचक |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
एकं वर्षशतं चैव फलाहारस्तदाभवम् |
८७ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
यय़ातिरु उवाच
एकं वर्षसहस्रं तु चरेय़ं यौवनेन ते ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
एकं वहव आसाद्य प्रेषय़ेय़ुर्यमक्षय़म् ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
एकं विषरसो हन्ति शस्त्रेणैकश्च वध्यते |
४४ क