chevron_left  भीष्मद्रोणौarrow_drop_down
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मद्रोणौ हतौ श्रुत्वा सूतपुत्रं च पातितम् |
५१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्मद्रोणौ हि समरे न हन्याद्वज्रभृत्स्वय़म् |
६३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्मप्रतापात्कुरवो नय़ेनान्धकवृष्णय़ः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मप्रेप्सुं महाराज तापय़न्तं दिशो दश |
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मप्रेप्सुं रणे यान्तं वृषं व्याघ्रशिशुर्यथा ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्ममप्रतिय़ुध्यन्तं शिखण्डी साय़कोत्तमैः |
६० क
भीष्म पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममभ्यद्रवन्क्रुद्धा रणे रभसवाहनाः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममाधिरथिर्दृष्ट्वा भरतानाममध्यमम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्ममामन्त्रय़ां चक्रू राजानं च युधिष्ठिरम् ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्ममामन्त्रय़ामास धृतराष्ट्रं च पाण्डवः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममाशु महेष्वासमाससाद सुदुर्जय़म् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममासाद्य पार्थानां वाहिनी समकम्पत ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममासाद्य सङ्ग्रामे छादय़ामास साय़कैः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममासाद्य समरे शरैर्जघ्नुर्महारथम् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
भीष्ममृत्युर्यथाकालं विहितो वै स्वय़म्भुवा ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८७
राम उवाच
भीष्ममेव प्रपद्यस्व न तेऽन्या विद्यते गतिः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभिदुद्राव रक्ष्यमाणः किरीटिना ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभिदुद्राव वीभत्सुरपराजितः ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभिदुद्राव सर्वसैन्यस्य पश्यतः ||
९६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु सह सैन्यपुरस्कृताः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभिलीय़न्त सह सर्वैस्तवात्मजैः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभ्ययात्तूर्णं प्राणांस्त्यक्त्वा महाहवे ||
४५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभ्ययात्तूर्णं भ्रातृभिः परिवारितः ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभ्ययुस्तूर्णं त्यक्त्वा मृत्युकृतं भय़म् ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
भीष्ममेवाभ्यवर्तन्त जय़े कृत्वा दृढां मतिम् ||
३२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मवीर्योपगूढेन पित्रा च तव पार्थिव ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
नारद उवाच
भीष्मश्च कुरुशार्दूल शास्त्रतत्त्वार्थदर्शिवान् |
९७ क
सभा पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मश्च धृतराष्ट्रश्च कुरुवृद्धतमावुभौ |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मश्च निहतो यत्र लोकनाथः प्रतापवान् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मश्च रथिनां श्रेष्ठो भारद्वाजश्च वै द्विजः ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्ततः शान्तनवो निवृत्य; हिरण्यकक्ष्यांस्त्वरय़ंस्तुरङ्गान् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्तु दुर्योधनमेव राज; न्मध्ये कुरूणां प्रहसन्नुवाच ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्तु निहते तस्मिन्सारथौ रथिनां वरः |
१०६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्तु पुरुषव्याघ्रः कर्मणा मनसा गिरा |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्तु रथिनां श्रेष्ठस्तूर्णं विव्याध पाण्डवम् |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्तु रथिनां श्रेष्ठो भीमसेनं महावलम् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्तु राजन्समरे महात्मा; धनुः सुचित्रं ध्वजमेव चापि |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्तु वेदनां धैर्यान्निगृह्य भरतर्षभ |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्तु सहितः सर्वैर्धार्तराष्ट्रस्य सैनिकैः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्तेषां कथाः श्रुत्वा ऋषीणां भावितात्मनाम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्य कुरुशार्दूल देहोत्सर्गं महात्मनः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
भीष्मस्य कोपस्तव चेन्द्रकल्प; द्रोणस्य राज्ञश्च युधिष्ठिरस्य |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्मस्य च वधस्तात द्रोणस्य च महात्मनः ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्य चास्य वचनान्निय़ोगाच्च ममानघ ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य जीविताकाङ्क्षी धनञ्जय़मुपाद्रवत् ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य तद्वचः श्रुत्वा भारद्वाजपुरोगमाः |
६३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्य तद्वचः श्रुत्वा विस्मिताः कुरुपुङ्गवाः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्य तु पितुश्चैव मम चापचितिः कृता |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्य तु वचः श्रुत्वा भारद्वाजो महामनाः |
४२ क