chevron_left  एकीभूतंarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय ३५०
नाग उवाच
एकीभूतं च तत्तेजः क्षणेनादित्यतां गतम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
व्यास उवाच
एकीभूतं तपसां संनिधानं; वय़ोतिगैः सुष्टुतमिष्टवाग्भिः ||
६० ख
वन पर्व
अध्याय १६३
अर्जुन उवाच
एकीभूतस्तदा राजन्सोऽभ्यवर्तत मां युधि ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
एकीभूतस्य न ह्यस्य धारणे तेजसः प्रभो |
४६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
एकीभूताः पुनश्चैव तव पुत्रा महारथाः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
एकीभूताः सुसंय़त्ताः कौरवाणां महाचमूः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
एकीभूतानपि रणे दिव्यैरस्त्रैः प्रतापवान् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय ७
सूत उवाच
एकीभूताश्च पूज्यन्ते पृथक्त्वेन च पर्वसु ||
९ ख
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
एकीभूतास्ततः सर्वे कालपर्याय़चोदिताः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
एकीभूतास्ततः सर्वे कुरवः पाण्डवैः सह |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
एकीभूतास्ततस्तास्तु तस्मिंस्तीर्थे समागताः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय २३७
दुर्योधन उवाच
एकीभूतास्ततो वीरा गन्धर्वाः सह पाण्डवैः |
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
एकीभूतैर्महाप्राज्ञैः शूरैररिनिवर्हणैः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय १८७
देव उवाच
एकीभूतो हि स्रक्ष्यामि शरीराद्द्विजसत्तम ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय ३३
सूत उवाच
एके तत्राव्रुवन्नागा वय़ं भूत्वा द्विजर्षभाः |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
एकेन कुरु वै क्षेमं लोकस्य च कुलस्य च ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९
शल्य उवाच
एकेन च दिशः सर्वाः पिवन्निव निरीक्षते ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
एकेन च यथोत्थेय़ं सत्यत्वं मधुरा गिरः |
६७ क
विराट पर्व
अध्याय ६४
उत्तर उवाच
एकेन तेन वीरेण षड्रथाः परिवारिताः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
एकेन निहतान्दृष्ट्वा भीतो दुर्योधनोऽभवत् ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
वासुदेव उवाच
एकेन पाण्डुपुत्रेण विराटनगरे यदा |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६२
विदुर उवाच
एकेन रथमास्थाय़ पृथिवी येन निर्जिता |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
एकेन वलिना राजन्वारणेन हता रथाः ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
एकेन वहवः सङ्ख्ये मानुषेण पराजिताः |
५४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
एकेन वहवोऽमित्राः पलितेनाभिसन्धिताः ||
१९२ ख
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
एकेन विद्ध्वा वाणेन पुनर्विव्याध सप्तभिः ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
एकेन शीघ्रं नकुलेन कृत्ताः; सारेप्सुनेवोत्तमचन्दनास्ते ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
एकेन सङ्ग्रामजितः शरेण; शिरो जहाराथ किरीटमाली ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
एकेन समरे येन हतं पुत्रशतं मम ||
४६ ख
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
एकेन सहिताः सङ्ख्ये हताः क्रोधवशा गणाः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
एकेन सात्वतेनाद्य युध्यमानस्य चानघ |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
एकेन सारथिं चास्य चतुर्भिश्चतुरो हय़ान् |
२२ ख
विराट पर्व
अध्याय ४४
कृप उवाच
एकेन हि त्वय़ा कर्ण किं नामेह कृतं पुरा |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
महेश्वर उवाच
एकेनांशेन कामार्थ एकमंशं विवर्धय़ेत् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
महेश्वर उवाच
एकेनांशेन धर्मार्थश्चर्तव्यो भूतिमिच्छता |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८४
धृतराष्ट्र उवाच
एकेनापि पतत्यह्ना योजनानि चतुर्दश |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २७३
मार्कण्डेय़ उवाच
एकेनास्य धनुष्मन्तं वाहुं देहादपातय़त् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
व्रह्मो उवाच
एकेनैव च भक्तेन यः क्रीत्वा गां प्रय़च्छति |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
एकेनैव शतस्यैकं पातेनाभिभविष्यति |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
युधिष्ठिर उवाच
एकेनैवासहाय़ेन शक्यं स्थातुं कथं भवेत् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
एकेषुणा देववरः स नो मृत्युर्भविष्यति |
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५४
दुर्योधन उवाच
एकैक एषां शक्तस्तु हन्तुं भारत पाण्डवान् |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
एकैकं क्रतुमाहृत्य शतकृत्वः शतक्रतुः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
एकैकं च त्रिभिर्वाणैराजघान स्मय़न्निव |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
एकैकं त्रिभिरानर्छत्कङ्कवर्हिणवाजितैः |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
एकैकं दशभिः षड्भिरष्टाभिरपि भारत |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
एकैकं दशभिर्वाणैर्युधि चिच्छेद हृष्टवत् ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
एकैकं दशभिर्वाणैर्विव्याध च महावलः |
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
एकैकं नवभिर्वाणैः सर्वानेव समर्पय़त् ||
५१ ख
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
एकैकं न्यवधीत्सङ्ख्ये द्वाभ्यां द्वाभ्यां चमूमुखे |
१५ ख