अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
एतत्ते कथितं राजन्मांसस्य परिवर्जने |
७६ क
आदि पर्व
अध्याय
४६
मन्त्रिण ऊचुः
एतत्ते कथितं राजन्यथावृत्तं यथाश्रुतम् |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४८
वासुदेव उवाच
एतत्ते कथितं राजन्यद्वृत्तं कुरुसंसदि ||
६ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
एतत्ते कथितं राजन्यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३७
व्यास उवाच
एतत्ते कथितं सर्वं यथा वृत्तं युधिष्ठिर |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४८
वासुदेव उवाच
एतत्ते कथितं सर्वं यद्वृत्तं कुरुसंसदि ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
एतत्ते कथितं सर्वमशेषेण मय़ा नृप |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
एतत्ते कारणं शक्र निवासकृतमद्य वै |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४१
च्यवन उवाच
एतत्ते च्यवनस्यापि कर्म राजन्प्रकीर्तितम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
एतत्ते परमं गुह्यमाख्यातमृषिसत्तम |
४५ क
मौसल पर्व
अध्याय
७
वसुदेव उवाच
एतत्ते पार्थ राज्यं च स्त्रिय़ो रत्नानि चैव ह |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
एतत्ते प्रथमं देव ख्यातं कर्म भविष्यति |
७६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
एतत्ते भरतश्रेष्ठ मय़ा कार्त्स्न्येन कीर्तितम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
एतत्ते राजधर्माणां नवनीतं युधिष्ठिर |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
एतत्ते रोचतां वाक्यं यदुक्तोऽसि मय़ानघ |
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३९
व्यास उवाच
एतत्ते वर्तय़िष्यामि यथावदिह दर्शनम् |
८ क
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
एतत्ते विस्तरेणोक्तं यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
७१ क
शल्य पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते वृद्धकन्याय़ा व्याख्यातं चरितं महत् ||
२३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
एतत्ते व्रह्मदत्तस्य पूजन्या सह भाषितम् |
१०९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं किं भूय़ः श्रोतुमिच्छसि ||
१२७ ख
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं किं भूय़ः श्रोतुमिच्छसि ||
५१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं किं भूय़ः श्रोतुमिच्छसि ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४९
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं किं भूय़ः श्रोतुमिच्छसि ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
२०१
व्याध उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं किं भूय़ो श्रोतुमिच्छसि ||
२० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३५
व्यास उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं कौन्तेय़ाभक्ष्यभक्षणम् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
१०८
लोमश उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं गङ्गा त्रिपथगा यथा |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं चातुर्वर्ण्यस्य शोभने |
५९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं तत्त्वेन भरतर्षभ |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२४
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं ते भूता मानवा यथा |
३९ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं देवगुह्यं सनातनम् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय
२०६
मार्कण्डेय़ उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं निखिलेन युधिष्ठिर |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं नैपुणेन सुरेश्वर |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं पावनं च महाद्युते |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं महत्त्वं प्रति राजसु |
१४१ क
वन पर्व
अध्याय
१२६
लोमश उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं मान्धातुश्चरितं महत् |
४३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं मय़ा परपुरञ्जय़ |
९१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं मय़ा वै मुनिसत्तम |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
व्रह्मो उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं मय़ा शक्रानुपृच्छते |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यत्र ते संशय़ो विभो |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथा पुत्रो महात्मना |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२०६
व्याध उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथा मम पुराभवत् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१०२
लोमश उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथा विन्ध्यो न वर्धते |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथा शप्तो निशाकरः |
७५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३१
महेश्वर उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथा शूद्रो भवेद्द्विजः |
५८ क
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथाप्रज्ञं यथाश्रुतम् |
९४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथेच्छसि तथा कुरु |
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१४८
हनूमानु उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
३९ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि ||
८५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
१०१ क