शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
एतदाचक्ष्व मे सर्वं निखिलेन महामते ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
५६
जनमेजय़ उवाच
एतदाचक्ष्व मे सर्वं यथावृत्तं तपोधन |
११ क
वन पर्व
अध्याय
१
जनमेजय़ उवाच
एतदाचक्ष्व मे सर्वं विस्तरेण तपोधन |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
६६
शकुन्तलो उवाच
एतदाचष्ट पृष्टः सन्मम जन्म महर्षय़े |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
एतदाचष्ट मे राजन्देवर्षिर्नारदः पुरा |
४० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
एतदाज्ञाय़ वचनं सर्वांस्तानव्रवीत्तदा |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
एतदात्मनि कौरव्य दुष्कृतं विपुलस्तदा |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
३०
युधिष्ठिर उवाच
एतदात्मवतां वृत्तमेष धर्मः सनातनः |
५० क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
एतदात्महितं श्रुत्वा तस्याप्रतिमतेजसः |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१५
व्यास उवाच
एतदादाय़ ते प्राणान्प्रतिदास्यन्ति पाण्डवाः ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
एतदारण्यकं पर्व तृतीय़ं परिकीर्तितम् |
१२८ क
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
एतदार्चीकपुत्रस्य योगैर्विचरतो महीम् |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
एतदार्येण कर्तव्यं कृच्छ्रास्वापत्सु सञ्जय़ |
६२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
एतदार्येण कर्तव्यं कृच्छ्रास्वापत्सु सञ्जय़ |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
एतदालोक्यते सैन्यं क्षोभ्यमाणं किरीटिना |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
एतदालोक्यते सैन्यमावन्त्यानां महाप्रभम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
युधिष्ठिर उवाच
एतदाश्चर्यभूतं हि माहात्म्यं तस्य धीमतः |
१०२ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
एतदाश्रमवासाख्यं पूर्वोक्तं सुमहाद्भुतम् |
२१८ क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
एतदासीत्तदा राज्ञो यन्महीं पर्यपालय़त् |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
एतदाहुः परं श्रेय़ आत्मज्ञस्य जितात्मनः ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
एतदाहुर्महाप्राज्ञाः साङ्ख्यं वै मोक्षदर्शनम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
एतदाहुर्महेन्द्रस्य राज्ञो वैश्रवणस्य च |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८५
विदुर उवाच
एतदिच्छसि कृष्णाय़ सत्येनात्मानमालभे ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
३४
देवा ऊचुः
एतदिच्छाम विज्ञातुं कारणं यन्न वारिता ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
एतदिच्छाम विज्ञातुं कुतः प्राप्तोऽसि मानद |
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
ऋषय़ ऊचुः
एतदिच्छामहे श्रोतुं सर्वमेव यथातथम् ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छामि कथितं विभागस्तेषु यः स्मृतः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५५
कुशिक उवाच
एतदिच्छामि कार्त्स्न्येन सत्यं श्रोतुं तपोधन ||
८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छामि कौरव्य श्रोतुं कौतूहलं हि मे ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छामि तत्त्वेन कथ्यमानं त्वय़ानघ |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१९२
वैशम्पाय़न उवाच
एतदिच्छामि तत्त्वेन ज्ञातुं भार्गवसत्तम |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१५
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छामि तत्त्वेन त्वत्तः श्रोतुं पितामह ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२००
व्राह्मण उवाच
एतदिच्छामि तत्त्वेन धर्मं ज्ञातुं सुधार्मिक ||
५४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छामि तत्त्वेन व्याख्यातुं वै पितामह |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
एतदिच्छामि तत्त्वेन श्रोतुं किमिह दुर्लभम् ||
३१ ग
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
एतदिच्छामि देवेश श्रोतुं व्राह्मणकाम्यया |
१२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७
शल्य उवाच
एतदिच्छामि भगवन्कथ्यमानं द्विजोत्तम |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१९६
वैशम्पाय़न उवाच
एतदिच्छामि भगवन्प्रश्नं प्रश्नविदां वर |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१९४
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छामि भगवन्याथातथ्येन वेदितुम् |
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
अग्निरु उवाच
एतदिच्छामि विज्ञातुं तत्त्वतो लोकपूजित ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
२०५
व्राह्मण उवाच
एतदिच्छामि विज्ञातुं तत्त्वेन हि महामते |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छामि विज्ञातुं निखिलेन पितामह ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६०
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छामि विज्ञातुं याथातथ्येन भारत |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१९४
भगवानु उवाच
एतदिच्छाम्यहं कामं प्राप्तुं लोकहिताय़ वै ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२९४
व्राह्मण उवाच
एतदिच्छाम्यहं क्षिप्रं त्वय़ा दत्तं परन्तप |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छाम्यहं ज्ञातुं तत्त्वेन भरतर्षभ |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५२
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छाम्यहं ज्ञातुं तत्त्वेन भरतर्षभ ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२००
व्राह्मण उवाच
एतदिच्छाम्यहं ज्ञातुं तत्त्वेन वदतां वर ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९४
सञ्जय़ उवाच
एतदिच्छाम्यहं ज्ञातुं परं कौतूहलं हि मे |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२०७
युधिष्ठिर उवाच
एतदिच्छाम्यहं त्वत्तः श्रोतुं भार्गवनन्दन |
५ क