आदि पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा जरत्कारुर्दुःखशोकपराय़णः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा ततः क्रुद्धो महाय़ोगी महेश्वरः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
एतच्छ्रुत्वा ततो देवा वाक्यमुक्तं महात्मना |
९७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
ऋषभ उवाच
एतच्छ्रुत्वा ततो राजन्स राजा सावरोधनः |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा ततो राजा धृष्टद्युम्नं महारथम् |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६७
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तदा वाक्यं भीष्मेणोक्तं महात्मना |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९५
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु कौन्तेय़ः सर्वान्भ्रातॄनुपह्वरे |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु कौन्तेय़ाः शल्यविद्धा इवाभवन् |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु कौरव्यो राजा दुर्योधनस्तदा |
६६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९
शल्य उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु तक्षा स महेन्द्रवचनं तदा |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु नृपतिस्तक्षकस्य चुकोप ह |
१९३ क
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु नृपतेर्वाक्यं त्वरितमानसः |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
अग्निरु उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु पितरस्ततस्ते विज्वराभवन् |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु पुत्रस्य वचः शूरात्मजस्तदा |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु भीष्मस्य राज्ञां दध्वंसिरे तदा |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
२४७
व्यास उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु मौद्गल्यो वाक्यं विममृशे धिय़ा |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
४७
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु राजा स प्राग्दीक्षाकालमव्रवीत् |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु राजानो दुर्योधनवचस्तदा |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु राधेय़ः क्रोधादुत्फुल्ललोचनः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु राधेय़ो दुर्योधनवचो महत् |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं कृतात्मा कृतनिश्चय़ः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं गान्धार्या सहितोऽव्रवीत् |
६९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२८
मतङ्ग उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं तमुवाच पुरन्दरः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं भीष्मस्य पृतनापतेः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१०३
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं महर्षेर्भावितात्मनः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं राज्ञो भरतसत्तम |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं राधेय़स्य महात्मनः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
४९
जरत्कारुरु उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं वासुकिः पन्नगेश्वरः |
१४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं विदुरस्य युधिष्ठिरः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
युय़ुत्सुरु उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं वैश्यापुत्रेण भाषितम् |
९० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं व्यासः परमधर्मवित् |
११ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं व्यासः सत्यवतीसुतः |
४८ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं व्यासस्यामिततेजसः |
४५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं शल्यस्यामिततेजसः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं सृक्किणी परिसंलिहन् |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु विदुरं धृतराष्ट्रोऽभ्यभाषत |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु विपुलो नापश्यद्धर्मसङ्करम् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु विपुलो विषण्णवदनोऽभवत् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
१२२
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु शर्यातिर्वल्मीकं तूर्णमाद्रवत् |
२० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु सर्वेषां पाण्डवानां महात्मनाम् |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११४
नारद उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु सा कन्या गालवं वाक्यमव्रवीत् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु सा देवी नृपोत्तम सुमध्यमा |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा त्वमप्यत्र मातः कुरु यथेप्सितम् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३२
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा तय़ोर्वाक्यं तपस्युग्रेऽभ्यवर्तत |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
५१
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा दीक्षितस्तप्यमान; आस्ते होतारं चोदय़न्कर्मकाले |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा द्रुपदो यज्ञसेनः; सर्वं तत्त्वं मन्त्रविद्भ्यो निवेद्य |
५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा द्विजश्रेष्ठात्स राजा जनमेजय़ः |
१७ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा द्विजश्रेष्ठात्स राजा जनमेजय़ः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय
२४३
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा धर्मसुतः समुद्विग्नो नराधिप |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा नमस्तस्मै कृत्वासौ सह कन्यया |
३७ क