chevron_left  एतच्छ्रुत्वाarrow_drop_down
सभा पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
२३ क
सभा पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
२७ क
सभा पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
८ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
१० क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
२५ क
सभा पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्रूहि पार्थ यदि वध्यो युधिष्ठिरः ||
५६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा शमं गच्छ मा भूश्चिन्तापरो नृप |
७४ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
एतच्छ्रुत्वा शुभं वाक्यं रामस्य पितरस्तदा |
२८ क
वन पर्व
अध्याय ५२
वृहदश्व उवाच
एतच्छ्रुत्वा शुभे वुद्धिं प्रकुरुष्व यथेच्छसि ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय १९१
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा स कच्छपस्तस्मात्सरस उत्थाय़ाभ्यगच्छद्यत्र तिष्ठामो वय़ं तस्य सरसस्तीरे ||
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ३५
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा स नागेन्द्रः पितामहवचस्तदा |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ४४
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा स नागेन्द्रो वासुकिः परय़ा मुदा |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा स भगवांस्तनुर्मुनिवरोत्तमः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय १२८
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा स राजर्षिर्धर्मराजानमव्रवीत् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा सहस्राक्षः पूजय़ामास नित्यदा |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा सिन्धुराजो ध्यात्वा चिरमरिन्दम |
२१ क
वन पर्व
अध्याय १०५
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वान्तरिक्षाच्च स राजा राजसत्तम |
१ क
वन पर्व
अध्याय ६८
वृहदश्व उवाच
एतच्छ्रुत्वाश्रुपूर्णाक्षी पर्णादस्य विशां पते |
१३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
एतच्छ्रेय़ः स परमममन्यत जनार्दनः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०९
भीष्म उवाच
एतच्छ्रेय़ो नान्यदस्माद्विशिष्टं; सर्वान्धर्माननुसृत्यैतदुक्तम् ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रेय़ो हि मन्यन्ते पिता यच्छास्ति भारत |
१८ क
मौसल पर्व
अध्याय ९
व्यास उवाच
एतच्छ्रेय़ो हि वो मन्ये परमं भरतर्षभ ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
एतज्जानाम्यहं कर्तुं भर्तृसंवननं महत् |
५७ क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
एतज्जानीहि भद्रं ते दानादाने परन्तप ||
७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
एतज्जित्वा महाराज कृतकृत्यो भविष्यसि ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
एतज्ज्ञात्वा जोषमास्स्व प्रतीपं मा स्म वै कृथाः |
८२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १२
वासुदेव उवाच
एतज्ज्ञात्वा तु कौन्तेय़ कृतकृत्यो भविष्यसि ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय ६०
द्रौपद्यु उवाच
एतज्ज्ञात्वा त्वमागच्छ ततो मां नय़ सूतज ||
७ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ९७
रेणुको उवाच
एतज्ज्ञात्वा मम विभो मा क्रुधस्त्वं तपोधन ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
भीष्म उवाच
एतज्ज्ञात्वा महाराज नमस्या एव ते द्विजाः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
एतज्ज्ञात्वा महावाहो कुरु प्राप्तमरिन्दम ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
एतज्ज्ञानं च पन्थाश्च येन यान्ति मनीषिणः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
एतज्ज्ञानं विदुर्विप्रा ध्रुवमिन्द्रिय़धारणम् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय ३५
श्रीभगवानु उवाच
एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा ||
११ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २
विदुर उवाच
एतज्ज्ञानस्य सामर्थ्यं न वालैः समतामिय़ात् ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २३
युधिष्ठिर उवाच
एतज्ज्योतिरुत्तमं जीवलोके; शुक्लं प्रजानां विहितं विधात्रा |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
एतत्कथितवान्पुत्रे धृतराष्ट्रो नराधिप |
६९ क
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्कर्ता कर्म सुदुष्करं यः; कुलेन रूपेण वलेन युक्तः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय १३५
लोमश उवाच
एतत्कर्दमिलं नाम भरतस्याभिषेचनम् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
एतत्कर्म वसिष्ठस्य कथितं ते मय़ानघ |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६५
इन्द्र उवाच
एतत्कर्म व्राह्मणस्याहुरग्र्य; मन्यत्कुर्वञ्शूद्रवच्छस्त्रवध्यः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय १४८
हनूमानु उवाच
एतत्कलिय़ुगं नाम अचिराद्यत्प्रवर्तते |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३६
शम्वर उवाच
एतत्कारणमाज्ञाय़ दृष्ट्वा देवासुरं पुरा |
११ क