chevron_left  एवंarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
व्रह्मदत्त उवाच
एवं वसेह सस्नेहा यथाकालमहिंसिता |
४९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११०
नारद उवाच
एवं वहु च दीनं च व्रुवाणं गालवं तदा |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
एवं वहुगुणं सैन्यमेवं वहुविधं परम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५६
भीष्म उवाच
एवं वहुमतार्थं च तुलाधारेण भाषितम् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
एवं वहुविधं तस्य चिन्तय़ानस्य पार्थिव |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय १४७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधं तस्या निशम्य परिदेवितम् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधं तस्यां विलपन्त्यां पुनः पुनः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
जनमेजय़ उवाच
एवं वहुविधं धर्मं प्रतिवुद्धैर्निषेवितम् |
६२ क
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं वहुविधं धीमान्विललाप स लक्ष्मणः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४२
भीष्म उवाच
एवं वहुविधं भूरि विललाप स लुव्धकः |
४४ क
वन पर्व
अध्याय २९२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधं राजन्विलप्य करुणं पृथा |
२२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधं राजा विममर्श युधिष्ठिरः |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
एवं वहुविधं सान्त्वमुक्त्वा धर्मार्थहेतुमत् |
८५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
धृतराष्ट्र उवाच
एवं वहुविधं सैन्यमेवं प्रविचितं वरम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३९
व्रह्मो उवाच
एवं वहुविधः प्रोक्तः पुरुषस्ते यथाक्रमम् ||
१५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
एवं वहुविधा माय़ाः सौवलस्य कृताः कृताः |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय २६
श्रीभगवानु उवाच
एवं वहुविधा यज्ञा वितता व्रह्मणो मुखे |
३२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधा वाचः कृपणा वेदनावताम् |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
एवं वहुविधा वाचः श्रूय़न्ते स्मात्र भारत |
४१ क
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
एवं वहुविधा वाचस्तदोचुः पुरुषर्षभाः |
३६ क
सभा पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधान्देशान्विजित्य पवनात्मजः |
२४ क
सभा पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधान्देशान्विजित्य पुरुषर्षभः |
५ क
वन पर्व
अध्याय १०९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधान्भावानद्भुतान्वीक्ष्य पाण्डवः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
एवं वहुविधै रूपैश्चरामीह वसुन्धराम् |
६८ क
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
एवं वहुविधैः क्लेशैः क्लिश्यमानां च भारत |
६ क
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
एवं वहुविधैर्दुःखैः पीड्यमानामनाथवत् |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४२
भीष्म उवाच
एवं वहुविधैर्लोके धर्मद्वारैरनावृतैः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २७३
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं वहुविधैर्वाक्यैरविन्ध्यो रावणं तदा |
३२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधैर्वाक्यैर्मुनिभिस्तैस्तपोधनैः |
१ क
वन पर्व
अध्याय २९४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वहुविधैर्वाक्यैर्याच्यमानः स तु द्विजः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
एवं वहुविधैर्वाक्यैर्याच्यमानस्तय़ानघ |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं वहुविधैर्वाक्यैर्लक्ष्मणेन स राघवः |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
एवं वहुविधो ज्ञेय़ः शव्द आकाशसम्भवः ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं वहून्वर्षगणांस्तां नावं सोऽथ मत्स्यकः |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
एवं वा गर्भमज्ञाता चात्रेय़ीं योऽभिगच्छति |
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
एवं वा तपसा युक्तो व्रह्महा सवनी भवेत् |
५० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
भीष्म उवाच
एवं वाह्यतराद्वाह्यश्चातुर्वर्ण्यात्प्रसूय़ते ||
१७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
एवं वाह्वन्तरं प्राप्य तव जीवेन्न कश्चन ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७
व्यास उवाच
एवं विकृतरूपेण कथं याजितुमिच्छसि ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १७३
गन्धर्व उवाच
एवं विक्रोशमानाय़ास्तस्याः स सुनृशंसकृत् |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं विगणय़न्नेव स जगाम महोदधिम् |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं विगणय़न्नेव स मुनिर्मन्त्रपारगः |
२४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
एवं विचरतस्तस्य निघ्नतः सुवहून्नरान् |
११२ क
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
एवं विचरतस्तस्य सङ्ग्रामे राजसत्तम |
५५ क
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
एवं विचरतो राज्ञो न क्षतिर्जाय़ते क्वचित् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ६९
वृहदश्व उवाच
एवं विचार्य वहुशो वार्ष्णेय़ः पर्यचिन्तय़त् |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११८
नारद उवाच
एवं विचारय़न्तस्ते राजानः स्वर्गवासिनः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय १००
वैशम्पाय़न उवाच
एवं विचित्रवीर्यस्य क्षेत्रे द्वैपाय़नादपि |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं विचिन्त्य वहुधा भय़शोकसमन्वितः |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
एवं विचिन्तय़ानस्तु प्रविविक्षुर्ह्रदं नृपः |
२८ क