आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
एतत्सुवहुवृत्तान्तं पञ्चमं पर्व भारते |
१५१ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
एतत्सुवहुवृत्तान्तमुत्तमं चानुशासनम् |
२०४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
एतत्सुसूक्ष्मं लोकेऽस्मिन्दृश्यते प्राज्ञसंमतम् ||
१३० ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
देवदूत उवाच
एतत्स्वर्गसुखं विप्र लोका नानाविधास्तथा |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
११४
लोमश उवाच
एतत्स्वय़म्भुवो राजन्वनं रम्यं प्रकाशते |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
एतदक्षरमव्यक्तमेतत्तच्छाश्वतं महत् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
एतदक्षरमित्युक्तं क्षरतीदं यथा जगत् |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
एतदखिलमाख्यातं भारतं पर्वसङ्ग्रहात् |
२३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
एतदत्यद्भुतं कर्णे दृष्टवानस्मि भारत |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
१६
सूत उवाच
एतदत्यद्भुतं दृष्ट्वा दानवानां समुत्थितः |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
एतदत्यद्भुतं सर्वं व्राह्मणाय़ातितेजसे |
१० क
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
एतदत्र महावाहो प्राप्तकालं मतं मम |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
एतदत्र हितं मन्ये सर्वय़ादवनन्दन ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
१७८
युधिष्ठिर उवाच
एतदध्यात्मविदुषां परं कार्यं विधीय़ते ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
कपिल उवाच
एतदन्तं च मध्यं च सच्चासच्च विजानतः ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
एतदन्तरमासाद्य चोदय़ाश्वान्प्रहृष्टवत् |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
एतदन्ताः समूहा वै भविष्यन्ति महीतले ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
एतदन्ताः स्थ भरता यद्वः कृष्णा सभां गता ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
एतदन्तोऽर्जुनः शल्य निमग्नः शोकसागरे ||
५७ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
८५
विदुर उवाच
एतदन्यच्च दाशार्हः पृथिवीमपि चार्हति ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
६७
वृहदश्व उवाच
एतदन्यच्च वक्तव्यं कृपां कुर्याद्यथा मय़ि |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
श्रीभगवानु उवाच
एतदभ्यधिकं तेषां यत्ते तं प्रविशन्त्युत ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय
२०४
मार्कण्डेय़ उवाच
एतदर्थं मम प्राणा भार्या पुत्राः सुहृज्जनाः |
२२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१५
व्यास उवाच
एतदर्थं महावाहुः शक्तिमानपि पाण्डवः |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
एतदर्थं मय़ा खड्गो गृहीतो यदुनन्दन ||
११ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३३
नरनाराय़णावू ऊचतुः
एतदर्थं शुभमते पितरः पिण्डसञ्ज्ञिताः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
एतदर्थं हि जीवामि कृत्वा ज्ञातिवधं महत् |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
एतदर्थं हि हैडिम्व पुत्रानिच्छन्ति मानवाः |
४८ क
वन पर्व
अध्याय
५२
वृहदश्व उवाच
एतदर्थमहं भद्रे प्रेषितः सुरसत्तमैः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
१९७
विदुर उवाच
एतदर्थमिमौ राजन्महात्मानौ महाद्युती |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
एतदर्थ्यं च धर्म्यं च यशस्यं चैतदुत्तमम् ||
४६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
जनमेजय़ उवाच
एतदर्हसि मे वक्तुं निखिलेन द्विजर्षभ ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४८
व्राह्मण उवाच
एतदर्हा वय़ं नूनं वसामो दुर्वलस्य ये |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
एतदस्तीदमस्तीति न किञ्चित्प्रतिपद्यते ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
एतदस्त्रवलं रामे कार्तवीर्ये धनञ्जय़े |
३७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
एतदस्य परिक्षित्त्वं गर्भस्थस्य भविष्यति ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वासुदेव उवाच
एतदस्य रहस्यं वः पद्मनाभस्य धीमतः |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
एतदस्य हास्तिनपुरत्वम् ||
३६ घ
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४८
ऋषय़ ऊचुः
एतदाख्यातुमिच्छामः श्रेय़ः किमिति सत्तम ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१३
सूत उवाच
एतदाख्यानमास्तीकं यथावत्कीर्तितं मय़ा |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
१६३
वैशम्पाय़न उवाच
एतदाख्याहि मे सर्वमखिलेन धनञ्जय़ ||
७ ग
सभा पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
एतदाख्याय़ स मुनिर्नारदः सुमहातपाः |
१०२ क
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
एतदाख्याय़ सा देवी तत्रैवान्तरधीय़त |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
एतदाख्याय़ सा देवी सुमनाय़ै तपस्विनी |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
एतदाङ्गिरसाच्छ्रुत्वा वासवो वसुधामिमाम् |
९० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७
संवर्त उवाच
एतदाचक्ष्व मे तत्त्वमिच्छसे चेत्प्रिय़ं मम ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
स्यूमरश्मिरु उवाच
एतदाचक्ष्व मे व्रह्मन्यथातथ्येन पृच्छतः ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३५
जनमेजय़ उवाच
एतदाचक्ष्व मे व्रह्मन्यदि श्राव्यं हि मन्यसे ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
एतदाचक्ष्व मे शीघ्रं न हि मे शुध्यते मनः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
धृतराष्ट्र उवाच
एतदाचक्ष्व मे सर्वं कुशलो ह्यसि सञ्जय़ ||
४ ख