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स्त्री पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा नरश्रेष्ठ चिरं ध्यात्वा त्वचेतनः |
२ क
वन पर्व
अध्याय २४२
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा नृपश्रेष्ठो धार्तराष्ट्रो विशां पते |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४२
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा नृपो विद्वान्हृष्टोऽभूज्जनमेजय़ः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा पाण्डवो धर्मराजो; भ्रातुर्वाक्यं परुषं फल्गुनस्य |
१०१ क
वन पर्व
अध्याय ७२
केशिन्यु उवाच
एतच्छ्रुत्वा प्रतिवचस्तस्य दत्तं त्वय़ा किल |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय ५३
सूत उवाच
एतच्छ्रुत्वा प्रीय़माणाः समेता; ये तत्रासन्पन्नगा वीतमोहाः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
एतच्छ्रुत्वा भवानत्र प्राप्तकालं व्यवस्यताम् |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २८
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा मतङ्गस्तु दारुणं रासभीवचः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा मम वचो भवांश्चरतु मुक्तवत् |
४६ क
सभा पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा महान्नादः सभ्यानामुदतिष्ठत |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४७
नागभार्यो उवाच
एतच्छ्रुत्वा महाप्राज्ञ तत्र गन्तुं त्वमर्हसि |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा महाराज गोविन्दः प्रहसन्निव |
८५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा महाराज गौतमस्य वचस्तदा |
७१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
एतच्छ्रुत्वा महाराज धर्मे कुरु मनः सदा ||
११३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा महाराज धृतराष्ट्रोऽम्विकासुतः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा महाराज धृतराष्ट्रोऽम्विकासुतः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा महाराज भारद्वाजस्य धीमतः |
६२ क
शल्य पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा महाराज वचनं मम साम्प्रतम् |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा महावाहुः केशवः प्रहसन्निव |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा महावाहुः सहदेवो युधां पतिः |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा महावाहो कार्यद्वय़मुपस्थितम् |
१० क
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
एतच्छ्रुत्वा मुनिर्ध्यानमगमत्क्षुभितेन्द्रिय़ः |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा यथाभूतं कुरु माधव यत्क्षमम् |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचः क्रूरं धृतराष्ट्रो जनेश्वरः |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचः क्रूरं पिता देवव्रतस्तव |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य; कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटी |
३५ क
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्मादवतीर्य रथोत्तमात् |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य कारुण्याद्वहुविस्तरम् |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य केशवस्य महात्मनः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३८
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य देवर्षेरप्सरोत्तमा |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य मुनय़स्ते विधानतः |
४८ क
वन पर्व
अध्याय १४७
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य वानरेन्द्रस्य धीमतः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्या देव्याः प्रिय़चिकीर्षय़ा |
२६ क
वन पर्व
अध्याय १०१
विष्णुरु उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो देवा विष्णुना समुदाहृतम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो भीष्मः प्रहसन्वै मुहुर्मुहुः |
३९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो मह्यं कुरुध्वं हितमात्मनः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो मह्यं यत्क्षमं तत्समाचर ||
४६ ख
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राजन्कृत्वा निस्कृतिमात्मनः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राजन्महाराजो भगीरथः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय १०८
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राजा प्रातिष्ठत भगीरथः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १०८
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राजा शर्वेण समुदाहृतम् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११४
नारद उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राजा हर्यश्वः काममोहितः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राज्ञः सस्मितं मृदु वल्गु च |
३२ क
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राज्ञो गङ्गा लोकनमस्कृता |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो राज्ञो मद्रराजः प्रतापवान् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचो वाय़ोः शल्मलिर्व्रीडितस्तदा |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय १८९
व्यास उवाच
एतच्छ्रुत्वा वज्रपाणिर्वचस्तु; देवश्रेष्ठं पुनरेवेदमाह |
२८ क
वन पर्व
अध्याय १९०
मार्कण्डेय़ उवाच
एतच्छ्रुत्वा वामदेवस्य वाक्यं; स पार्थिवः सूतमुवाच रोषात् ||
७१ ख
सभा पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
७ क
सभा पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रितः |
१५ क