उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
एतेन हि तदा राजंस्तप आस्थाय़ दारुणम् |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
एतेन हि महावाहो रक्षितव्यः स पार्थिवः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०२
याज्ञवल्क्य उवाच
एतेनाधिष्ठितश्चैव सृजते संहरत्यपि ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२९७
वैशम्पाय़न उवाच
एतेनाध्यवसाय़ेन तत्तोय़मवगाढवान् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
दम्भोद्भव उवाच
एतेनापि त्वय़ा योत्स्ये युद्धार्थी ह्यहमागतः ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय
४५
अश्वत्थामो उवाच
एतेनापि निमित्तेन प्रिय़ो द्रोणस्य पाण्डवः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४४
सनत्सुजात उवाच
एतेनासौ वाल्यमत्येति विद्वा; न्मृत्युं तथा रोधय़त्यन्तकाले ||
१६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
एतेनैतन्महद्वैरं प्रसक्तं पाण्डवैः सह |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
एतेनैव च वृत्तेन महीं प्राप सुरोत्तमः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
एतेनैव प्रकारेण कृत्यानामागतिं गतिम् |
२७ क
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
एतेनैव प्रतीताः स्मो यत्त्वं मुक्तोऽद्य शत्रुभिः ||
४१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४८
व्रह्मो उवाच
एतेनैवानुमानेन मन्यन्तेऽथ मनीषिणः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
एतेनैवार्जुनं ज्ञातुमलं कौरव संय़ुगे |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
एतेभ्यश्चाप्रमत्तः स्यात्सदा यत्तो युधिष्ठिर |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
एतेभ्यश्चैव मान्धातः सततं मा प्रमादिथाः ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
एतेभ्यो नित्ययत्तः स्यान्नक्तञ्चर्यां च वर्जय़ेत् |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
एतेभ्यो यः परं व्रूय़ादसद्व्रूय़ादसंशय़म् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७७
भीष्म उवाच
एतेभ्यो वलिमादद्याद्धीनकोशो महीपतिः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५५
भीष्म उवाच
एतेभ्यो हि महाराज तपो नानशनात्परम् ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय
१
अर्जुन उवाच
एतेषां कतमो राजन्निवासस्तव रोचते |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०१
भीष्म उवाच
एतेषां कीर्तनं कृत्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
अर्जुन उवाच
एतेषां कुर्वतः पापं राष्ट्रक्षोभो हि ते भवेत् ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
एतेषां क्रिय़तां पूजा पूजार्हा हि नरेश्वराः ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३६
व्रह्मो उवाच
एतेषां गुणतत्त्वं हि वक्ष्यते हेत्वहेतुभिः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२८
व्यास उवाच
एतेषां चेदनुद्रष्टा पुरुषोऽपि सुदारुणः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
एतेषां पितरश्चैव तथैव च पितामहाः |
७६ क
आदि पर्व
अध्याय
५२
सूत उवाच
एतेषां पुत्रपौत्रास्तु प्रसवस्य च सन्ततिः |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३५
व्रह्मो उवाच
एतेषां पृथगध्यास्ते यो धर्मं संशितव्रतः |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
३१
सूत उवाच
एतेषां प्रसवो यश्च प्रसवस्य च सन्ततिः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
स्यूमरश्मिरु उवाच
एतेषां प्रेत्यभावे तु कतमः स्वर्गजित्तमः |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
एतेषां प्रेष्यतां शीघ्रमेतद्धि मम रोचते ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
एतेषां मतमाज्ञाय़ यदि वर्तेत पुत्रकः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
एतेषां यतमानानामुत्पद्यन्ते तु सम्पदः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
एतेषां यदपत्यं तु न शक्यं तदशेषतः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
एतेषां रक्षितारश्च ये स्युः कस्याञ्चिदापदि ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
एतेषां वहुसाहस्रा रथा नागा हय़ास्तथा |
६ क
विराट पर्व
अध्याय
६६
विराट उवाच
एतेषां वाहुवीर्येण यदस्माकं जय़ो मृधे |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
एतेषां विक्रय़ात्तात व्राह्मणो नरकं व्रजेत् ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
एतेषां शिष्यवर्गाश्च पुत्राश्च भरतर्षभ |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०३
याज्ञवल्क्य उवाच
एतेषां सह संवासं विवासं चैव नित्यशः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
एतेषामन्ववाय़े तु ख्यातास्ते कर्मजैर्गुणैः ||
४६ ख
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
एतेषामपि दीय़न्तां रथा ध्वजपताकिनः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
एतेषामप्यवेक्षार्थं त्रातव्यास्मि जनार्दन ||
६४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९३
दुर्योधन उवाच
एतेषामभ्युपाय़ानां यस्ते निर्दोषवान्मतः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
एतेषामवमानानामन्येषां च कुलाधम |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५७
भीष्म उवाच
एतेषामुदय़ं स्थानं क्षय़ं च पुरुषोत्तम |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
एतेषामेव जन्तूनां पत्नीत्वमुपय़ान्ति ताः ||
११० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
एतेषु कथय़न्राजन्व्राह्मणो न प्रदुष्यति ||
६३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
एतेषु तीर्थेषु तदा काशिकन्या विशां पते |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
एतेषु दक्षिणा दत्ता दावाग्नाविव दुर्हुतम् ||
२४ ख