द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
एष दुर्मुख राधेय़ो भीमेन विरथीकृतः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
एष दुर्योधनं जित्वा भ्रातृभिः सहितं रणे |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
११
व्यास उवाच
एष दुर्योधनं पुत्रं तव राजन्महानृषिः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
अर्जुन उवाच
एष दुर्योधनः कृष्ण द्रोणेन विहितामिमाम् |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
एष दुर्योधनः पार्थ रथानीकेन दंशितः |
४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
एष दुर्योधनः शेते महेष्वासो महारथः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
व्राह्मणा ऊचुः
एष दुर्योधनसखा चार्वाको नाम राक्षसः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
एष दुर्योधनो राजन्यथेच्छति तथास्तु तत् |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
एष दुर्योधनो राजा धार्तराष्ट्रः सहानुजः |
६ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
एष दुर्योधनो राजा पूज्यते त्रिदशैः सह |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
एष दुर्योधनो राजा श्वेतच्छत्रेण भास्वता |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
एष देव मय़ा प्रोक्तः स्त्रीधर्मो वचनात्तव |
५५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
एष देवः सञ्चरति सर्वत्रगतिरव्ययः ||
९६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
महेश्वर उवाच
एष देवकृतो मार्गः सेवितव्यः सदा नरैः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
एष देवगणो राजन्कीर्तितस्तेऽनुपूर्वशः |
३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
एष देवान्सहेन्द्रेण जित्वा परपुरञ्जय़ः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
एष देवि मनुष्येषु वोद्धव्यो ज्ञातिवन्धुषु ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
एष देवि मय़ा सर्वः संशय़च्छेदनाय़ ते |
६३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
एष देवि सतां धर्मो मन्तव्यो भूतिकारकः |
५६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
एष देवि सतां मार्गो वाधा यत्र न विद्यते ||
४२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
एष देवो महादेवो जगत्सृष्ट्वा चराचरम् |
१८५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
एष देवो महादेवो योऽसौ पार्थ तवाग्रतः |
९९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
पितामह उवाच
एष देवो महाय़ोगी भूतात्मा भूतभावनः ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
एष देशः सुविस्तीर्णः प्रभूतधनधान्यवान् |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
युधिष्ठिर उवाच
एष दोषः सुतान्हित्वा तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२१
नारद उवाच
एष दोषोऽभिमानेन पुरा प्राप्तो यय़ातिना |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
एष द्रोणं तथा भोजं कृतवर्माणमेव च |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
एष द्रोणः कृपः शल्यो विकर्णश्च जनार्दन |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८६
युधिष्ठिर उवाच
एष द्रोणविनाशाय़ समुत्पन्नो हुताशनात् |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
एष द्रोणश्च कर्णश्च राजा चैव सुय़ोधनः |
३६ क
विराट पर्व
अध्याय
५०
अर्जुन उवाच
एष द्रोणस्य शिष्याणां शीघ्रास्त्रः प्रथमो मतः |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
एष द्वादशवार्षिक्यामनावृष्ट्यां द्विजर्षभान् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
एष द्विजजने धर्मो गार्हस्थ्यो लोकधारणः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
१८९
मार्कण्डेय़ उवाच
एष धर्मः कृतय़ुगे त्रेताय़ां द्वापरे तथा |
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४
व्यास उवाच
एष धर्मः क्षत्रिय़ाणां प्रजानां परिपालनम् |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मः क्षत्रिय़ाणां मतमेतच्च मे सदा ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
एष धर्मः परमो यत्स्वकेन; राजा तुष्येन्न परस्वेषु गृध्येत् ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
एष धर्मः परो राजन्नलोभ इति विश्रुतः ||
८४ ख
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मः परो राजन्फलवान्प्रेत्य चेह च ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मः समुद्भूतो नाराय़णमुखात्पुनः ||
४० ख
विराट पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मपरो नित्यमानृशंस्यश्च पाण्डवः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
एष धर्मभृतां श्रेष्ठ प्रोक्तः पापो मय़ा तव |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
शल्य उवाच
एष धर्मभृतां श्रेष्ठो धर्मराजो युधिष्ठिरः |
६४ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मभृतां श्रेष्ठो भविष्यति न संशय़ः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८४
पराशर उवाच
एष धर्मविधिस्तात गृहस्थस्य प्रकीर्तितः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
एष धर्मश्च धर्मज्ञो वरदः सर्वकामदः |
७ क
विराट पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मे दमे चैव क्रोधे चापि यतव्रतः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मो जगन्नाथात्साक्षान्नाराय़णान्नृप ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय
१८७
युधिष्ठिर उवाच
एष धर्मो ध्रुवो राजंश्चरैनमविचारय़न् |
३० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मो महांस्त्यागो दानं भूतदय़ा तथा |
३१ क