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आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
लाघवं शव्दवेधित्वं दृष्ट्वा तत्परमं तदा |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
लाघवं सौष्ठवं चापि वीर्यं चैव महात्मनः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय १२४
वैशम्पाय़न उवाच
लाघवं सौष्ठवं शोभां स्थिरत्वं दृढमुष्टिताम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
लाघवात्पाण्डुपुत्रस्य व्यस्मय़न्त परे जनाः ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४
नारद उवाच
लाघवादाकुलीकृत्य कर्णः प्रहरतां वरः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
लाघवाद्द्विजमुख्यस्य सात्वतस्य च मारिष |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
लाघवाद्वञ्चय़ामास महाकाय़ो घटोत्कचः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
लाघवाद्व्यंसय़ामास गदां हेमविभूषिताम् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
लाघवाद्व्यंसय़ामास सौभद्रः परवीरहा ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४९
प्रजापतिरु उवाच
लाघवार्थं धरण्यास्तु ततः संहार इष्यते ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
लाघवेनाथ चरतः सर्वे ते सुवलात्मजाः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४८
शौनक उवाच
लाङ्गलाशनिकल्पो वा भवत्यन्यः परन्तप ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
लाङ्गूलचालनं क्ष्वेडः प्रतिरावो विवर्तनम् |
७१ क
वन पर्व
अध्याय १४६
वैशम्पाय़न उवाच
लाङ्गूलेनोर्ध्वगतिना ध्वजेनेव विराजितम् ||
६७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
भीष्म उवाच
लाजान्तरमुपासीत प्राप्तशुल्का पतिं वृतम् ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
लाजैर्गन्धैस्तथा माल्यैः कन्याभिश्चाभिनन्दितः ||
६३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
लाजैश्च गन्धैश्च तथा वितानै; रभ्यर्चितं धूपनधूपितं च |
३२ क
वन पर्व
अध्याय २४३
वैशम्पाय़न उवाच
लाजैश्चन्दनचूर्णैश्चाप्यवकीर्य जनास्तदा |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
लाजोल्लापिकधूमाढ्यमुच्चप्राकारतोरणम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
लाडय़न्निव राजानं भगदत्तमय़ोधय़त् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
लाभं ग्राम्यसुखादन्यं रतितो नानुपश्यति ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १५९
गन्धर्व उवाच
लाभं लव्धुमलव्धं हि लव्धं च परिरक्षितुम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६९
भीष्म उवाच
लाभं साधारणं नेच्छेन्न भुञ्जीताभिपूजितः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
लाभं साधारणं नेच्छेन्न भुञ्जीताभिपूजितः |
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४९
युधिष्ठिर उवाच
लाभकालेऽप्रय़त्नेन लभते विपुलं धनम् |
२ ख
वन पर्व
अध्याय २९७
युधिष्ठिर उवाच
लाभानां श्रेष्ठमारोग्यं सुखानां तुष्टिरुत्तमा ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय २९७
यक्ष उवाच
लाभानामुत्तमं किं स्वित्किं सुखानां तथोत्तमम् ||
५२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १९
व्राह्मण उवाच
लाभालाभे प्रिय़द्वेष्ये यः समः स च मुच्यते ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
लाभालाभौ प्रिय़द्वेष्यौ यथैनं न जरान्तकौ |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
लाभालाभौ सुखं दुःखं कामक्रोधौ भवाभवौ |
८३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५२
भीष्म उवाच
लाभालाभौ सुखदुःखे च तात; प्रिय़ाप्रिय़े मरणं जीवितं च |
३१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
लाभे न च प्रहृष्येत नालाभे विमना भवेत् ||
२७ ख
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
लाभे न हर्षय़ेद्यस्तु न व्यथेद्योऽवमानितः |
३१ क
वन पर्व
अध्याय २८८
कुन्त्यु उवाच
लाभो ममैष राजेन्द्र यद्वै पूजय़ती द्विजान् |
४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
लालप्यतां वहुविधं पुत्राणां नाकरोद्वचः ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय १३६
भरद्वाज उवाच
लालप्यमानं तं दृष्ट्वा मुनय़ः पुनरार्तवत् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
लालप्यमानं तमृषिं मन्दपालं तथा वने |
७ क
आदि पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
लालप्यमानमेकैकं जरितां च पुनः पुनः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ९७
वैशम्पाय़न उवाच
लालप्यमानां तामेवं कृपणां पुत्रगृद्धिनीम् |
२३ क
स्त्री पर्व
अध्याय २१
गान्धार्यु उवाच
लालप्यमानाः करुणं रुदतीं पतितां भुवि ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
लालाट्यो नारदश्चैव तथा कूर्चमुखः स्मृतः |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
लालिता निगृहीता च स्त्री श्रीर्भवति भारत ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
लालिता सततं राज्ञा धर्मज्ञा धर्मदर्शिनी ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४४
भीष्म उवाच
लालिताहं त्वय़ा नित्यं वहुमानाच्च सान्त्विता |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
लालितैः सततं राज्ञा दुर्योधनहितैषिभिः ||
४९ ख
सभा पर्व
अध्याय ६३
द्रौपद्यु उवाच
लालितो दासपुत्रत्वं पश्यन्नश्येद्धि भारत ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
लावणस्य समुद्रस्य विष्कम्भो द्विगुणः स्मृतः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
लावणेन समुद्रेण समन्तात्परिवारितः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
भीष्म उवाच
लिखन्त्येव तु केषाञ्चिदपरेषां शनैरपि |
५१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
लिङ्गं पूजय़िता नित्यं महतीं श्रिय़मश्नुते ||
९४ ख