वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
एष विन्ध्यो महाशैलः पय़ोष्णी च समुद्रगा |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२१७
मार्कण्डेय़ उवाच
एष वीराष्टकः प्रोक्तः स्कन्दमातृगणोद्भवः |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६९
भीष्म उवाच
एष वीरो महेष्वासः कृती च निपुणश्च ह |
३ क
विराट पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
एष वीरो महेष्वासः सर्वशस्त्रभृतां वरः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
एष वीर्यवतां श्रेष्ठो भविष्यत्यपराजितः ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५
कर्ण उवाच
एष वुद्धिमतां चैव श्रेष्ठो राजन्गुरुश्च ते ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
महेश्वर उवाच
एष वृत्रो महाञ्शक्र वलेन महता वृतः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
एष वृद्धः पुरा लोकान्सम्प्राप्नोति तनुत्यजाम् |
१० क
विराट पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
एष वृद्धाननाथांश्च व्यङ्गान्पङ्गूंश्च मानवान् |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
एष वृष्णिप्रवीराणाममर्षी जितसाध्वसः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
एष वृष्णिप्रवीरेण ध्मातः सलिलजो भृशम् |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
एष वृष्णिवरो वीरः सात्यकिः सत्यकर्मकृत् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
भीष्म उवाच
एष वेगेन गत्वा हि यत्र ते दानवाधमाः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
एष वेदनिधिः श्रीमानेष वै तपसो निधिः |
७४ क
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
एष वै चमसोद्भेदो यत्र दृश्या सरस्वती |
५ क
सभा पर्व
अध्याय
६३
द्रौपद्यु उवाच
एष वै दासपुत्रेति प्रतिविन्ध्यं तमागतम् ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
एष वै परमो धर्मो धर्मविद्भिरुदाहृतः ||
५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
एष वै पार्षतो वीरो भारद्वाजेन सङ्गतः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
एष वै भगवान्देवः सङ्ग्रामे याति तेऽग्रतः |
१०० क
वन पर्व
अध्याय
७७
वृहदश्व उवाच
एष वै मम संन्यासस्तव राज्यं तु पुष्कर ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
एष वै यस्त्वय़ा पृष्टस्तेन तेषां प्रकीर्तितः |
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१७८
सर्प उवाच
एष वै राजशार्दूल विधिः क्षेत्रज्ञभावनः ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
८३
नारद उवाच
एष वै लोमशो नाम देवर्षिरमितद्युतिः |
१०६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
एष वै विक्रिय़ापन्नः सृजत्यात्मानमात्मना |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
एष वै समवाय़स्ते ऋषिदेवसमन्वितः |
४० क
सभा पर्व
अध्याय
६९
विदुर उवाच
एष वै सर्वकल्याणः समाधिस्तव भारत |
११ क
विराट पर्व
अध्याय
५०
अर्जुन उवाच
एष वैकर्तनः कर्णो विदितः पूर्वमेव ते ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
एष वैकर्तनः कर्णो हैडिम्वेन समागतः |
९ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२१
गान्धार्यु उवाच
एष वैकर्तनः शेते महेष्वासो महारथः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
एष वैश्वानर इव समिद्धः स्वेन तेजसा |
४४ क
विराट पर्व
अध्याय
४८
अर्जुन उवाच
एष व्यवस्थितो द्रोणो द्रौणिश्च तदनन्तरम् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
एष व्यूहामि ते राजन्व्यूहं परमदुर्जय़म् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७१
भीष्म उवाच
एष व्रह्मप्रविष्टोऽहं ग्रीष्मे शीतमिव ह्रदम् |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
वसिष्ठ उवाच
एष व्रह्मा च विष्णुश्च शिवश्चैव जगत्प्रभुः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
वैशम्पाय़न उवाच
एष व्रह्मा लोकगुरुः सर्वलोकपितामहः |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
कुण्डधार उवाच
एष शक्तोऽसि तपसा राज्यं दातुं धनानि च ||
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
एष शक्र इवाजेय़ो यशस्ते प्रथय़िष्यति ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
एष शक्रः परिवृतो देवैरृषिगणैस्तथा |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१२१
लोमश उवाच
एष शर्यातिय़ज्ञस्य देशस्तात प्रकाशते |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
एष शल्यो रथोपस्थे रश्मिसञ्चारकोविदः |
६ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२३
गान्धार्यु उवाच
एष शल्यो हतः शेते साक्षान्नकुलमातुलः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
एष शाकुनिकः शेते तव वासं समाश्रितः |
१५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२३
गान्धार्यु उवाच
एष शान्तनवः शेते माधवाप्रतिमो युधि ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय
५०
अर्जुन उवाच
एष शान्तनवो भीष्मः सर्वेषां नः पितामहः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
एष शान्तनवो भीष्मः सेनय़ोरन्तरे स्थितः |
३२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८२
अर्जुन उवाच
एष शान्तनवो भीष्मो निहतः सव्यसाचिना |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैश्रवण उवाच
एष शापो मय़ा प्राप्तः प्राक्तस्मादृषिसत्तमात् |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
एष शिष्यः सखा चैव तव सत्यपराक्रमः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
एष शीलवतां चापि शीलज्ञाननिधिः परः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
एष शूरश्च वीरश्च क्रोधनश्च वृकोदरः |
१८ क