सभा पर्व
अध्याय
१५
युधिष्ठिर उवाच
भीमार्जुनावुभौ नेत्रे मनो मन्ये जनार्दनम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१२०
वासुदेव उवाच
भीमार्जुनौ चातिरथौ यमौ वा; तथैव कृष्णा द्रुपदात्मजेय़म् ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनौ नय़ेतां हि देवानपि परां गतिम् ||
८० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३५
कुन्त्यु उवाच
भीमार्जुनौ नय़ेतां हि देवानपि परां गतिम् ||
२० ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनौ परित्यज्य यत्र त्वं भ्रातरावुभौ |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनौ पुरोधाय़ यदा तौ रणमूर्धनि |
४ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनौ यमौ चैव द्रौपदी च यशस्विनी |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनौ यमौ चैव स्थितौ ते नृप शासने |
९ क
वन पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनय़मांश्चापि तदर्हं प्रत्यपद्यत ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनय़मान्दृष्ट्वा सैन्यानां सय़ुधिष्ठिरान् ||
२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनय़माश्चैव कच्चिदेतेऽपि सान्त्विताः ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनय़माश्चैव द्रौपदी च यशस्विनी ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
भीमार्जुनय़मैश्चापि सहितः कृष्णमव्रवीत् ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
भीमाश्च मत्तमातङ्गाः प्रभिन्नकरटामुखाः |
२६ क
विराट पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमाश्च मत्तमातङ्गास्तोमराङ्कुशचोदिताः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
भीमाय़ाकथय़त्प्रीत्या वैदर्भ्या जननी नृप ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
भीमे जीवति दुर्धर्षे विजय़े चापलाय़िनि ||
८८ ख
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमेन कार्तवीर्येण वैन्येन नहुषेण च |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
कृप उवाच
भीमेन गिरिवर्ष्माणं मालवस्येन्द्रवर्मणः ||
११५ ग
सभा पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमेन च ततोऽपश्यत्स्वसारं प्रीतिमान्पितुः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमेन च नरश्रेष्ठ यमाभ्यां च महीपते ||
१८ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
भीमेन च महाराज स पपात हतो भुवि ||
११ ग
शल्य पर्व
अध्याय
७
धृतराष्ट्र उवाच
भीमेन च महावाहुः पुत्रो दुर्योधनो मम ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
भीमेन चक्ररक्षाभ्यामश्वत्थाम्ना कृपेण च ||
३४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
भीमेन प्रहितं चापि शरं कनकभूषणम् |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय
५८
शकुनिरु उवाच
भीमेन राजन्दय़ितेन दीव्य; यत्कैतव्यं पाण्डव तेऽवशिष्टम् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
भीमेन वचनात्तस्य धर्मराजस्य कौरव ||
६९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमेन समरे राजन्गजेन्द्रेणेव सर्वतः |
७९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमो गाण्डीवधन्वा च यमौ सात्यकिरेव च |
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमो जग्राह केशेषु माल्यवत्सु सुगन्धिषु ||
४७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
११०
धृतराष्ट्र उवाच
भीमो धनञ्जय़ान्वेषी कस्तमर्छेज्जिजीविषुः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
भीमो नाम क्षितिपतिश्चातुर्वर्ण्यस्य रक्षिता ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
भीमो भीमवलो राजंस्तव दुर्मन्त्रितेन ह ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
भीमो भीष्मवधाकान्ष्की सौमदत्तिं महारथम् |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
भीमो युधिष्ठिरश्चैव माद्रीपुत्रौ च पृष्ठतः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१३३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमो वा वलिनां श्रेष्ठः कौन्तेय़ो वा धनञ्जय़ः |
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
धृतराष्ट्र उवाच
भीमो वा वलिनां श्रेष्ठो राक्षसो वा घटोत्कचः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
धृतराष्ट्र उवाच
भीमो वा सूततनय़ं प्रत्युद्यातः कथं रणे |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
धृतराष्ट्र उवाच
भीमो वा सूतपुत्रेण स्मरन्वैरं पुरा कृतम् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
भीमो व्यधमदभ्रान्तो गदापाणिर्महाहवे ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
भीमो ह्येष दुराधर्षो विद्रावय़ति मे वलम् ||
१८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
भीमोग्रपरिघालातशूलपट्टिशपाणय़ः |
४८ ख
विराट पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमोऽथ प्रथमं गत्वा रात्रौ छन्न उपाविशत् |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
भीमोऽथ सात्वतस्यार्थे वाह्लीकं नवभिः शरैः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
भीमोऽपि महतीं गृह्य गदां हेमपरिष्कृताम् |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
भीमोऽपि सात्यकेर्वाहं समारुह्य नरर्षभः |
८५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
भीमोऽपि सुमहावाहुर्गदापाणिरदृश्यत ||
३३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
भीमोऽप्यतिवलः सैन्यं धार्तराष्ट्रं व्यपोथय़त् ||
७ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
भीमोऽप्यथैनं सहसा विनद्य; प्रत्युद्ययौ गदय़ा तर्जमानः |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
भीमोऽभवन्महाशव्दो वज्रपर्वतय़ोरिव ||
४० ख