आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
एष धर्मो महाञ्शक्र चिन्त्यमानोऽधिगम्यते ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३०
महेश्वर उवाच
एष धर्मो मय़ा देवि वानप्रस्थाश्रितः शुभः |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
एष धर्मो मय़ा प्रोक्तो विधात्रा स्वय़मीरितः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
१८७
मार्कण्डेय़ उवाच
एष धाता विधाता च संहर्ता चैव सात्वतः |
५३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
युधिष्ठिर उवाच
एष धाता विधाता च सिद्धिरत्र प्रतिष्ठिता |
३६ क
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
एष धारय़िता सम्यक्चातुर्वर्ण्यं महावलः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
एष ध्यानपथः पूर्वो मय़ा समनुवर्णितः ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
एष नः शत्रुरत्यन्तं पार्थिवाः सात्वतीसुतः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
एष नः समय़स्तात तारय़ेम परस्परम् |
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८७
युधिष्ठिर उवाच
एष नः समय़ो राजन्रत्नस्य सहभोजनम् |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
एष नाथो हि जगतो भवतां च मय़ा सह |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
एष नाराय़णः कृष्णः फल्गुनस्तु नरः स्मृतः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
एष नार्थविहीनेन शक्यो राजन्निषेवितुम् |
४६ क
विराट पर्व
अध्याय
१७
द्रौपद्यु उवाच
एष निष्कसहस्राणि प्रदाय़ ददतां वरः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
एष नैव रथः पूर्णो नाप्येवातिरथो नृप |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
एष नैषादिरभ्येति द्विपमुख्येन पाण्डवम् |
७० क
सभा पर्व
अध्याय
६७
शकुनिरु उवाच
एष नो ग्लह एवैको वनवासाय़ पाण्डवाः |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
युधिष्ठिर उवाच
एष नो विजय़े मूलमेष तात विपर्यये |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
८८
यय़ातिरु उवाच
एष नो विरजाः पन्था दृश्यते देवसद्मनः ||
१५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१४
धृतराष्ट्र उवाच
एष न्यासो मय़ा दत्तः सर्वेषां वो युधिष्ठिरः |
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
एष पञ्चविधो धर्मो वहुशाखः सुखोदय़ः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
एष पञ्चसमाहारः शरीरमिति नैकधा |
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
एष पञ्चसु भूतेषु चतुष्टय़विधिः स्मृतः |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
२९
सूत उवाच
एष पत्रं त्यजाम्येकं यस्यान्तं नोपलप्स्यसे |
२० क
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
एष पन्था विदर्भाणामय़ं गच्छति कोसलान् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
एष पन्थाः कुरुश्रेष्ठ सौगन्धिकवनाय़ ते |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय
९२
स्त्र्यु उवाच
एष पर्याय़वासो मे वसूनां संनिधौ कृतः |
५५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
एष पाञ्चालराजस्य पुत्रो द्रोणेन सङ्गतः |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
राजो उवाच
एष पाणिरपूर्वं भो निक्षेपार्थं प्रसारितः |
१११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
एष पाण्डव ते भ्राता धार्तराष्ट्रैर्महावलैः |
२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
एष पाण्डव ते भ्राता पुत्रशोकमपारय़न् |
२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
एष पाण्डुर्महेष्वासः कुन्त्या माद्र्या च सङ्गतः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
एष पाण्डुसुतस्तात कृष्णेन सहितो वली |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
एष पाण्डुसुतस्तात श्वेताश्वः कृष्णसारथिः |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
एष पाण्डुसुतो ज्येष्ठो जित्वा मातुल मामकान् |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
एष पाण्डुसुतो वीरः कृष्णेन सहितो वली |
३७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
एष पारे समुद्रस्य हिरण्यपुरमारुजत् |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
एष पार्थ महान्स्वादुः पशुमान्नित्यमम्वुमान् |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
एष पार्थ महारौद्रो वर्तते भरतक्षय़ः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
एष पार्थवधाय़ाहं स्वय़ं गच्छामि संय़ुगे |
५४ ख
वन पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
एष पार्थो महातेजा हिमवत्पृष्ठमाश्रितः |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
१२५
विदुर उवाच
एष पार्थो महाराज फल्गुनः पाण्डुनन्दनः |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
एष पार्थो रणे क्रुद्धः पाण्डवानां महारथः |
५१ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
एष पुत्रस्य ते पुत्रः कुरुराजो भविष्यति |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
नारद उवाच
एष पुत्रो महाप्राज्ञो वरुणस्येह गोपतेः |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
एष पुत्रो महेन्द्रस्य कुरूणामेष रक्षिता ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०६
सुपर्ण उवाच
एष पूर्वो दिशाभागो विशावैनं यदीच्छसि ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
एष पैतामहो वंशः पाण्डुना पुनरुद्धृतः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
५६
वृहदश्व उवाच
एष पौरजनः सर्वो द्वारि तिष्ठति कार्यवान् ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
एष प्रकृतिरव्यक्ता कर्ता चैव सनातनः |
२३ क