chevron_left  एतस्मिन्नेवarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु दाशार्हो विकिरञ्शरान् |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४२
भीष्म उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु दिव्या काचिद्वराङ्गना |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११९
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु देवकस्य महात्मनः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु देवर्षिर्नारदस्तदा |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८३
पराशर उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु देवा देववरं शिवम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
वसिष्ठ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु देवाः शक्रपुरोगमाः |
५४ क
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु देवी दाक्षाय़णी शुभा |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु दैत्या आसन्महावलाः |
१४२ क
वन पर्व
अध्याय २८२
मार्कण्डेय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु द्युमत्सेनो महावने |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु द्रुतं गच्छति भास्करे |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु द्रुपदस्यात्मजो वली |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु द्रुपदो वै महीपतिः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु द्रोणः शस्त्रभृतां वरः |
४४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८६
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु द्वादशीं माघपाक्षिकीम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु धृतराष्ट्रस्य वै सखा |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु नैमिषे पार्थिवर्षभान् |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु पाण्डवः कृष्णसारथिः |
७४ क
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु पुराणावृषिसत्तमौ |
११ क
वन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु प्रगृहीतशिलाय़ुधाः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु प्रतीपः क्षत्रिय़र्षभः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु प्रववर्षाथ वासवः |
९० क
आदि पर्व
अध्याय १५
सूत उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु भगिन्यौ ते तपोधन |
१ क
सभा पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु भीमसेनोऽपि वीर्यवान् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु भीष्मः शान्तनवः पुनः |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु भीष्मकस्य महात्मनः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु माधवोऽर्जुनमव्रवीत् |
४० क
उद्योग पर्व
अध्याय ११९
नारद उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु मृगचर्याक्रमागताम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय २०५
व्याध उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु मृगय़ां निर्गतो नृपः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय ८
सूत उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु मेनकाय़ां प्रजज्ञिवान् |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु रथादाप्लुत्य भारत |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७७
भीष्म उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु वसिष्ठमृषिसत्तमम् |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६५
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु वासुदेवोऽपि वीर्यवान् |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु विजय़ः शत्रुतापनः |
१२८ क
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु विरोधे देवदानवैः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु वृद्धक्षत्रो महीपतिः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय १३९
लोमश उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु वृहद्द्युम्नो महीपतिः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८९
युधिष्ठिर उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु स राजा वभ्रुवाहनः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु सखा दशरथस्य वै |
१९ क
वन पर्व
अध्याय १९५
मार्कण्डेय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु सभृत्यवलवाहनः |
१० क
वन पर्व
अध्याय १६२
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु सर्ववादित्रनिस्वनः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु सूर्येऽस्तमुपगच्छति |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु सोऽच्युताय़ुर्महारथः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३९
व्यास उवाच
एतस्मिन्नेव कृत्ये वै वर्तते वुद्धिरुत्तमा ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
एतस्मिन्नेव चार्थेय़मिन्द्रगीता युधिष्ठिर |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्वर्तमानस्य विधौ विप्रनिषेविते |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्वर्तमानस्य विधौ विप्रनिषेविते |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
एतस्य कर्ता लोकेऽस्मिन्नान्यः कश्चन विद्यते ||
३७ ग
वन पर्व
अध्याय २५४
द्रौपद्यु उवाच
एतस्य कर्माण्यतिमानुषाणि; भीमेति शव्दोऽस्य गतः पृथिव्याम् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
एतस्य तद्रथानीकं कथय़न्ति रणप्रिय़ाः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय १६०
गन्धर्व उवाच
एतस्य तपती नाम वभूवासदृशी सुता ||
६ ख