शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं पराशरसुतः प्रभुः |
५७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं प्रहृष्टो; ननाद चोच्चै रुधिरार्द्रगात्रः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं प्रातिष्ठत शकुन्तला |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं भीष्मस्तद्गतमानसः |
६४ क
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं मुखं प्रच्छाद्य वाससा |
६४ क
वन पर्व
अध्याय
१०३
लोमश उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं मैत्रावरुणिरच्युतः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं वाष्पव्याकुललोचनः |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
युय़ुत्सुरु उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं विदुरः सर्वधर्मवित् |
९२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
एतावदुक्त्वा वचनं विरराम जनाधिपः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
एतावदुक्त्वा वचनमदृश्यः पुरुषोत्तमः |
४९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
एतावदुक्त्वा वचनमनुज्ञाप्य च पार्थिवम् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१३४
लोमश उवाच
एतावदुक्त्वा विरराम वन्दी; श्लोकस्यार्धं व्याजहाराष्टवक्रः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
एतावदुक्त्वा शैनेय़ आचार्यं परिवर्जय़न् |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
एतावदुक्त्वा शैनेय़ो जलसन्धं महोरसि |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
एतावदुक्त्वा स तदा तूष्णीमासीद्भृगूद्वहः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१७८
युधिष्ठिर उवाच
एतावदुच्यतां चोक्तं सर्वं पन्नगसत्तम ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
एतावदेतत्कथितं मय़ा ते; तथ्यं महाराज यथार्थतत्त्वम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
एतावदेतद्विज्ञानमेतदस्ति च नास्ति च |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
एतावदेव तत्त्वानां साङ्ख्यमाहुर्मनीषिणः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
५१
युधिष्ठिर उवाच
एतावदेव निर्वृत्तमस्माकं शोकवर्धनम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
३२
युधिष्ठिर उवाच
एतावदेव पर्याप्तमुपमानं शुचिस्मिते |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
एतावदेव पुरुषैः कार्यं हृदय़तोषणम् |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
एतावदेव वक्तव्यं नातो भूय़ोऽस्ति किञ्चन |
६० क
वन पर्व
अध्याय
५३
नल उवाच
एतावदेव विवुधा यथावृत्तमुदाहृतम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
एतावदेव शक्यं तु तस्मिन्द्वीपे प्रभाषितुम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
एतावदेव श्रोतव्यं शाकद्वीपे महौजसि ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
एतावद्देविकामाहुः पुण्यां देवर्षिसेविताम् ||
११५ ख
वन पर्व
अध्याय
२३२
युधिष्ठिर उवाच
एतावद्धि मय़ा शक्यं सन्देष्टुं वै वृकोदर |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
एतावन्ति त्वरिष्टानि विदित्वा मानवोऽऽत्मवान् |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
५४
युधिष्ठिर उवाच
एतावन्त्येव दासानां सहस्राण्युत सन्ति मे |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५०
भीष्म उवाच
एतावन्मात्रमेतद्धि भूतानां प्राज्ञलक्षणम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
८४
यय़ातिरु उवाच
एतावन्मे विदितं राजसिंह; ततो भ्रष्टोऽहं नन्दनात्क्षीणपुण्यः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
एतावहं युधि वा पातय़िष्ये; मां वा कृष्णौ निहनिष्यतोऽद्य |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
८०
भीष्म उवाच
एतावाञ्ज्ञानविषय़ः किं प्रलापः करिष्यति ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
एतावाञ्ज्ञानविषय़ः किं प्रलापः करिष्यति ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
एतावानत्र दोषो हि नान्यः कश्चन पार्थिव |
७६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
एतावानात्मविजय़ः पञ्चवर्गविनिग्रहः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३९
व्यास उवाच
एतावानिन्द्रिय़ग्रामो व्याख्यातः पाञ्चभौतिकः ||
११ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२०
गान्धार्यु उवाच
एतावानिह संवासो विहितस्ते मय़ा सह |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
१५०
कुन्त्यु उवाच
एतावानेव पुरुषः कृतं यस्मिन्न नश्यति ||
१३ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१३१
कुन्त्यु उवाच
एतावानेव पुरुषो यदमर्षी यदक्षमी |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
एतावानेव वेदेषु निश्चय़ः कविभिः कृतः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
एतावान्पुरुषस्तात कृतं यस्मिन्न नश्यति |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
३२
युधिष्ठिर उवाच
एतावान्मन्यते वालो मोहमन्यत्र गच्छति ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
एतावावां सर्वसैन्यैर्व्यूढैः सम्यगुदाय़ुधैः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२०४
मार्कण्डेय़ उवाच
एतावेवाग्नय़ो मह्यं यान्वदन्ति मनीषिणः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
एताश्चान्याश्च दीप्ताक्ष्यः करभोत्कटमूर्धजाः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
एताश्चान्याश्च नद्योऽहं पृथिव्यां या नरोत्तम |
९६ क
वन पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
एताश्चान्याश्च ननृतुस्तत्र तत्र वराङ्गनाः |
३१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
एताश्चान्याश्च परुषा वाचः स समुदीरय़न् |
१७ क