शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
श्रीभगवानु उवाच
एवं ज्ञात्वा तमात्मानं पूजय़ावः सनातनम् ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
एवं ज्ञात्वा महाराज व्येतु ते भीर्धनञ्जय़े ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
एवं ज्ञात्वा महावाहो व्यूहं व्यूह यथेच्छसि ||
२६ ग
आदि पर्व
अध्याय
७२
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ज्ञात्वा विजानीहि यद्व्रवीमि तपोधन |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
एवं ज्ञात्वा व्यवसितं भीष्मस्यामिततेजसः |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
एवं ज्येष्ठोऽप्यथोत्सिक्तो न राज्यमभिजाय़ते |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३९
व्रह्मो उवाच
एवं ज्योतिःषु सर्वेषु विवर्तन्ते गुणास्त्रय़ः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
एवं तं निहतं सङ्ख्ये ददृशे सैनिको जनः ||
५३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
एवं तं विरथं कृत्वा कर्णो राजन्व्यकत्थत |
८० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
एवं तत्त्रिपुरं दग्धं दानवाश्चाप्यशेषतः |
१२१ क
वन पर्व
अध्याय
२४३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तत्राव्रुवन्केचिद्वातिकास्तं नरेश्वरम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय
२७९
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं तत्राश्रमे तेषां तदा निवसतां सताम् |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
एवं तदभवद्युद्धं घोररूपमसंवृतम् |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
एवं तदभवद्युद्धं तदा भरतसत्तम |
३६ क
शल्य पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तदभवद्युद्धं तुमुलं जनमेजय़ |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
एवं तदभवद्युद्धं त्वदीय़ानां परैः सह ||
३२ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
एवं तदभवद्युद्धं दिवसं भरतर्षभ |
७२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
एवं तदभवद्युद्धमहान्यष्टादश प्रभो |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तदा नरव्याघ्र धर्मो न ह्रसते क्वचित् ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९८
युधिष्ठिर उवाच
एवं तदा प्रय़ाचन्तं भास्करं मुनिसत्तमः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११
भीष्म उवाच
एवं तदा श्रीरभिभाष्यमाणा; देव्या समक्षं गरुडध्वजस्य |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
एवं तद्राक्षसस्याङ्गं छिन्नं छिन्नं व्यरोहत ||
६० ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तद्व्राह्मणैः क्षत्रं क्षत्रिय़ासु तपस्विभिः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८
शल्य उवाच
एवं तव दुरात्मानः शत्रवः शत्रुसूदन |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
सौदास उवाच
एवं तव प्रपश्यामि श्रेय़ो भृगुकुलोद्वह |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१९६
द्रोण उवाच
एवं तव महाराज तेषु पुत्रेषु चैव ह |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
५३
नल उवाच
एवं तव महावाहो दोषो न भवितेति ह ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
एवं तव वलं सर्वं हैडिम्वेन दुरात्मना |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५
शल्य उवाच
एवं तव वशे प्रीता भविष्यामीति तं वद ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
राजो उवाच
एवं तवोग्रं हि तप उपदेशेन नाशितम् |
५४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
एवं तस्मिन्महाराज कल्पिते रथसत्तमे |
७७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३०
भीष्म उवाच
एवं तस्मै वरं दत्त्वा वासवोऽन्तरधीय़त |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
एवं तस्य गुणान्प्रीतो वहुशोऽकथय़त्प्रभुः |
१४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८४
पराशर उवाच
एवं तस्य प्रवृत्तस्य नित्यमेवानुपश्यतः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१६५
गन्धर्व उवाच
एवं तस्यां तदा पर्थ धर्षिताय़ां महामुनिः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
एवं तस्याग्रे पूर्वमर्धं वदेत; गवां दाता विधिवत्पूर्वदृष्टम् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं तस्यै वरं दत्त्वा धर्मराजः प्रतापवान् |
५९ क
आदि पर्व
अध्याय
२०४
नारद उवाच
एवं तस्यै वरं दत्त्वा सर्वलोकपितामहः |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
एवं ता भीरु रोत्स्यन्ति निहतज्ञातिवान्धवाः |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९३
वसिष्ठ उवाच
एवं तां क्षपय़ित्वा हि जाय़ते नृपसत्तम |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
एवं तां दर्शय़न्कृष्णो युद्धभूमिं किरीटिने |
५९ क
आदि पर्व
अध्याय
१६०
गन्धर्व उवाच
एवं तां स महीपालो वभाषे न तु सा तदा |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
एवं तान्मनसि स्थाप्य दधतुः प्राणय़ोर्मनः ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
एवं तान्वादिनः शूरान्द्रौपदेय़ा महारथाः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४५
भीष्म उवाच
एवं तामनुनीय़ाहं मातरं जनमेव च |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४२
भीष्म उवाच
एवं तीव्रतपाश्चाहं कष्टश्चाय़ं परिग्रहः ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४८
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तु कृतमिच्छामि त्वय़ार्याद्य प्रिय़ं मम |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
एवं तु तीर्थप्रवरं पृथिव्यां; प्रभासनात्तस्य ततः प्रभासः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
एवं तु मनसा राजन्पार्थः सम्पूज्य कौरवम् |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
एवं तु वचनं श्रुत्वा नारदस्य समीरणः |
५ क