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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
एते चान्ये महीपाला योधास्तव च पाण्डव |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय ३८
वृहन्नडो उवाच
एते चित्राः क्रिय़ोपेताः सहदेवस्य धीमतः ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
एते चेदेवमिच्छन्ति कृतकार्यो युधिष्ठिरः ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
भीष्म उवाच
एते चैवापरे चैव दोषाः प्रादुर्भवन्त्युत |
६० क
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
एते जनपदा राजन्दक्षिणं पक्षमाश्रिताः ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
एते जिघृक्षवो यान्ति द्विपाश्वरथपत्तय़ः |
६ क
विराट पर्व
अध्याय ३८
वृहन्नडो उवाच
एते ज्वलन्तः सङ्ग्रामे तेजसा शीघ्रगामिनः |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय ५२
सूत उवाच
एते तक्षकजा नागाः प्रविष्टा हव्यवाहनम् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
एते तस्य सुता राजन्राजर्षेर्भूरितेजसः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
एते तु कीर्तिता मुख्या यैराख्यानमिदं ततम् ||
१०६ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
एते तु निय़माः सर्वे कर्तव्याः शरदो दश |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
एते तु रौद्रा वहवो महारथा; यशस्विनः शूरतमाः कृतास्त्राः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
एते तु सप्त पुरुषा नानाविर्याः पृथक्पृथक् |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७७
भरद्वाज उवाच
एते ते धातवः पञ्च व्रह्मा यानसृजत्पुरा |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
एते ते निरय़ाः प्रोक्ताः सर्व एव यथातथम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
एते त्रय़ोदशाकाराः पृथक्सत्यैकलक्षणाः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
एते त्वदनुकम्पय़ा गुणवन्तो वत्साः प्रभूततरं फेनमुद्गिरन्ति |
४९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
एते त्वां कुरवः सर्वे द्वीपमासाद्य संय़ुगे |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
एते त्वामनुय़ास्यन्ति पत्तिभिर्वहुभिर्वृताः ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
एते त्वामनुय़ास्यन्ति पत्तीनामय़ुतानि षट् ||
८६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
एते दुर्वारणा नाम काम्वोजा यदि ते श्रुताः ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७७
भीष्म उवाच
एते देवसमा राजन्व्राह्मणानां भवन्त्युत ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय ७५
दमय़न्त्यु उवाच
एते देवास्त्रय़ः कृत्स्नं त्रैलोक्यं धारय़न्ति वै |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १०३
कण्व उवाच
एते देवास्त्वय़ा केन हेतुना शक्यमीक्षितुम् ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
एते देवि महाभोगाः प्राणिनो दानशीलिनः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
एते देशा महाराज देवगन्धर्वसेविताः ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
एते देय़ा व्युष्टिमन्तो लघूपाय़ाश्च भारत |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
एते दोषाः शरीरेषु दृश्यन्ते सर्वदेहिनाम् ||
५४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
एते द्रवन्ति पाञ्चाला वध्यमानाः शितैः शरैः |
९१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
एते द्रवन्ति पाञ्चालाः कर्णात्त्रस्ता जनार्दन ||
३ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
एते द्रवन्ति पाञ्चालाः पाण्डवाश्च ससैनिकाः ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
एते द्रवन्ति पाञ्चालाः सिंहस्येव भय़ान्मृगाः ||
४५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
एते द्रवन्ति रथिनस्त्वदीय़ाः पाण्डुनन्दन |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
एते द्रवन्ति राजानो भीमसेनभय़ार्दिताः |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
एते द्रवन्ति समरे धार्तराष्ट्रा महारथाः |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५४
भीम उवाच
एते द्रवन्ति स्म रथाश्वनागाः; पदातिसङ्घानवमर्दय़न्तः |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
शल्य उवाच
एते द्रुपदपुत्राश्च धृष्टद्युम्नपुरोगमाः |
६७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
व्रह्मो उवाच
एते द्रुमाणां राजानो लोकेऽस्मिन्नात्र संशय़ः ||
३ ग
सभा पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
एते द्रोणादय़श्चैव वृद्धा धर्मविदो जनाः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
एते धर्मस्य वेत्तारः कृतज्ञाः सततं प्रभो |
२०९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६५
इन्द्र उवाच
एते धर्माः सर्ववर्णाश्च वीरै; रुत्क्रष्टव्याः क्षत्रिय़ैरेष धर्मः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
एते धावन्ति सगणाः संशप्तकमहारथाः |
८० क
सभा पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
एते न किञ्चिदप्याहुश्चोद्यमानापि कृष्णय़ा |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
एते नदन्ति कौरव्या दृष्ट्वा कर्णस्य विक्रमम् |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
एते नदन्ति पाञ्चाला धमन्त्यपि च वारिजान् |
६२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
एते नदन्ति संहृष्टाः पाण्डवा जितकाशिनः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
एते नव महात्मानः पश्चिमामाश्रिता दिशम् ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
एते नश्यन्ति कुरवो दुर्योधनकृतेन वै |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
एते नश्यन्ति कुरवो मन्दाः कालवशं गताः ||
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय ४१
पितर ऊचुः
एते नस्तन्तवस्तात कालेन परिभक्षिताः ||
२३ ख