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वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
एते निदेशं तव पालय़न्ति; तिष्ठन्ति यत्रेच्छसि तत्र राजन् ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय १७४
वैशम्पाय़न उवाच
एते निवासाः सततं वभूवु; र्निशानिशं प्राप्य नरर्षभाणाम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०२
भीष्म उवाच
एते निय़ुद्धकुशला दाक्षिणात्यासिचर्मिणः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
एते पञ्च गुणा भूमेर्विज्ञेय़ा द्विजसत्तमाः ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
एते पञ्च गुणा राजन्महाभूतेषु पञ्चसु |
७ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
एते पञ्च महाभागा गन्धर्वाः पावकप्रभाः |
११ क
सभा पर्व
अध्याय १९
वासुदेव उवाच
एते पञ्च महाशृङ्गाः पर्वताः शीतलद्रुमाः |
३ क
वन पर्व
अध्याय २०२
व्याध उवाच
एते पञ्चदश व्रह्मन्गुणा भूतेषु पञ्चसु |
८ क
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
एते परिवृताः स्त्रीभिर्गन्धर्वैश्च पृथक्पृथक् |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
व्रह्मो उवाच
एते पर्वतराजानो गणानां मरुतस्तथा ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
एते पश्चादवर्तन्त धार्तराष्ट्रपुरोगमाः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
एते पापकृतस्तात चरन्ति पृथिवीमिमाम् |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
भीष्म उवाच
एते पापस्य कर्तारस्तमस्यन्धेऽथ शेरते ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
एते पुरोगमा भूत्वा धृष्टद्युम्नस्य संय़ुगे |
६७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
एते पूर्वर्षिभिर्दृष्टाः प्रोक्ता निरय़गामिनः |
८१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
एते प्रजानां पतय़ः समुद्दिष्टा यशस्विनः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
एते प्रतिदिशं सर्वे कीर्तितास्तिग्मतेजसः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९९
नारद उवाच
एते प्रदेशमात्रेण मय़ोक्ता गरुडात्मजाः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
एते प्रदेशाः कथिता भुवनानां प्रभावनाः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०२
याज्ञवल्क्य उवाच
एते प्रधानस्य गुणास्त्रय़ः पुरुषसत्तम |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५७
भीष्म उवाच
एते प्रमत्तं पुरुषमप्रमत्ता नुदन्ति हि |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७
अगस्त्य उवाच
एते प्रमाणं भवत उताहो नेति वासव |
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
सञ्जय़ उवाच
एते प्रशमने योगा महास्त्रस्य परन्तप |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय ३१
सूत उवाच
एते प्राधान्यतो नागाः कीर्तिता द्विजसत्तम |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६९
भीष्म उवाच
एते प्राधान्यतो राजन्पाण्डवस्य महात्मनः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
सनत्सुजात उवाच
एते प्राप्ताः षण्नरान्पापधर्मा; न्प्रकुर्वते नोत सन्तः सुदुर्गे ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
एते भारत मातङ्गाः कर्णेनाभिहता रणे |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
गुरुरु उवाच
एते भावा जगत्सर्वं वहन्ति सचराचरम् |
३४ क
विराट पर्व
अध्याय ३८
वृहन्नडो उवाच
एते भीमस्य निशिता रिपुक्षय़कराः शराः ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३९
वासुदेव उवाच
एते भूमिचरा देवा वाग्विषाः सुप्रसादकाः ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
भीष्म उवाच
एते भोगैरलङ्कारैरन्यैश्चैव किमिच्छकैः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
भीष्म उवाच
एते मतिमतां श्रेष्ठ वर्णसङ्करजाः प्रभो ||
११ ग
विराट पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
एते मत्स्यानुपागम्य विराटस्य महीपतेः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
एते मदावलिप्तानामेत एव सतां दमाः ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
एते मद्राधिपरथं पालय़न्तः स्थिता रणे ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८०
भीष्म उवाच
एते महर्त्विजस्तात सर्वे मान्या यथातथम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८१
पराशर उवाच
एते महर्षय़ः स्तुत्वा विष्णुमृग्भिः समाहिताः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
एते महारथाः शूरा धार्तराष्ट्रा महावलाः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
एते महारथाः सर्वे द्वितीय़े निर्ययुर्वले ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय १६८
अर्जुन उवाच
एते मय़ा महाघोराः सङ्ग्रामाः पर्युपासिताः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
एते योगविदो मुख्याः साङ्ख्यधर्मविदस्तथा |
६६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६३
भीष्म उवाच
एते योत्स्यन्ति समरे संस्मरन्तः पुरा कृतम् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
एते योनिफला देवि स्थानभागनिदर्शकाः |
५२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
एते रक्षन्ति राजानं सूतपुत्रेण रक्षिताः |
५ ख
वन पर्व
अध्याय २३२
युधिष्ठिर उवाच
एते रथा नरव्याघ्राः सर्वशस्त्रसमन्विताः |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६९
भीष्म उवाच
एते रथाश्चातिरथाश्च तुभ्यं; यथाप्रधानं नृप कीर्तिता मय़ा |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
एते रथाश्वद्विरदैः पत्तिभिश्चोग्रविक्रमैः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
एते रथास्ते सङ्ख्यातास्तथैवातिरथा नृप |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
एते रथैः परिवृता वीर्यवन्तो महावलाः |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
एते राजर्षय़ः पुण्याः कीर्तिमन्तो वहुश्रुताः |
२५ क