सभा पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स तान्सर्वान्दीक्षितः पाण्डवाग्रजः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स दुःखार्तो विरराम जनाधिपः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा गुरुवर्ती गुरुप्रिय़ः |
९४ क
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा जरत्कारुर्महानृषिः |
३९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७१
युधिष्ठिर उवाच
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा भ्रातरं सव्यसाचिनम् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
१५८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा भ्राता भ्रातरमच्युतम् |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा वाक्यं तदभिपूज्य च |
५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा विदुरं धर्मवित्तमम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
एवमुक्त्वा स नागेन्द्रो वभूवाङ्गुष्ठमात्रकः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स नृपतिः प्रविवेश रसातलम् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२८
मतङ्ग उवाच
एवमुक्त्वा स पितरं प्रतस्थे कृतनिश्चय़ः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स भगवांस्तत्रैवान्तरधीय़त |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
पराशर उवाच
एवमुक्त्वा स भगवांस्तत्रैवान्तरधीय़त |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स भगवान्कुरूणां प्रपितामहः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा स भगवान्दिवमाचक्रमे प्रभुः |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा स भगवान्मरुद्गणवृतः प्रभुः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
२४७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स भगवान्व्यासः पाण्डवनन्दनम् |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा स भगवान्सर्वान्देवगणान्पुरा |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
एवमुक्त्वा स भगवान्सूर्यकोटिसमप्रभः |
१९६ क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
एवमुक्त्वा स मां राजन्नाश्लिष्य च पुनः पुनः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स राजर्षिस्तामनिन्दितगामिनीम् |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स राजानं धर्मात्मानं युधिष्ठिरम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४८
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा स राजानमिन्द्रोतो जनमेजय़म् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
२३८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा स राजेन्द्र सस्वनं प्ररुरोद ह |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
एवमुक्त्वा स राजेन्द्रो ग्रीवाय़ां संनिवेश्य ह |
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा स वामेन पदा मौलिमुपास्पृशत् |
५ क
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
एवमुक्त्वा सटास्तस्य पञ्च चक्रे वृकोदरः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा सत्यभामा विरराम यशस्विनी |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
एवमुक्त्वा सम्प्रय़ातो दिवं स; विभ्राजन्वै श्रीमता दर्शनेन |
८१ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा सरिच्छ्रेष्ठामूचुस्तेऽथ परस्परम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२८६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा सहस्रांशुः सहसान्तरधीय़त |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१६२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा सहस्राक्षः कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
१०९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा सुदुःखार्तो जीवितात्स व्ययुज्यत |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय
११०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा सुदुःखार्तो निःश्वासपरमो नृपः |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा सुदुःखार्तो निशश्वास स पार्थिवः |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा सुसङ्क्रुद्धः सोमदत्तो महावलः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१४०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा हिडिम्वां स हिडिम्वो लोहितेक्षणः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं स्वय़मात्मानमात्मना |
५५ क
मौसल पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशः प्रविवेश पुनर्गृहान् |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशः शीघ्रमश्वानचोदय़त् |
५२ क
मौसल पर्व
अध्याय
७
वसुदेव उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशो मामचिन्त्यपराक्रमः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
एवमुक्त्वा हय़शिरास्तत्रैवान्तरधीय़त |
८६ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वानवेक्ष्यैनां यय़ौ धर्मसुतो नृपः |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वानुजग्मुस्तान्पाण्डवांस्ते समेत्य च |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वापलाय़न्त सर्वे भारत पार्थिवाः |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वाभिवाद्याथ तमृषिं लोकपूजितम् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
८३
नारद उवाच
एवमुक्त्वाभ्यनुज्ञाप्य पुलस्त्यो भगवानृषिः |
९६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वार्करश्म्याभं सुपर्वाणं शरोत्तमम् |
४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वार्जुनं राजा त्रिभिर्मर्मातिगैः शरैः |
१ क