द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु देवेशो जय़द्रथमथाव्रवीत् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तु दैत्येन्द्रो वलिरिन्द्रेण भारत |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
२०९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु धर्मात्मा व्राह्मणः शुभकर्मकृत् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
३६
सूत उवाच
एवमुक्तस्तु धर्मात्मा शौनकः प्राहसत्तदा |
५ क
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
एवमुक्तस्तु धर्मात्मा सत्यसन्धो युधिष्ठिरः |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु धौम्येन तत्कालसदृशं वचः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५
शल्य उवाच
एवमुक्तस्तु नहुषः प्राहृष्यत तदा किल |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
एवमुक्तस्तु नृपतिः स्वमेव भवनं यय़ौ |
३० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६
व्यास उवाच
एवमुक्तस्तु नृपतिर्मरुत्तो व्रीडितोऽभवत् |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु पार्थेन कृष्णद्वैपाय़नस्तदा |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु पार्थेन केशवः परवीरहा |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु पार्थेन केशवः प्रत्युवाच तम् |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु पार्थेन धृष्टद्युम्नो महारथः |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु पार्थेन शिखण्डी भरतर्षभ |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु पार्थेन शिखण्डी भरतर्षभ |
८४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु पार्थेन शिरसा भूमिमस्पृशत् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु पार्थेन सात्यकिः परवीरहा |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु पृथय़ा स विप्रो भार्यया सह |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु भगवान्धूमकेतुर्हुताशनः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तु भगवान्प्रत्युवाच पितामहः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तु भगवान्प्रत्युवाचाथ तं नृपम् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु भीमेन राक्षसः कालचोदितः |
३७ क
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु भीमेन स्मितं कृत्वा प्लवङ्गमः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु भीमेन हनूमान्प्लवगर्षभः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु भीष्मेण धर्मराजो युधिष्ठिरः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२४१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु भीष्मेण धार्तराष्ट्रो जनेश्वरः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
भृगुरु उवाच
एवमुक्तस्तु भृगुणा मैत्रावरुणिरव्ययः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तु मार्जारो मूषकेणात्मनो हितम् |
९४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तु मुनिना स शूद्रोऽचिन्तय़न्नृप |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु राजा स तथ्यमित्येव जज्ञिवान् |
२४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु राजेन्द्र केशिहा दुःखमूर्छितः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु राज्ञा स धृतराष्ट्रेण धीमता |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६
व्यास उवाच
एवमुक्तस्तु राज्ञा स नारदः प्रत्युवाच ह |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु राज्ञा स विदुरो वुद्धिसत्तमः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु राधेय़ः प्रहसन्भरतर्षभ |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु राधेय़स्तव पुत्रेण मारिष |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु राधेय़ो युद्धात्कर्णो न्यवर्तत |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३
नारद उवाच
एवमुक्तस्तु रामेण न्याय़ेनोपजगाम सः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु विदुरः प्राप्य राजनिवेशनम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु विदुरो धीमान्स्वजनवत्सलः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२०१
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्तस्तु विप्रेण धर्मव्याधो युधिष्ठिर |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
एवमुक्तस्तु विप्रेण स राजा प्रत्युवाच ह |
१८२ क
वन पर्व
अध्याय
१०४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु विप्रेन्द्रो धर्मराज्ञा महात्मना |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु विमनास्तिर्यग्दृष्टिरधोमुखः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
५२
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्तु वैदर्भ्या नलस्तां प्रत्युवाच ह |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
५३
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्तु वैदर्भ्या नलस्तां प्रत्युवाच ह |
५ क
वन पर्व
अध्याय
५३
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्तु वैदर्भ्या नलो राजा विशां पते |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
५५
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्तु शक्रेण कलिः कोपसमन्वितः |
५ क
वन पर्व
अध्याय
५१
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्तु शक्रेण नारदः प्रत्यभाषत |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
नारद उवाच
एवमुक्तस्तु शक्रेण वज्रः परपुरञ्जय़ः |
२९ क