chevron_left  भागिनेय़ान्निजांस्त्यक्त्वाarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय १६२
भीष्म उवाच
भागिनेय़ान्निजांस्त्यक्त्वा शल्यस्ते रथसत्तमः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
भागिनेय़ान्वय़स्यांश्च तथा सम्वन्धिवान्धवान् |
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
भागीरथी च मे माता रणमध्यं प्रपेदिरे ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय १४५
वैशम्पाय़न उवाच
भागीरथीं सुतीर्थां च शीतामलजलां शिवाम् |
४० क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
भागीरथीमल्पजलां शन्तनुर्दृष्टवान्नृपः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १३५
लोमश उवाच
भागीरथ्यां तत्र सेतुं वालुकाभिश्चकार सः ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
भागोऽवशिष्ट एकोऽय़ं मम शल्यो महारथः ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
भागोऽवशिष्टः कर्णस्य तव चैव महाद्युते |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
भाग्यं नक्षत्रमाक्रम्य सूर्यपुत्रेण पीड्यते |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
भाग्यहीनस्य कालेन यथा मे नीय़से वलात् ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
भाग्योपनतकामस्य भार्येवोपस्थिताभवत् |
४० क
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
भाङ्गास्वरिः सुनीथश्च निषधोऽथ त्विषीरथः |
१५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
भाजनानि च लौहानि पात्रीश्च विविधा नृप |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
भाण्डं समारोपय़तां चरतां सम्प्रधावताम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८७
भीष्म उवाच
भाण्डागाराय़ुधागारं प्रय़त्नेनाभिवर्धय़ेत् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
भाण्डागाराय़ुधागारान्धान्यागारांश्च सर्वशः |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
भाण्डीपुष्पनिकाशेन तपनीय़निभेन च |
२१ क
वन पर्व
अध्याय २१८
मार्कण्डेय़ उवाच
भाति दीप्तवपुः श्रीमान्रक्ताभ्राभ्यामिवांशुमान् ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
भानुदेवं चित्रसेनं सेनाविन्दुं च भारत |
३७ क
वन पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
भानुप्रभृतिभिश्चैनान्विशिनष्टि च केशवः ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
भानुमद्भिः शिलाधौतैर्भानोः प्रच्छादय़त्प्रभाम् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
भानुमद्भिः शिलाधौतैर्भानोः प्रच्छादय़त्प्रभाम् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
भानुमन्तं महाघोषं सर्वभूतमनोहरम् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
भानुमन्तः सुरगणास्तस्थुर्विगतकल्मषाः ||
४५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
भानुमन्तमभिप्रेक्ष्य प्राद्रवत्पुरुषर्षभः ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
भानुमन्तमिवोद्यन्तं तमो घ्नन्तं सहस्रशः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
भानुमन्ति विचित्राणि शिखराणि महागिरेः |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
भानुमन्ति विचित्राणि सूपसेव्यानि भागशः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
भानुमांस्तु ततो भीमं शरवर्षेण छादय़न् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय २१०
मार्कण्डेय़ उवाच
भानुरङ्गिरसो वीरः पुत्रो वर्चस्य सौभरः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
गृध्र उवाच
भानुर्यावन्न यात्यस्तं यावच्च विमला दिशः |
९३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
भानोरिव महावाहो ग्रीष्मकाले मरीचय़ः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय २११
मार्कण्डेय़ उवाच
भानोर्भार्या सुप्रजा तु वृहद्भासा तु सोमजा |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
भीष्म उवाच
भाभिरप्रतिमं भाति त्रैलोक्यमवभासय़त् ||
१२ ग
विराट पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
भारं वापि गुरुं हर्तुं कुञ्जरं वा प्रमर्दितुम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
भारं स वहते तस्य ग्रन्थस्यार्थं न वेत्ति यः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय १९
वासुदेव उवाच
भारं हि मय़ि संन्यस्य यातो मधुनिहा हरिः |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय ४४
कृप उवाच
भारं हि रथकारस्य न व्यवस्यन्ति पण्डिताः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १०६
वैशम्पाय़न उवाच
भारतं सह भार्याभ्यां वाणखड्गधनुर्धरम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
भारतस्य वपुर्ह्येतत्सत्यं चामृतमेव च |
२०१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११
धृतराष्ट्र उवाच
भारतस्यास्य वर्षस्य तथा हैमवतस्य च |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १
ऋषय़ ऊचुः
भारतस्येतिहासस्य पुण्यां ग्रन्थार्थसंय़ुताम् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
भारतस्येतिहासस्य श्रूय़तां पर्वसङ्ग्रहः ||
३३ ख
सभा पर्व
अध्याय ६४
अर्जुन उवाच
भारताः प्रतिजल्पन्ति सदा तूत्तमपूरुषाः ||
८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
भारताचार्यपुत्रः सन्मानितः सर्वय़ादवैः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
भारताध्ययनात्पुण्यादपि पादमधीय़तः |
१९१ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
भारताध्ययनात्पुण्यादपि पादमधीय़तः |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
भारतानां महज्जन्म महाभारतमुच्यते |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
भारतानां महज्जन्म शृण्वतामनसूय़ताम् |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
भारतानां महद्युद्धं यथाभूल्लोमहर्षणम् ||
१० ख