शान्ति पर्व
अध्याय
१९८
मनुरु उवाच
एवं प्रकृतितः सर्वे प्रभवन्ति शरीरिणः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४८
शौनक उवाच
एवं प्रकृतिभूतानां सर्वसंसर्गय़ाय़िनाम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१००
लोमश उवाच
एवं प्रक्षीय़माणाश्च मानवा मनुजेश्वर |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
एवं प्रजविताश्वानि भ्रान्तनागरथानि च |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
एवं प्रजापतिः पूर्वमाराध्य वहुभिः स्तवैः |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३७
व्यास उवाच
एवं प्रज्ञानतृप्तस्य निर्भय़स्य मनीषिणः |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रज्ञानय़वलं क्रिय़ोपाय़समन्वितम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
एवं प्रज्ञावता वुद्ध्या दुर्वलेन महावलाः |
१९२ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रणिहितं भीम चिरात्प्रभृति मे मनः |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
१८७
देव उवाच
एवं प्रणिहितः सम्यङ्मय़ात्मा मुनिसत्तम |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
२२१
जरितो उवाच
एवं प्रतिकृतं मन्ये ज्वलतः कृष्णवर्त्मनः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७१
पितर ऊचुः
एवं प्रतिज्ञा सत्येय़ं तवानघ भविष्यति |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
एवं प्रतिष्ठाप्य धनञ्जय़ो मां; ततोऽर्थवद्धर्मवच्चापि वाक्यम् |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रतीचीं नकुलो दिशं वरुणपालिताम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
एवं प्रत्येकशः सर्वं यद्यदस्य विधीय़ते ||
२७ ग
आदि पर्व
अध्याय
८४
यय़ातिरु उवाच
एवं प्रधार्यात्महिते निविष्टो; यो वर्तते स विजानाति जीवन् ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रमुदितं सर्वं पशुगोधनधान्यतः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रमुदितः पार्थः कृष्णेन सहितस्तदा |
३६ क
सभा पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रलम्भान्विविधान्प्राप्य तत्र विशां पते |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
एवं प्रवर्तमानस्य वृत्तिं प्रणिहितात्मनः |
५८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२५
श्रीभगवानु उवाच
एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तय़तीह यः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
एवं प्रवर्तिते धर्मे पुरा सुचरितेऽनघ |
३३ क
विराट पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रववृते युद्धं भारद्वाजकिरीटिनोः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
१००
लोमश उवाच
एवं प्रवृत्तान्दैत्यांस्तांस्तापसेषु तपस्विषु ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
एवं प्रवृत्ते सङ्ग्रामे गजवाजिजनक्षय़े |
५९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१९
नमुचिरु उवाच
एवं प्रवृद्धं प्रणुदेन्मनोजं; सन्तापमाय़ासकरं शरीरात् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९
युधिष्ठिर उवाच
एवं प्राज्ञान्सतश्चापि महतः शास्त्रवित्तमान् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
एवं प्राप्ततमं कालं यो मोहान्नाववुध्यते |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
एवं प्राप्तो महत्कृच्छ्रमृषिः स नृपसत्तम |
६० क
वन पर्व
अध्याय
२८७
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्राप्स्यसि कल्याणि कल्याणमनघे ध्रुवम् |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रीतो भविष्यामि धर्मान्वक्ष्यामि चानघ ||
२ ख
मौसल पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं प्रय़तमानानां वृष्णीनामन्धकैः सह |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२८
व्यास उवाच
एवं भवति निर्द्वन्द्वो व्रह्माणं चाधिगच्छति ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६५
भीष्म उवाच
एवं भवति पापात्मा धर्मात्मानं तु मे शृणु |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं भवतु गच्छेति तमुवाच पितामहः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
श्रीरु उवाच
एवं भवतु भद्रं वः पूजितास्मि सुखप्रदाः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
आप ऊचुः
एवं भवतु लोकेश यथा वदसि नः प्रभो |
५० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३
नहुष उवाच
एवं भवतु सुश्रोणि यथा मामभिभाषसे |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७८
वसिष्ठ उवाच
एवं भवत्विति विभुर्लोकांस्तारय़तेति च ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
४६
भीष्म उवाच
एवं भवत्सु व्राह्मण्यं व्रह्मास्त्रं च प्रतिष्ठितम् ||
७ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
देव्यु उवाच
एवं भविष्यत्यमरप्रभाव; नाहं मृषा जातु वदे कदाचित् |
७ क
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
एवं भानुमय़ं ह्यन्नं भूतानां प्राणधारणम् |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
एवं भित्त्वा महेष्वासः पाण्डवानामनीकिनीम् |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
एवं भीमं समादिश्य स्वरथे समुपाविशत् |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७
अगस्त्य उवाच
एवं भ्रष्टो दुरात्मा स देवराज्यादरिन्दम |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
एवं मत्वा महाराज शास्त्रार्थमभिगम्य च |
१९९ क
विराट पर्व
अध्याय
१२
जनमेजय़ उवाच
एवं मत्स्यस्य नगरे वसन्तस्तत्र पाण्डवाः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९९
याज्ञवल्क्य उवाच
एवं मनःप्रधानानि इन्द्रिय़ाणि विभावय़ेत् ||
१७ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
एवं मनुष्यमप्येकं गुणैरपि समन्वितम् |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
भीष्म उवाच
एवं मन्यस्व सततमन्यथा मा विचिन्तय़ ||
१०० ख