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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
एषा तृतीय़ा जिज्ञासा तव राजन्कृता मय़ा |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय ११९
भीष्म उवाच
एषा ते नैष्ठिकी वुद्धिः प्रज्ञा चाभिहिता मय़ा |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय ३०
दुर्योधन उवाच
एषा ते पृथिवी राजन्भुङ्क्ष्वैनां विगतज्वरः ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय १३१
श्येन उवाच
एषा ते भास्वरी कीर्तिर्लोकानभिभविष्यति ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
एषा ते राष्ट्रवृत्तिश्च राष्ट्रगुप्तिश्च भारत |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
एषा ते व्यक्ततो राजन्विभूतिरनुवर्णिता |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
एषा तेऽभिहिता साङ्ख्ये वुद्धिर्योगे त्विमां शृणु |
३९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
एषा तेऽस्तु मतिर्नित्यं धर्मे ते रमतां मनः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
एषा तेऽऽन्वीक्षिकी विद्या चतुर्थी साम्पराय़िकी ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
एषा त्रय़ी पुराणानामुत्तमानां च शाश्वती ||
६१ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १०७
सुपर्ण उवाच
एषा दिक्सा द्विजश्रेष्ठ यां सर्वः प्रतिपद्यते |
७ क
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
एषा देवनदी पुण्या कौशिकी भरतर्षभ |
१ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
एषा देवनदी पुण्या पार्थ त्रैलोक्यपावनी |
२६ क
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
एषा द्वादशसाहस्री युगाख्या परिकीर्तिता ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
भीष्म उवाच
एषा नीतिगतिस्तात लक्ष्मीश्चैव सनातनी ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय ६६
अर्जुन उवाच
एषा पद्मपलाशाक्षी सुमध्या चारुहासिनी |
८ क
वन पर्व
अध्याय २६३
मार्कण्डेय़ उवाच
एषा पम्पा शिवजला हंसकारण्डवाय़ुता |
४० क
सभा पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
एषा पाञ्चालराजस्य सुतैषा श्रीरनुत्तमा |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
एषा पूर्वतरा वृत्तिर्व्राह्मणस्य विधीय़ते |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
एषा पूर्वतरा वृत्तिर्व्राह्मणस्य विधीय़ते |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३०
व्यास उवाच
एषा पूर्वतरा वृत्तिर्व्राह्मणस्य विधीय़ते |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३४
व्यास उवाच
एषा पूर्वतरैः सद्भिराचीर्णा परमर्षिभिः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय १३५
लोमश उवाच
एषा प्रकाशते गङ्गा युधिष्ठिर महानदी ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
एषा प्रथमतो वृत्तिर्द्वितीय़ां शृणु भारत |
१ क
वन पर्व
अध्याय ९७
लोमश उवाच
एषा भागीरथी पुण्या यथेष्टमवगाह्यताम् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय १३५
लोमश उवाच
एषा मधुविला राजन्समङ्गा सम्प्रकाशते |
१ क
वन पर्व
अध्याय १७७
युधिष्ठिर उवाच
एषा मम मतिः सर्प यथा वा मन्यते भवान् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय १९३
दुर्योधन उवाच
एषा मम मतिस्तात निग्रहाय़ प्रवर्तते |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
एषा माता पिता चैव जगतः पृथिवीपते |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७३
व्रह्मो उवाच
एषा मे दक्षिणा प्रोक्ता समासेन महाद्युते ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८७
राम उवाच
एषा मे परमा शक्तिरेतन्मे परमं वलम् |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९४
सञ्जय़ उवाच
एषा मे परमा शक्तिरेतन्मे परमं वलम् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५२
धृतराष्ट्र उवाच
एषा मे परमा शान्तिर्यया शाम्यति मे मनः |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय ९
नारद उवाच
एषा मय़ा सम्पतता वारुणी भरतर्षभ |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
एषा यजनभूमिर्हि देवानामपि सत्कृता |
७७ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
एषा यद्व्रवीति तदुपहरस्वेति ||
९८ 5
वन पर्व
अध्याय १३०
लोमश उवाच
एषा रम्या विपाशा च नदी परमपावनी ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
एषा विदीर्यते राजन्वहुधा भारती चमूः |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
एषा विदीर्यते सेना धार्तराष्ट्री समन्ततः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय ६५
सुदेव उवाच
एषा विरहिता तेन शोभनापि न शोभते ||
१८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २०
गान्धार्यु उवाच
एषा विराटदुहिता स्नुषा गाण्डीवधन्वनः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
एषा वुद्धिः समस्तानां चातुर्वर्ण्ये निदर्शिता ||
११६ ग
वन पर्व
अध्याय २५१
कोटिकाश्य उवाच
एषा वै द्रौपदी कृष्णा राजपुत्री यशस्विनी |
५ क
आदि पर्व
अध्याय ३३
सूत उवाच
एषा वै नैष्ठिकी वुद्धिः सर्वेषामेव संमता |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
एषा वै युध्यमानानां शूराणामनिवर्तिनाम् |
६३ क
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
एषा व्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति |
७२ क
वन पर्व
अध्याय १२९
लोमश उवाच
एषा शम्येकपत्रा सा शरकं चैतदुत्तमम् |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
एषा सभा मय़ा राजन्दृष्टा पुष्करमालिनी |
२६ क
वन पर्व
अध्याय १३०
लोमश उवाच
एषा सरस्वती पुण्या दिव्या चोघवती नदी |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
उमो उवाच
एषा सरस्वती पुण्या नदीनामुत्तमा नदी |
१५ क