शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
एताश्चान्याश्च वहवो मातरो भरतर्षभ |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
एताश्चान्याश्च वह्वीः स यमस्य विषय़ं गतः |
८२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३६
व्यास उवाच
एताश्चान्याश्च विविधा दीक्षास्तेषां मनीषिणाम् ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
एताश्चान्याश्च विविधाः शल्यभूता जनाधिपः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
एताश्चान्याश्च वै वह्व्यः प्रनृत्ताप्सरसः शुभाः |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय
९
नारद उवाच
एताश्चान्याश्च सरितस्तीर्थानि च सरांसि च ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
एताश्चेष्टाः क्षत्रिय़ाणां राजन्संसिद्धिकारिकाः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
एतासां तनय़ाश्चापि कृषिय़ोगमुपासते ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
एतासां वीर्यसम्पन्नं पुत्रपौत्रमनन्तकम् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२१७
मार्कण्डेय़ उवाच
एतासां वीर्यसम्पन्नः शिशुर्नामातिदारुणः |
१० क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
एतास्तु द्रुपदं वृद्धं स्नुषा भार्याश्च दुःखिताः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
२०९
वर्गो उवाच
एतास्तु मम वै सख्यश्चतस्रोऽन्या जले स्थिताः |
२० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
एतास्तु सीमन्तशिरोरुहा याः; शुक्लोत्तरीय़ा नरराजपत्न्यः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
८३
नारद उवाच
एते ऋषिवराः सर्वे त्वत्प्रतीक्षास्तपोधनाः |
१०५ क
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
एते कनखला राजनृषीणां दय़िता नगाः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८१
भीष्म उवाच
एते कर्माणि कुर्वन्ति स्पर्धमाना मिथः सदा |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
११४
लोमश उवाच
एते कलिङ्गाः कौन्तेय़ यत्र वैतरणी नदी |
४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
७
विदुर उवाच
एते कालस्य निधय़ो नैताञ्जानन्ति दुर्वुधाः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
एते कुण्डले गुर्वर्थं मे भिक्षिते दातुमर्हसीति ||
११७ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
एते कुण्डले तक्षको नागराजः प्रार्थय़ति |
११९ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
एते कुण्डले प्रतिगृह्णातु भवानिति ||
१५९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
अग्निरु उवाच
एते कुरुकुलश्रेष्ठ महाय़ोगेश्वराः स्मृताः ||
२० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१४७
सञ्जय़ उवाच
एते कौरव सङ्क्रन्दे शैनेय़ं पर्यवारय़न् ||
१२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१९
युधिष्ठिर उवाच
एते क्रिय़ावतां लोका ये श्मशानानि भेजिरे ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
एते क्रुद्धा महेष्वासाः पाण्डवानां महारथाः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
७७
भीष्म उवाच
एते क्षत्रसमा राजन्व्राह्मणानां भवन्त्युत ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
एते क्षत्रिय़दाय़ादास्तत्र तत्र परिश्रुताः |
७५ क
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
एते गच्छन्ति वहवः पन्थानो दक्षिणापथम् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
१७७
धृष्टद्युम्न उवाच
एते गान्धारराजस्य सुताः सर्वे समागताः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२०२
व्याध उवाच
एते गुणाः पञ्च भूमेः सर्वेभ्यो गुणवत्तराः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
एते गुणाः समस्ताः स्युर्नृपस्य सततं स्थिराः |
३१ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
एते गोमाय़वो भीमा निहतानां यशस्विनाम् |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
एते ग्राम्याः समाख्याताः पशवः सप्त साधुभिः ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
एते च कौरवास्तूर्णं प्रभग्नान्दृश्य सोमकान् |
६८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
एते च त्वरिता वीरा वसुषेणमवारय़न् ||
२२ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
अग्निरु उवाच
एते च पितरो राजन्नेष श्राद्धविधिः परः |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
एते च सर्वे पाञ्चालाः सृञ्जय़ाश्च सहान्वय़ाः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
एते च सहिताः शूराः पाञ्चालाः पाण्डवैः सह |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
पराशर उवाच
एते चतुर्भ्यो वर्णेभ्यो जाय़न्ते वै परस्परम् ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
एते चमूमुखगताः स्मरन्तः क्लेशमात्मनः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
एते चरन्ति पाञ्चाला दिक्षु सर्वासु भारत |
१०४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
एते चरन्ति सङ्ग्रामे कर्णचापच्युताः शराः |
१०३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
एते चान्ये च जाय़न्ते यदा राजा प्रमाद्यति |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
एते चान्ये च निहता वहवः क्षत्रिय़र्षभाः |
४३ क
विराट पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
एते चान्ये च भूय़ांसो देशाद्देशं यथाविधि ||
१४ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
सञ्जय़ उवाच
एते चान्ये च राजानो देवैरपि सुदुर्जय़ाः ||
६० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
एते चान्ये च राजेन्द्र प्रवीरा जय़गृद्धिनः |
७२ क
मौसल पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
एते चान्ये च वहव उत्पाता भय़शंसिनः |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
एते चान्ये च वहव उत्पातास्तत्र मारिष |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
एते चान्ये च वहवः कश्यपस्यात्मजाः स्मृताः |
१७ क