द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वार्जुनं सङ्ख्ये पराशरसुतस्तदा |
१०७ क
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वार्जुनः शैलमामन्त्र्य परवीरहा |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वार्जुनः सङ्ख्ये रथोपस्थ उपाविशत् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्त्वार्जुनो वाणानभिमन्त्र्य व्यकर्षय़त् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
एवमुक्त्वाहमसृजमस्त्रमाय़ां नराधिप |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
एवमुच्चावचैरस्त्रैर्भार्गवेण महात्मना |
३ क
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुत्तमकर्माणमनुशिष्य युधिष्ठिरम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
एवमुत्तमकर्माणौ कुरुवृष्णिय़शस्करौ |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुत्तमवीर्यास्ते विहृत्य दिवसान्वहून् |
५५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
एवमुत्तमसंरम्भा युय़ुधुः कुरुपाण्डवाः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
९
देवदूत उवाच
एवमुत्थास्यति रुरो तव भार्या प्रमद्वरा ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
एवमुद्धर्षितो द्रोणः कोपितश्चात्मजेन ते |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुद्धर्षितो मात्रा स राजा वभ्रुवाहनः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
एवमूचुर्महात्मानं रौहिणेय़ं नराधिपाः ||
१० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेकं साङ्ख्ययोगं वेदारण्यकमेव च |
७६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
एवमेकतवाक्येन द्वितत्रितमतेन च |
५४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेकादशावृत्ताः सेना दुर्योधनस्य ताः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१२
भीष्म उवाच
एवमेकादशैतानि वुद्ध्या त्ववसृजेन्मनः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४१
व्यास उवाच
एवमेके व्यवस्यन्ति निवृत्तिरिति चापरे ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
एवमेके व्यवस्यन्ति निवृत्तिरिति चापरे |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
एवमेकेन तां सेनां सौभद्रेण शितैः शरैः |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
एवमेतं महाव्यूहं व्यूह्य द्रोणो व्यवस्थितः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
एवमेतं महाव्यूहं व्यूह्य भारत पाण्डवाः |
५५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
एवमेतं महाव्यूहं व्यूह्य भारत पाण्डवाः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
एवमेतच्च नैवं च यद्भूतं सृजते जगत् |
५२ क
आदि पर्व
अध्याय
९१
गङ्गो उवाच
एवमेतत्करिष्यामि पुत्रस्तस्य विधीय़ताम् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८
शल्य उवाच
एवमेतत्करिष्यामि यथा तात त्वमात्थ माम् |
३२ क
विराट पर्व
अध्याय
२१
भीमसेन उवाच
एवमेतत्करिष्यामि यथा त्वं भीरु भाषसे |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतत्करिष्यामि यथा त्वमनुभाषसे |
७९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८
शल्य उवाच
एवमेतत्करिष्यामि यथा मां सम्प्रभाषसे |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय
२१
कीचक उवाच
एवमेतत्करिष्यामि यथा सुश्रोणि भाषसे |
१४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१३
युधिष्ठिर उवाच
एवमेतत्करिष्यामि यथात्थ पृथिवीपते |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
राम उवाच
एवमेतत्कुरुश्रेष्ठ कर्तव्यं भूतिमिच्छता |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
एवमेतत्तडागेषु कीर्तितं फलमुत्तमम् |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९६
जनमेजय़ उवाच
एवमेतत्तदा वृत्तं तस्य यज्ञे महात्मनः |
१५ क
विराट पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतत्तु सञ्चिन्त्य यत्कृतं मन्यसे हितम् |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
१८५
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमेतत्त्वय़ा कार्यमापृष्टोऽसि व्रजाम्यहम् |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
२८८
राजो उवाच
एवमेतत्त्वय़ा भद्रे कर्तव्यमविशङ्कय़ा |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३०
भीष्म उवाच
एवमेतत्परं स्थानं व्राह्मण्यं नाम भारत |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
११३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतत्पुरा कुन्ति व्युषिताश्वश्चकार ह |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
एवमेतत्पुरा दृष्टं मय़ा वै ज्ञानचक्षुषा |
९७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
एवमेतत्पुरा विप्रैः कथामृतमिहोद्धृतम् ||
११५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
एवमेतत्पुरा वृत्तं तस्य यज्ञे महात्मनः |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
एवमेतत्पुरा वृत्तं यन्मां पृच्छसि पाण्डव ||
७९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४५
भीष्म उवाच
एवमेतत्पुरा वृत्तं लुव्धकस्य महात्मनः |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
एवमेतत्पुरावृत्तं तदा कथितवानृषिः ||
१५६ ख
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतत्पुरावृत्तं तेषामक्लिष्टकर्मणाम् |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भृगुरु उवाच
एवमेतत्पुरावृत्तं नहुषस्य व्यतिक्रमात् |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
एवमेतत्समुद्दिष्टं धर्मेषु भरतर्षभ |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
एवमेतत्समुद्दिष्टं प्राय़श्चित्तं सनातनम् |
७२ क