शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
एतत्कारणसामग्र्यं श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
एतत्कार्यं तव सर्वप्रधानं; तेषां तुष्टिः शकुनेश्चावमानः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
एतत्कार्यं महावाहो येनाहं नागमं तदा |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
हंस उवाच
एतत्कार्यममराः संश्रुतं मे; धृतिः शमः सत्यधर्मानुवृत्तिः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
एतत्कुरु महेष्वास राधेय़ यदि शक्यते |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
एतत्कुरुक्षेत्रसमन्तपञ्चकं; पितामहस्योत्तरवेदिरुच्यते ||
१७८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५२
कुरुरु उवाच
एतत्कुरुक्षेत्रसमन्तपञ्चकं; प्रजापतेरुत्तरवेदिरुच्यते ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
एतत्कुरुष्व कौन्तेय़ ततः प्राप्स्यसि तत्फलम् ||
६९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
एतत्कुरुष्व कौन्तेय़ यथोक्तं वचनं मम |
८२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
एतत्कृतं महाराज त्वय़ेच्छामि परन्तप |
५७ क
सभा पर्व
अध्याय
६६
दुर्योधन उवाच
एतत्कृत्यतमं राजन्नस्माकं भरतर्षभ |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
एतत्कृत्यतमं राज्ञो नित्यमेवेति लक्षय़ेत् |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
एतत्कृत्वा महत्कर्म हत्वा कर्णं महारथम् |
११० क
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
एतत्कृत्वा महाराज धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
एतत्कृत्वा शुभं शास्त्रं ततः स भगवान्प्रभुः |
७५ क
वन पर्व
अध्याय
१४८
हनूमानु उवाच
एतत्कृतय़ुगं नाम त्रैगुण्यपरिवर्जितम् |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
एतत्क्षममहं मन्ये तव पार्थैरविग्रहम् |
४९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
एतत्क्षममहं मन्ये पृथिव्यास्तव चाभिभो ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
एतत्क्षेममहं मन्ये तव चैव कुलस्य च ||
४६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२९६
वसिष्ठ उवाच
एतत्तत्तत्त्वमित्याहुर्निस्तत्त्वमजरामरम् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
८५
अष्टक उवाच
एतत्तत्त्वं सर्वमाचक्ष्व पृष्टः; क्षेत्रज्ञं त्वां तात मन्याम सर्वे ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
एतत्तत्त्वमहं वेद जन्म तात शिखण्डिनः |
६४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३
युधिष्ठिर उवाच
एतत्तत्त्वेन मे राजन्सर्वमाख्यातुमर्हसि |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७१
शक्र उवाच
एतत्तथ्येन भगवन्मम शंसितुमर्हसि ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय
३८
वृहन्नडो उवाच
एतत्तदर्जुनस्यासीद्गाण्डीवं परमाय़ुधम् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
४१
भगवानु उवाच
एतत्तदेव गाण्डीवं तव पार्थ करोचितम् |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
एतत्तदेवं हि |
११४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वासुदेव उवाच
एतत्तद्वैष्णवं तेजो मम वक्त्राद्विनिःसृतम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
९९
इन्द्र उवाच
एतत्तपश्च पुण्यं च धर्मश्चैव सनातनः |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१४
युधिष्ठिर उवाच
एतत्तपो महाराज उताहो किं तपो भवेत् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८०
भीष्म उवाच
एतत्तपो विदुर्धीरा न शरीरस्य शोषणम् ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
एतत्तवैवानुरूपं कर्मार्जुन महाहवे |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५७
भीष्म उवाच
एतत्तु क्षीय़ते तात साधूनामुपसेवनात् ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
युधिष्ठिर उवाच
एतत्तु ज्ञातुमिच्छामि कथं रेतः प्रवर्तते ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्तु धर्मराजाय़ प्रदास्यामि परन्तप |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
९७
नारद उवाच
एतत्तु नागलोकस्य नाभिस्थाने स्थितं पुरम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४५
भीष्म उवाच
एतत्तु नापरे चक्रुर्न परे जातु साधवः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३४
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्तु महदाख्यानं श्रुत्वा पारिक्षितो नृपः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
एतत्तु महदाश्चर्यं यदय़ं पर्वतोत्तमः |
५४ क
वन पर्व
अध्याय
९५
लोपामुद्रो उवाच
एतत्तु मे यथाकामं सम्पादय़ितुमर्हसि ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
४६
जनमेजय़ उवाच
एतत्तु श्रोतुमिच्छामि अटव्यां निर्जने वने |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
एतत्तुल्यं फलमस्याहुरग्र्यं; सर्वे सन्तस्त्वृषय़ो ये च सिद्धाः ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
एतत्ते कथितं तात भार्गवस्य महात्मनः |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३०
व्यास उवाच
एतत्ते कथितं तात यन्मां त्वं परिपृच्छसि ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६५
भीष्म उवाच
एतत्ते कथितं तात यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
भीष्म उवाच
एतत्ते कथितं तात यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
एतत्ते कथितं पुत्र मय़ाख्यानमनुत्तमम् |
९३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३९
व्रह्मो उवाच
एतत्ते कथितं पुत्र यथावदनुपृच्छतः |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते कथितं राजन्कार्त्तिकेय़ाभिषेचनम् |
८८ क