अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
अष्टावक्र उवाच
भद्रे धर्मं विजानीष्व ज्ञात्वा चोपरमस्व ह ||
६३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
अष्टावक्र उवाच
भद्रे निवेष्टुकामं मां विद्धि सत्येन वै शपे |
६२ क
वन पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
भरणं पालनं चापि न कुर्यादनुय़ाय़िनाम् ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
भरणं पुत्रदाराणां वेदानां पारणं तथा |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
इन्द्र उवाच
भरणं पुत्रदाराणां शौचमद्रोह एव च ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
भरणाद्धि स्त्रिय़ो भर्ता पात्याच्चैव स्त्रिय़ाः पतिः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
भरणार्थं तु विप्राणां व्रह्मन्काङ्क्षे न लोभतः ||
४९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
भरणीषु द्विजातिभ्यस्तिलधेनुं प्रदाय़ वै |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
भरणे चैव सर्वस्य विदुरः सत्यसङ्गरः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
भरतं चैव दौःषन्तिं मृतं सृञ्जय़ शुश्रुम |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
भरतं नामतः कृत्वा यौवराज्येऽभ्यषेचय़त् ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
भरतः खलु काशेय़ीमुपय़ेमे सार्वसेनीं सुनन्दां नाम |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
भरतश्चापि दौःषन्तिर्लेभे भूमिशय़ादसिम् |
७४ क
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
भरतस्तथा सुरथः सुनीथो नैषधो नलः |
११ क
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
भरतस्तदवाप्नोतु वनं गच्छतु राघवः ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्तिसृषु स्त्रीषु नव पुत्रानजीजनत् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२०९
मार्कण्डेय़ उवाच
भरतस्तु सुतस्तस्य भरत्येका च पुत्रिका ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्य कुरोः पूरोरजमीढस्य चान्वय़े ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्य च वीरस्य सार्वभौमस्य पार्थिव |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्य दिलीपस्य शिवेरौशीनरस्य च ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्य महत्कर्म सर्वराजसु पार्थिवाः |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्यान्ववाय़े हि देवकल्पा महौजसः |
५० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
भरतस्यान्वय़े चैवाजमीढो नाम पार्थिवः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्यान्वय़े जातं शन्तनोश्च महात्मनः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्यान्वय़े जाता ये वीटां नाधिगच्छत ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
भरतस्यान्वय़े जाताः सत्त्ववन्तो महारथाः |
५४ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
भरतस्याश्रमं गत्वा सर्वपापप्रमोचनम् |
११३ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
भरताद्भारती कीर्तिर्येनेदं भारतं कुलम् |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
भरताध्युषितं पूर्वं सोऽध्यतिष्ठत्पुरोत्तमम् |
४० क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
भरतानां च ये पूर्वे ते चैनं प्रशशंसिरे ||
१११ ख
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
भरतानां समुच्छेदो व्यक्तं मद्भाग्यसङ्क्षय़ात् ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
भरताय़ हनूमन्तं दूतं प्रस्थापय़त्तदा ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय
२०९
मार्कण्डेय़ उवाच
भरतो नामतः सोऽग्निर्द्वितीय़ः शंय़ुतः सुतः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
२०९
मार्कण्डेय़ उवाच
भरतो भरतस्याग्नेः पावकस्तु प्रजापतेः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२११
मार्कण्डेय़ उवाच
भरत्येष प्रजाः सर्वास्ततो भरत उच्यते ||
१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
भरद्वाजं समासाद्य युय़ुधानस्तु मारिष |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
भरद्वाजः कश्यपो गौतमश्च; विश्वामित्रो जमदग्निर्वसिष्ठः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
भरद्वाजश्च भगवांस्तथा गौरशिरा मुनिः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
भरद्वाजश्च रैभ्यश्च यवक्रीतस्त्रितस्तथा ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
भरद्वाजश्च रैभ्यश्च सखाय़ौ सम्वभूवतुः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२१
वैशम्पाय़न उवाच
भरद्वाजसखा चासीत्पृषतो नाम पार्थिवः |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
भरद्वाजस्तु कौन्तेय़ कृत्वा स्वाध्याय़माह्निकम् |
१ क
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
भरद्वाजस्तु शूद्रस्य तच्छ्रुत्वा विप्रिय़ं वचः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१५८
अर्जुन उवाच
भरद्वाजस्य गन्धर्व गुरुपुत्रः शतक्रतोः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
भरद्वाजस्य च स्कन्नं द्रोण्यां शुक्रमवर्धत |
८९ क
वन पर्व
अध्याय
१३९
लोमश उवाच
भरद्वाजस्य चोत्थानं यवक्रीतस्य चोभय़ोः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५४
व्राह्मण उवाच
भरद्वाजस्य तु सखा पृषतो नाम पार्थिवः |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
भरद्वाजस्य दुहिता रूपेणाप्रतिमा भुवि |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२०९
मार्कण्डेय़ उवाच
भरद्वाजस्य भार्या तु वीरा वीरश्च पिण्डदः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
युधिष्ठिर उवाच
भरद्वाजस्य विप्रर्षेस्ततो मे वुद्धिरुत्तमा ||
४ ख