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आदि पर्व
अध्याय १३७
वैशम्पाय़न उवाच
एवङ्गते मय़ा शक्यं यद्यत्कारय़ितुं हितम् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय १८२
अर्जुन उवाच
एवङ्गते यत्करणीय़मत्र; धर्म्यं यशस्यं कुरु तत्प्रचिन्त्य |
१० क
वन पर्व
अध्याय १५२
भीम उवाच
एवङ्गतेषु द्रव्येषु कः कं याचितुमर्हति ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय ५५
वृहदश्व उवाच
एवङ्गुणं नलं यो वै कामय़ेच्छपितुं कले ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
व्यास उवाच
एवङ्गुणः सम्वभूवेह राजा; यस्य क्रतौ तत्सुवर्णं प्रभूतम् |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
एवङ्गुणसमाय़ुक्तं ददर्श स वनं नृपः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
एवङ्गुणसमाय़ुक्तां वसवे वसुनन्दिनी |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय १६०
गन्धर्व उवाच
एवङ्गुणस्य नृपतेस्तथावृत्तस्य कौरव |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय २८६
भीष्म उवाच
एवद्वै सर्वमाख्यातं मुनिना सुमहात्मना |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३६
व्यास उवाच
एवन्धर्मसु विद्वांसस्ततः स्वर्गमुपागमन् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
एवन्धर्मा नापदः सन्तितीर्षे; द्धीनवीर्यो यश्च भवेदशिष्टः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमग्निर्भगवता नष्टः पूर्वमथर्वणा |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमग्निर्वरं प्रादात्स्त्रीणामप्रतिवारणे |
२४ क
वन पर्व
अध्याय २२०
स्कन्द उवाच
एवमग्निस्त्वय़ा सार्धं सदा वत्स्यति शोभने ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८२
युधिष्ठिर उवाच
एवमग्राह्यके तस्मिञ्ज्ञातिसम्वन्धिमण्डले |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
अग्निरु उवाच
एवमङ्गिरसश्चैव कवेश्च प्रसवान्वय़ैः |
४३ क
विराट पर्व
अध्याय ५
अर्जुन उवाच
एवमत्र यथाजोषं विहरिष्याम भारत ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १७८
युधिष्ठिर उवाच
एवमद्भुतकर्माणमिति मे संशय़ो महान् ||
२९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
अश्वत्थामो उवाच
एवमधार्मिकाः पापाः पाञ्चाला भिन्नसेतवः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
एवमध्यापय़ञ्शिष्यान्व्यासः पुत्रं च वीर्यवान् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
भृगुरु उवाच
एवमन्तं भगवतः प्रमाणं सलिलस्य च |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
नारद उवाच
एवमन्नं च सूर्यश्च पवनः शुक्रमेव च |
४१ क
विराट पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमन्यानि चापानि वहूनि कृतहस्तवत् |
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
एवमन्ये न कुर्वन्ति देवाः संसारमोचनम् |
१६२ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमन्ये मनुष्येन्द्र वहवोंऽशा दिवौकसाम् |
९२ क
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
एवमन्ये महेष्वासा व्राह्मणैः क्षत्रिय़ा भुवि ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
एवमन्यैरपि भृशं वध्यमानो महारणे |
४५ क
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
एवमन्योन्यमाय़स्ता योधा जघ्नुर्महामृधे |
८७ क
आदि पर्व
अध्याय २५
कश्यप उवाच
एवमन्योन्यशापात्तौ सुप्रतीकविभावसू |
१८ क
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमन्योन्यसंय़ुक्तं युद्धमासीत्सुदारुणम् |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
एवमप्यनुमानेन ह्यलिङ्गमुपलभ्यते |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३
सात्यकिरु उवाच
एवमप्ययमत्यन्तं परान्नार्हति याचितुम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२
व्यास उवाच
एवमप्यशुभं कर्म न भूतं न भविष्यति ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय ६२
वृहदश्व उवाच
एवमप्यसुखाविष्टा विभर्षि परमं वपुः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
स्त्र्यु उवाच
एवमप्यस्तु धर्मज्ञ संय़ुज्येय़ं सुतेन ते |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २९४
कर्ण उवाच
एवमप्यस्तु भगवन्नेकवीरवधे मम |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
एवमप्यस्मि भगवन्कृतकृत्यो न संशय़ः |
५१ क
वन पर्व
अध्याय २२७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमप्याय़तिं रक्षन्नाभ्यनुज्ञातुमर्हति ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
एवमप्रतिवुद्धत्वादवुद्धजनसेवनात् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
एवमप्रतिवुद्धत्वादवुद्धमनुवर्तते |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
एवमप्रतिवुद्धश्च वुध्यमानश्च तेऽनघ |
७८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
एवमभ्यधिकः पार्थाद्भविष्यामि गुणैरहम् |
५३ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
एवमभ्यधिकः शल्याद्भविष्यामि महामृधे ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय १३१
राजो उवाच
एवमभ्यागतस्येह कपोतस्याभय़ार्थिनः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
एवमभ्याहते लोके कालेनोपनिपीडिते |
७५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
पुत्र उवाच
एवमभ्याहते लोके समन्तात्परिवारिते |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २११
भीष्म उवाच
एवमर्थैरनर्थैश्च दुःखिताः सर्वजन्तवः |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
एवमल्पश्रुतो मन्त्री कल्याणाभिजनोऽप्युत |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
एवमव्यक्तविषय़ं क्षरमाहुर्मनीषिणः |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
एवमव्यग्रवर्णानां कपिलानां महौजसाम् |
३० क