सभा पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाख्याय़ पार्थेभ्यो नारदो जनमेजय़ |
७२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४०
भीष्म उवाच
एवमाख्याय़ स मुनिर्यज्ञकारोऽगमत्तदा |
४० क
विराट पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाख्याय़मानं तु छन्नं सत्रेण पाण्डवम् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय
१७१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमागमनं तत्र कथय़ित्वा धनञ्जय़ः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
एवमाचर कौन्तेय़ धर्मराजे युधिष्ठिरे |
६८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
एवमाचरत क्षिप्रं ततः सिद्धिमवाप्स्यथ ||
३९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
एवमाचार्यपुत्रेण समाहूतो युय़ुत्सय़ा |
२० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाज्ञाप्य राजा स भ्रातृभिः सह पाण्डवः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
एवमात्थ वचस्तस्मात्तमो दीर्घं प्रवेक्ष्यसि ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
काल उवाच
एवमात्मकृतं कर्म मानवः प्रतिपद्यते ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२
व्यास उवाच
एवमात्मपरित्यागस्तव राजन्न शोभनः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
एवमात्मा न जानीते क्व गमिष्ये कुतो न्वहम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२८३
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमात्मा पिता माता श्वश्रूः श्वशुर एव च |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमात्मेच्छय़ा राजन्प्रतिवुद्धो न जाय़ते ||
७० ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमादि ततः सर्वे सहितास्ते नराधिपाः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
एवमादि तु कौन्तेय़ श्रुत्वाहं सारथेर्वचः |
२६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमादि तु वार्ष्णेय़्यास्तदस्याः परिदेवितम् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमादि प्रिय़ं प्रीत्या हृद्यमुक्त्वा मनोनुगम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
एवमादि महाराज विलप्य दिवमास्थितः |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
एवमादि मय़ा सृष्टं पृथिव्यां त्वत्प्रसादजम् |
६० क
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
एवमादि मय़ान्यैर्वा शक्यं वक्तुं भवेद्वहु |
९० क
आदि पर्व
अध्याय
३८
सूत उवाच
एवमादिश्य शिष्यं स प्रेषय़ामास सुव्रतः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१००
लोमश उवाच
एवमादीनि कर्माणि येषां सङ्ख्या न विद्यते |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
एवमादीनि चान्यानि परित्यक्तानि मेधय़ा |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
एवमादीनि दुःखानि सा विलप्य वराङ्गना |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
एवमादीनि दृष्ट्वाथ निमित्तानि वृकोदरः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
नाचिकेत उवाच
एवमादीनि मे तत्र धर्मराजो न्यदर्शय़त् |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६९
सञ्जय़ उवाच
एवमादीनि वाक्यानि क्रूराणि परुषाणि च |
४० क
विराट पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमादीनि वाक्यानि विलपन्तमचेतसम् |
४१ क
वन पर्व
अध्याय
२६२
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमादीनि वाक्यानि श्रुत्वा सीताथ जानकी |
३५ क
शल्य पर्व
अध्याय
४९
सिद्धा ऊचुः
एवमादीनि सञ्चिन्त्य देवलो निश्चय़ात्ततः |
६१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाद्या मनुष्याणां स्त्रीणां च भरतर्षभ |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
एवमाभाष्य चान्योन्यं क्रोधसंरक्तलोचनौ |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाभाष्य तान्सर्वान्न्यवर्तत स राक्षसः |
५५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
एवमाभाष्य राजानमव्रवीन्माधवं वचः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
एवमाभाष्यमाणोऽपि भ्रातृभिः कुरुनन्दन |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
एवमारण्यशास्त्राणामुग्रमुग्रतरं विधिम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
११०
पाण्डुरु उवाच
एवमारण्यशास्त्राणामुग्रमुग्रतरं विधिम् |
३५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमार्ता विलपती ददर्श निहतं सुतम् ||
५९ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४७
नारद उवाच
एवमावेदय़ामासुर्मुनय़स्ते ममानघ |
६ क
वन पर्व
अध्याय
२४०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाशा दृढा तस्य धार्तराष्ट्रस्य दुर्मतेः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
एवमाशाकृतो राजंश्चरन्वनमिदं पुरा ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
एवमाशीः प्रय़ुक्ता हि दक्षेण यजता पुरा |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८४
पराशर उवाच
एवमाश्रमिणः सर्वे गृहस्थे यान्ति संस्थितिम् ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वासनं कृत्वा सर्वराष्ट्रेषु भारत |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
एवमाश्वासितः पार्थः कृष्णेनाद्भुतकर्मणा |
७० क
आदि पर्व
अध्याय
४८
सूत उवाच
एवमाश्वासितस्तेन ततः स भुजगोत्तमः |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वासितस्तेन वैराटिः सव्यसाचिना |
१६ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाश्वासितस्तेन सञ्जय़ेन महात्मना |
३७ क
वन पर्व
अध्याय
२८२
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमाश्वासितस्तैस्तु सत्यवाग्भिस्तपस्विभिः |
२० क