भीष्म पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं रणे क्रुद्धाश्छादय़ां चक्रिरे शरैः ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं रणे दृष्ट्वा कालान्तकय़मोपमम् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं रणे दृष्ट्वा ज्वलन्तमिव पावकम् |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं रणे राजन्वाह्वोरुरसि चार्पय़त् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं रणे राजन्समन्तात्पर्यवारय़त् ||
७ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं रणे हित्वा स्नेहमुत्सृज्य पाण्डवैः ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं शरैश्चापि रुक्मपुङ्खैः शिलाशितः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं सपाञ्चाल्यं चेदिकेकय़संवृतम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं समाकीर्णं दृष्ट्वास्त्रेण धनञ्जय़ः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१४१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं समालिङ्ग्य व्यनदद्भैरवं रवम् ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं समासाद्य ततोऽय़ुध्यन्त भारत |
५१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं समासाद्य त्वां च पाण्डव कौरवाः |
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२७
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं समासाद्य पश्यतां नो दुरात्मनाम् ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं समासाद्य मुहूर्तं सोऽभ्यवर्तत ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं समासाद्य समन्तात्पर्यवारय़न् |
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं समुद्दिश्य प्रेषय़ामासुरोजसा ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं सुसङ्क्रुद्धं गाङ्गेय़स्य वधैषिणम् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं हि कर्माणि स्वय़ं कुर्वाणमच्युत |
२० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनः कटाक्षेण वीक्षां चक्रे धनञ्जय़म् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः कलिङ्गानामार्छद्भारत वाहिनीम् |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः कुरूंश्चापि द्रावय़न्वह्वशोभत ||
७७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः कुरून्राजन्हस्त्यनीकं च सर्वशः ||
७४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः कुरून्सर्वान्पुत्रांश्च तव मारिष |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनः खलु कैकेय़ीमुपय़ेमे सुकुमारीं नाम |
४५ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः पुनः क्रुद्धो दुर्योधनमुवाच ह ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः प्रजज्वाल क्रोधेनाग्निरिवेन्धनैः ||
६३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः प्रहृष्टात्मा गदामाशु परामृशत् ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः शिनेर्नप्ता शिखण्डी जनमेजय़ः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः समाकीर्णो द्रौणिना निशितैः शरैः |
३ क
सभा पर्व
अध्याय
७१
धृतराष्ट्र उवाच
भीमसेनः सव्यसाची माद्रीपुत्रौ च तावुभौ ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनः सुसङ्क्रुद्ध इदं वचनमव्रवीत् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०४
धृतराष्ट्र उवाच
भीमसेनदवाग्नेस्तु मम पुत्रतृणोलपम् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३५
कुन्त्यु उवाच
भीमसेनद्वितीय़श्च लोकमुद्वर्तय़िष्यति ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनपुरोगाश्च एकतः पर्यवारय़न् ||
५४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनपुरोगाश्च भ्रातरः सर्व एव ते ||
४१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनपुरोगास्तं पाञ्चालाः समुपाद्रवन् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनपुरोगास्तु पाञ्चालाः समुपाद्रवन् ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
भीमसेनप्रभावात्तु यज्जीवामि धनञ्जय़ |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनप्रभावेन यमय़ोश्च नरोत्तम ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनभय़त्रस्तं सैन्यं च समकम्पत |
८० क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनभय़ागाधे मज्जन्तं व्यसनार्णवे ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनभय़ादिच्छन्पुत्रांस्तारय़ितुं तव ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
भीमसेनभय़ाद्यत्र दैवेनाभिप्रचोदितः |
१८५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनभय़ाविष्टा धृष्टद्युम्नविमोहिता ||
५६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनभय़ोद्विग्नं विवर्णवदनं तथा |
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमतिक्रुद्धं दृष्ट्वा भीमपराक्रमम् ||
१८ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमथापश्यत्तेनैव वपुषान्वितम् ||
५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमथाभ्येत्य कुपिता वाक्यमव्रवीत् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमथाय़ान्तं भीष्मं प्रति महावलम् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमथाय़ान्तं व्यादितास्यमिवान्तकम् |
८ क