chevron_left  एवमेतत्सर्वमितिarrow_drop_down
सभा पर्व
अध्याय ३८
शिशुपाल उवाच
एवमेतत्सर्वमिति सर्वं तद्वितथं ध्रुवम् ||
१६ ग
आदि पर्व
अध्याय १०७
व्यास उवाच
एवमेतत्सौवलेय़ि नैतज्जात्वन्यथा भवेत् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३८
व्रह्मो उवाच
एवमेतदतिक्रान्तं द्रष्टव्यं नैवमित्यपि |
२४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
कृप उवाच
एवमेतदनादृत्य वर्तते यस्त्वतोऽन्यथा |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
एवमेतदनाद्यन्तं भूतसंहारकारकम् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतदनिर्देश्यं मार्गमावृत्य भानुमान् |
३३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतदिति प्राहुस्तदभूद्रोमहर्षणम् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२
शल्य उवाच
एवमेतद्द्विजश्रेष्ठ देवी चेय़ं प्रसाद्यताम् ||
२७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
करालजनक उवाच
एवमेतद्द्विजश्रेष्ठ वेदशास्त्रेषु पठ्यते ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
एवमेतद्ध्रुवं ज्ञात्वा ततो वीभत्सुरागतः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २२
इन्द्रिय़ाण्यू ऊचुः
एवमेतद्भवेत्सत्यं यथैतन्मन्यते भवान् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय १७८
सर्प उवाच
एवमेतद्भवेद्राजन्कार्यापेक्षमनन्तरम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतद्भवेद्राजन्यदि राजा न वालिशः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
एवमेतद्यथा चैतन्न गृह्णाति तथा भवान् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४०
धृतराष्ट्र उवाच
एवमेतद्यथा मां त्वमनुशाससि नित्यदा |
२८ क
वन पर्व
अध्याय २८२
सावित्र्यु उवाच
एवमेतद्यथा वेत्थ सङ्कल्पो नान्यथा हि वः |
३६ क
वन पर्व
अध्याय ९५
अगस्त्य उवाच
एवमेतद्यथात्थ त्वं तपोव्ययकरं तु मे |
२१ क
वन पर्व
अध्याय ५८
नल उवाच
एवमेतद्यथात्थ त्वं दमय़न्ति सुमध्यमे |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
एवमेतद्यथात्थ त्वं न मिथ्यास्तीति किञ्चन ||
७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
च्यवन उवाच
एवमेतद्यथात्थ त्वं व्राह्मण्यं तात दुर्लभम् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १४३
युधिष्ठिर उवाच
एवमेतद्यथात्थ त्वं हिडिम्वे नात्र संशय़ः |
१६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
अश्वत्थामो उवाच
एवमेतद्यथात्थ त्वमनुशास्मीह मातुल |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
एवमेतद्यथात्थ त्वमस्त्येषोऽतिक्रमो मम |
११४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३३
अर्जुन उवाच
एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १८८
कुन्त्यु उवाच
एवमेतद्यथाहाय़ं धर्मचारी युधिष्ठिरः |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय ५२
कुरुरु उवाच
एवमेतद्यदुश्रेष्ठ कृष्टं राजर्षिणा पुरा |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
एवमेतद्विजानन्तः साम्यतां प्रतिय़ान्त्युत ||
४४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
इन्द्र उवाच
एवमेतद्व्रह्मवलं गरीय़ो; न व्रह्मतः किञ्चिदन्यद्गरीय़ः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३०
व्यास उवाच
एवमेतन्न चाप्येवमुभे चापि न चाप्युभे |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
एवमेतन्न वो हन्यादस्त्रं भूमौ निराय़ुधान् ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
एवमेतन्न सन्देहो रमेय़ं व्राह्मणैः सह |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १७७
युधिष्ठिर उवाच
एवमेतन्मतं सर्प ताभ्यां हीनं न विद्यते |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
एवमेतन्महद्युद्धं द्रोणपार्षतय़ोरभूत् |
५२ क
वन पर्व
अध्याय ११
धृतराष्ट्र उवाच
एवमेतन्महाप्राज्ञ यथा वदसि नो मुने |
१ क
वन पर्व
अध्याय ८
दुःशासन उवाच
एवमेतन्महाप्राज्ञ यथा वदसि मातुल |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
एवमेतन्महाप्राज्ञ यथा वदसि वुद्धिमान् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय १९९
द्रुपद उवाच
एवमेतन्महाप्राज्ञ यथात्थ विदुराद्य माम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५२
व्राह्मण उवाच
एवमेतन्महाप्राज्ञ विज्ञातार्थ भुजङ्गम |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
एवमेतन्महाराज यथा वदसि भारत |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतन्महाराज यथाय़ं केशवोऽव्रवीत् |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
एवमेतन्महाराज युद्धशेषमवर्तत |
८५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
एवमेतन्महाराज येन जातः स एव सः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
एवमेतन्महावाहो धर्मेषु परिनिष्ठितम् |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
एवमेतन्महावाहो नात्र मिथ्यास्ति किञ्चन |
१ क
वन पर्व
अध्याय १२९
लोमश उवाच
एवमेतन्महावाहो पश्यन्ति परमर्षय़ः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४
द्रुपद उवाच
एवमेतन्महावाहो भविष्यति न संशय़ः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतन्महावाहो यथा वदसि केशव ||
६१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २३
कुन्त्यु उवाच
एवमेतन्महावाहो यथा वदसि पाण्डव |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७७
भगवानु उवाच
एवमेतन्महावाहो यथा वदसि पाण्डव |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
भीष्म उवाच
एवमेतन्महावाहो यथा वदसि भारत |
१६ क